डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा दिखाने वाली तस्वीरें साझा कीं। नए नक्शे और नाटो को लेकर बयान के बाद वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है और कई देशों में चिंता बढ़ी है।
America: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों और सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार मामला केवल बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्रंप ने ऐसी तस्वीरें साझा की हैं, जिनमें ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा दिखाया गया है। इन तस्वीरों के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और कई देशों में चिंता बढ़ गई है।
सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ी बेचैनी
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर कुछ तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों में वह ग्रीनलैंड की बर्फीली जमीन पर अमेरिकी झंडा फहराते हुए नजर आ रहे हैं। तस्वीर में उनके साथ अमेरिका के उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री भी दिखाई दे रहे हैं।
इन तस्वीरों में सबसे चौंकाने वाली बात एक बोर्ड है, जिस पर लिखा हुआ है कि वर्ष 2026 से ग्रीनलैंड अमेरिका का इलाका है। इस एक पंक्ति ने ही यूरोप समेत कई देशों में बेचैनी पैदा कर दी है।
हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ये तस्वीरें वास्तविक हैं या केवल प्रतीकात्मक संदेश देने के लिए बनाई गई हैं, लेकिन ट्रंप समर्थक इसे अमेरिका की ताकत का प्रदर्शन बता रहे हैं।
नया नक्शा बना विवाद की जड़

ट्रंप ने केवल ग्रीनलैंड की तस्वीरें ही साझा नहीं कीं, बल्कि एक और तस्वीर पोस्ट की, जिसमें एक बड़ा नक्शा दिखाया गया है। इस नक्शे में कनाडा, ग्रीनलैंड और वेनेजुएला को अमेरिका का हिस्सा बताया गया है।
यह नक्शा देखते ही दुनिया भर में सवाल उठने लगे हैं। कनाडा अमेरिका का पुराना सहयोगी देश है, ऐसे में उसे नक्शे में शामिल करना कई संकेत देता है। वहीं वेनेजुएला को लेकर ट्रंप पहले भी सख्त रुख दिखाते रहे हैं।
यूरोपीय देशों की चिंता
ट्रंप की इन पोस्ट के बाद यूरोपीय देशों में चिंता साफ देखी जा सकती है। फ्रांस और इटली जैसे देशों के नेता फिलहाल सार्वजनिक रूप से ज्यादा नहीं बोले हैं, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ट्रंप इस तरह के कदम उठाकर यूरोप पर दबाव बनाना चाहते हैं, ताकि भविष्य में किसी भी बातचीत में अमेरिका की स्थिति मजबूत रहे। ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन क्षेत्र है और यूरोप के लिए इसका विशेष महत्व है। ऐसे में ट्रंप का यह दावा सीधे तौर पर यूरोपीय हितों से टकराता नजर आता है।
नाटो को लेकर ट्रंप का बयान
डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट में यह भी दावा किया कि उन्होंने नाटो के प्रमुख से फोन पर बातचीत की है। ट्रंप के अनुसार इस बातचीत में ग्रीनलैंड को लेकर चिंता जताई गई और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।

उन्होंने यह भी कहा कि स्विट्जरलैंड में होने वाली एक बैठक में इस मुद्दे को विस्तार से उठाया जाएगा। ट्रंप का कहना है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है और इस विषय पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
सुरक्षा का तर्क देकर आगे बढ़े ट्रंप
ट्रंप लगातार यह दोहरा रहे हैं कि ग्रीनलैंड केवल बर्फ से ढका इलाका नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक रूप से बहुत अहम स्थान पर स्थित है। उनका कहना है कि उत्तरी क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए अमेरिका को सतर्क रहना जरूरी है। ट्रंप इसे भविष्य के खतरे से बचाव का कदम बता रहे हैं। वहीं कई देशों का मानना है कि इस तरह के दावे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं और इससे वैश्विक अस्थिरता बढ़ सकती है।
कनाडा और वेनेजुएला को लेकर संकेत
नए नक्शे में कनाडा को अमेरिका का हिस्सा दिखाया जाना सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात मानी जा रही है। कनाडा और अमेरिका के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं, ऐसे में इस कदम को प्रतीकात्मक दबाव के रूप में देखा जा रहा है।
वेनेजुएला को नक्शे में शामिल करना भी कई सवाल खड़े करता है। ट्रंप पहले भी वेनेजुएला सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपना चुके हैं और इस नक्शे को उसी सोच से जोड़कर देखा जा रहा है।












