भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संगठन को नई दिशा देने के लिए 45 वर्षीय युवा नेता नितिन नवीन को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना है। उनके नाम की घोषणा के बाद देशभर में उनके जीवन, राजनीतिक सफर और पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ गई है।
नई दिल्ली: बीजेपी ने 45 साल के युवा विधायक नितिन नवीन को पार्टी की कमान सौंपते हुए उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया है। इस नई ताजपोशी के बाद लोगों के बीच नितिन नवीन के जीवन और राजनीतिक सफर को लेकर जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। खास तौर पर उनके जन्म स्थान और पैतृक गांव को लेकर कई तरह की चर्चाएं और भ्रम सामने आ रहे हैं।
बिहार के पटना और बांकीपुर से पांच बार विधायक रह चुके नितिन नवीन का जन्म 23 मई 1980 को झारखंड की राजधानी रांची में हुआ था, लेकिन रांची उनका पैतृक शहर नहीं है। नितिन नवीन मूल रूप से बिहार के नवादा जिले के रजौली प्रखंड अंतर्गत अमावां गांव के रहने वाले हैं। इस स्टोरी में हम नितिन नवीन से जुड़े ऐसे ही तमाम पहलुओं से पर्दा उठाने जा रहे हैं।
रांची में जन्म, लेकिन बिहार से गहरा नाता
बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का जन्म 23 मई 1980 को झारखंड की राजधानी रांची में हुआ था। हालांकि, रांची उनका पैतृक स्थान नहीं है। उनका मूल गांव बिहार के नवादा जिले के रजौली प्रखंड अंतर्गत अमावां गांव है। दरअसल, नितिन नवीन के दादा कामेंद्र प्रसाद सिन्हा काफी पहले रोज़गार और पारिवारिक कारणों से पटना आकर बस गए थे। इसी वजह से नितिन नवीन का परिवार लंबे समय से पटना में रह रहा है और उनकी राजनीतिक पहचान भी बिहार की राजधानी से ही बनी।
भले ही नितिन नवीन पटना में रहते हों, लेकिन उनका अपने पैतृक गांव अमावां से भावनात्मक जुड़ाव आज भी कायम है। उनके पिता स्वर्गीय नवीन किशोर सिन्हा भी समय-समय पर गांव जाते रहते थे और नितिन नवीन ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाया। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की खबर के बाद अमावां गांव में जश्न का माहौल है और स्थानीय लोग इस उपलब्धि को पूरे गांव के लिए गर्व का क्षण बता रहे हैं।
पटना और दिल्ली से हुई शिक्षा
नितिन नवीन की प्रारंभिक शिक्षा पटना के सेंट माइकल हाई स्कूल से हुई। उन्होंने वर्ष 1996 में सीबीएसई बोर्ड से कक्षा 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने सीएसकेएम पब्लिक स्कूल, नई दिल्ली से 12वीं की पढ़ाई पूरी की और 1998 में इंटरमीडिएट पास किया। शिक्षा के दौरान ही नितिन नवीन में संगठन, नेतृत्व और राजनीति के प्रति रुचि दिखाई देने लगी थी, जिसका प्रभाव आगे चलकर उनके राजनीतिक करियर में साफ नजर आया।
नितिन नवीन को राजनीति विरासत में मिली। उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा बिहार की राजनीति का जाना-पहचाना नाम थे और राज्य सरकार में मंत्री रह चुके थे। पिता के असामयिक निधन के बाद नितिन नवीन ने कम उम्र में ही राजनीति में कदम रखा। वर्ष 2006 में उन्होंने पहली बार बिहार विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में औपचारिक प्रवेश किया। इसके बाद वे लगातार जनता का विश्वास जीतते गए।

बांकीपुर से पांच बार विधायक
नितिन नवीन ने बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट को अपनी कर्मभूमि बनाया। वे अब तक पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं—
- 2010
- 2015
- 2020
- 2025
लगातार पांच चुनाव जीतना उनकी मजबूत जनाधार और संगठन क्षमता को दर्शाता है। विधायक रहने के साथ-साथ नितिन नवीन ने बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में भी अहम भूमिकाएं निभाईं। उनके पास—
- सड़क निर्माण
- शहरी विकास एवं आवास
- कानून और न्याय
जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी रही। इन विभागों में उनके कार्यकाल को प्रशासनिक रूप से प्रभावी माना जाता है। 45 वर्ष की उम्र में नितिन नवीन का बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना पार्टी के लिए युवा नेतृत्व और संगठनात्मक मजबूती का संकेत माना जा रहा है। बिहार की जमीन से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने वाला यह सफर नितिन नवीन को देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण चेहरा बनाता है।











