ट्रम्प ने होर्मुज को फिर अमेरिकी क्षेत्र बताया, ईरान का पलटवार; बोला- रवैया बदले अमेरिका, तभी खुलेगा रास्ता

ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर अमेरिकी क्षेत्र बताया है। ईरान ने दावा खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका अपना रवैया बदले और वादे पूरे करे, तभी रास्ता खुलेगा।

ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर अमेरिकी क्षेत्र बताया, जिस पर ईरान ने कड़ा विरोध जताया है। ईरानी सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने कहा कि अमेरिका अपना रवैया बदले और वादे पूरे करे, तभी समुद्री मार्ग खोलने पर विचार होगा।

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र बताने वाले दावे ने अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। ट्रम्प ने एक बार फिर रणनीतिक समुद्री मार्ग को अमेरिकी क्षेत्र के रूप में पेश किया है। इसके जवाब में ईरान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि होर्मुज तब तक नहीं खुलेगा, जब तक अमेरिका अपना रवैया नहीं बदलता।

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने अमेरिका पर बातचीत और कूटनीतिक समझौतों में अपने वादों से पीछे हटने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में ईरान को अमेरिका के साथ बातचीत करने के तरीके पर दोबारा विचार करना होगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज से गुजरने वाला समुद्री व्यापार पहले ही गंभीर दबाव में है।

ट्रम्प ने दोबारा शेयर किया होर्मुज का नक्शा

ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक नक्शा साझा किया, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को न्यू यूएस टेरिटरी यानी नया अमेरिकी क्षेत्र बताया गया। इससे पहले भी उन्होंने अगस्त के मध्य में इस तरह का दावा किया था और कहा था कि अमेरिका भविष्य में इस जलमार्ग को अमेरिकी क्षेत्र घोषित कर सकता है।

ट्रम्प का यह रुख केवल राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे समुद्री मार्ग की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है और यहां किसी भी तरह की लंबे समय तक रुकावट का असर तेल, गैस और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।

ईरान ने अमेरिकी दावे को किया खारिज

ईरान ने साफ किया है कि वह अमेरिका के दावे को स्वीकार नहीं करता। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज को खोलने का फैसला अमेरिका की नीतियों और उसके व्यवहार में बदलाव से जुड़ा है।

मोहसिन रेजाई ने अमेरिका पर बातचीत, कूटनीति और समझौतों के प्रति भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि भविष्य में किसी भी बातचीत से पहले अमेरिका को अपनी जिम्मेदारियां निभानी होंगी और पहले किए गए वादों को पूरा करना होगा।

ईरान की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि केवल सैन्य या आर्थिक दबाव के जरिए तेहरान को अपनी शर्तें बदलने के लिए मजबूर करना आसान नहीं होगा। दोनों देशों के बीच यही मतभेद मौजूदा संकट को लंबा खींच रहे हैं।

होर्मुज स्ट्रेट इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ने वाला संकरा समुद्री मार्ग है। इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान का क्षेत्र है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए इसकी रणनीतिक अहमियत इसलिए बहुत अधिक है क्योंकि फारस की खाड़ी से निकलने वाली बड़ी मात्रा में ऊर्जा आपूर्ति इसी रास्ते से दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंचती है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, 2025 में औसतन करीब 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल और तेल उत्पाद होर्मुज से होकर गुजरे। समुद्री मार्ग से होने वाले वैश्विक तेल व्यापार का लगभग एक चौथाई हिस्सा इस जलमार्ग से गुजरता है। इसलिए यहां लंबे समय तक व्यवधान होने पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है।

भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े एशियाई ऊर्जा आयातक देशों के लिए भी यह मार्ग महत्वपूर्ण है। फारस की खाड़ी के कई तेल और गैस उत्पादक देशों की वैश्विक बाजारों तक पहुंच भी इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर करती है।

क्या होर्मुज किसी एक देश का क्षेत्र है?

ट्रम्प के दावे के बीच होर्मुज की कानूनी और भौगोलिक स्थिति को समझना जरूरी है। यह जलमार्ग अमेरिका का क्षेत्र नहीं है। होर्मुज के दोनों किनारों पर ईरान और ओमान के क्षेत्र हैं और समुद्री आवाजाही का अधिकार अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के व्यापक नियमों से जुड़ा विषय है।

चैथम हाउस के विशेषज्ञों ने भी पहले कहा है कि कोई देश खुद को दूसरे देशों के अधिकारों का संरक्षक घोषित नहीं कर सकता और जलमार्ग पर एकतरफा अधिकार का दावा अंतरराष्ट्रीय कानूनी सवाल खड़े करता है।

इसी वजह से ट्रम्प की ओर से होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र बताने वाली भाषा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। ईरान ने भी इसे वास्तविकता से दूर बताते हुए अमेरिकी दावे की आलोचना की है।

ईरान ने कुछ जहाजों को दी है गुजरने की अनुमति

हालांकि ईरान होर्मुज को बंद रखने की बात कर रहा है, लेकिन समुद्री यातायात पूरी तरह एक जैसा नहीं रहा है। हाल में ईरान ने कुछ इराकी तेल टैंकरों को विशेष अनुमति देकर स्ट्रेट से गुजरने दिया। इससे संकेत मिलता है कि तेहरान कुछ मामलों में नियंत्रित या चयनित आवाजाही की अनुमति दे रहा है।

इस बीच इराक समेत कई देश वैकल्पिक तेल निर्यात मार्गों पर भी काम कर रहे हैं, ताकि होर्मुज पर निर्भरता कम की जा सके। फ्रांस और सऊदी अरब भी क्षेत्रीय व्यापार के लिए वैकल्पिक रास्तों पर चर्चा कर रहे हैं।

रेजाई ने परमाणु हथियारों की होड़ पर जताई चिंता

मोहसिन रेजाई ने अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के व्यापक प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई है। उनका तर्क है कि यदि किसी देश को यह लगता है कि परमाणु क्षमता के बिना उसकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती, तो इससे दूसरे देशों में भी परमाणु हथियार विकसित करने की इच्छा बढ़ सकती है।

ईरान लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताते हुए अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण और परमाणु अप्रसार संधि के ढांचे का हवाला देता रहा है। दूसरी ओर अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने को अपनी प्रमुख सुरक्षा प्राथमिकताओं में शामिल करता रहा है।

ट्रम्प ने भी हालिया बयानों में दोहराया है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे में परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज का मुद्दा दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक विवाद से जुड़ गया है।

ईरानी राष्ट्रपति ने बातचीत का रास्ता खुला रखा

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने दूसरी ओर कहा है कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान दबाव में आकर अपनी स्थिति बदलने के लिए तैयार नहीं है।

पजशकियान का रुख ईरान के भीतर मौजूद उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें सैन्य टकराव से बचने के साथ-साथ राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख बनाए रखने की बात कही जा रही है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच पिछले समझौते और उसके पालन को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर

होर्मुज में लंबे समय तक समुद्री यातायात बाधित रहने से इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। तेल और गैस की कीमतों में तेजी, शिपिंग लागत में वृद्धि और ऊर्जा आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव इसका संभावित परिणाम हो सकता है।

एशिया के बड़े ऊर्जा आयातकों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यदि ऊर्जा आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है, तो परिवहन लागत से लेकर औद्योगिक उत्पादन तक कई क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है।

आगे क्या होगा?

ट्रम्प का होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र बताने वाला रुख और ईरान की ओर से इसे खारिज करना दोनों देशों के बीच तनाव की गंभीरता को दिखाता है। फिलहाल विवाद का समाधान कूटनीतिक बातचीत, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति जैसे कई मुद्दों पर निर्भर करता है।

ईरान होर्मुज को खोलने के लिए अमेरिका के रवैये में बदलाव और अपनी शर्तों को पूरा करने की मांग कर रहा है, जबकि वॉशिंगटन तेहरान पर दबाव बनाए हुए है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बयानों के साथ-साथ समुद्री यातायात और तेल बाजार की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

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