दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास घटाएगा अमेरिका, ट्रंप बोले- किम जोंग उन से अच्छे रिश्ते

अमेरिका दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यासों मे कटौती करेगा। ट्रंप ने किम जोंग उन से अच्छे रिश्तों का हवाला दिया, जबकि सियोल ने तय कार्यक्रम जारी रखने की बात कही

अमेरिका ने दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यासों में कटौती का फैसला किया है। ट्रंप ने किम जोंग उन से अच्छे रिश्तों और बढ़ते खर्च का हवाला दिया। हालांकि, दक्षिण कोरिया ने उल्ची फ्रीडम शील्ड अभ्यास तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित करने की बात कही है।

वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों में कटौती के निर्देश दिए हैं। ट्रंप ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को सैन्य अभ्यासों की संख्या या स्तर कम करने का आदेश दिया है। उनका तर्क है कि ऐसे अभ्यास उत्तर कोरिया को अमेरिका की ओर से गलत और शत्रुतापूर्ण संदेश दे सकते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ उनके अच्छे रिश्ते हैं और सैन्य अभ्यासों पर अमेरिका को बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है।

दक्षिण कोरिया ने तय कार्यक्रम पर दिया जोर

ट्रंप के बयान के बावजूद दक्षिण कोरिया ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित सैन्य अभ्यास तय कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किए जाएंगे। दोनों देशों के बीच लंबे समय से सुरक्षा सहयोग जारी है और संयुक्त सैन्य अभ्यास इस साझेदारी का अहम हिस्सा माने जाते हैं। दक्षिण कोरिया के लिए उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधियों के बीच अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत रखना महत्वपूर्ण है।

अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच होने वाला उल्ची फ्रीडम शील्ड सैन्य अभ्यास इसी सप्ताह शुरू होने वाला है। इस अभ्यास में दक्षिण कोरिया के करीब 18 हजार सैनिकों के शामिल होने की बात कही गई है। अभ्यास के दौरान सैनिक वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में प्रशिक्षण लेते हैं और विभिन्न सैन्य अभियानों की तैयारी करते हैं।

युद्ध जैसी परिस्थितियों में होगी ट्रेनिंग

उल्ची फ्रीडम शील्ड अभ्यास में सैनिकों को कई तरह की परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें गोली चलाने की प्रैक्टिस, पानी वाले इलाकों को पार करना और सैन्य उपकरणों एवं अन्य सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना शामिल है।

अमेरिका और दक्षिण कोरिया का कहना है कि इन सैन्य अभ्यासों का उद्देश्य किसी देश पर हमला करने की तैयारी करना नहीं है। दोनों देशों के अनुसार, अभ्यास का मुख्य मकसद उत्तर कोरिया की ओर से संभावित सैन्य कार्रवाई की स्थिति में बेहतर तालमेल और जवाबी क्षमता विकसित करना है।

संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं को आपात स्थिति में एक साथ काम करने, संचार व्यवस्था मजबूत करने और सैन्य संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल का प्रशिक्षण भी देते हैं। हालांकि, उत्तर कोरिया इन दावों को स्वीकार नहीं करता और इन अभ्यासों को अपने खिलाफ सैन्य कार्रवाई की तैयारी के तौर पर देखता है।

उत्तर कोरिया लंबे समय से करता रहा है विरोध

उत्तर कोरिया अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों का लंबे समय से विरोध करता रहा है। प्योंगयांग का आरोप है कि इस तरह के अभ्यास कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ाते हैं और संभावित सैन्य संघर्ष का खतरा पैदा करते हैं।

शुक्रवार को भी उत्तर कोरिया ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के खिलाफ कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी थी। उत्तर कोरिया का कहना है कि सैन्य अभ्यासों का स्वरूप रक्षात्मक बताने के बावजूद वे वास्तविकता में हमले की तैयारी जैसे दिखाई देते हैं।

दक्षिण कोरिया और अमेरिका इसके विपरीत लगातार कहते रहे हैं कि उनका सैन्य सहयोग रक्षात्मक प्रकृति का है। दोनों देशों का कहना है कि क्षेत्र में बदलते सुरक्षा हालात के बीच संयुक्त अभ्यास उनकी तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

ट्रंप और किम के बीच तीन ऐतिहासिक मुलाकातें

डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच 2018 से 2019 के दौरान तीन बार आमने-सामने मुलाकात हुई थी। दोनों नेताओं की पहली ऐतिहासिक बैठक जून 2018 में सिंगापुर में हुई थी। यह बैठक अमेरिका और उत्तर कोरिया के शीर्ष नेताओं के बीच पहली शिखर वार्ता थी।

इसके बाद फरवरी 2019 में दोनों नेता वियतनाम के हनोई में मिले। इस बैठक में उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन दोनों पक्ष किसी बड़े समझौते तक नहीं पहुंच सके।

जून 2019 में ट्रंप और किम की एक और मुलाकात हुई। इस दौरान ट्रंप उत्तर और दक्षिण कोरिया को अलग करने वाले असैन्यीकृत क्षेत्र तक पहुंचे और किम के साथ बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच हुई बैठकों में उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर चर्चा हुई, लेकिन स्थायी परमाणु समझौता नहीं हो सका।

सैन्य अभ्यास पर ट्रंप का पुराना रुख

दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यासों को कम करने या रोकने का ट्रंप का रुख नया नहीं है। 2018 में किम जोंग उन के साथ पहली शिखर वार्ता के बाद ट्रंप ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों पर सवाल उठाया था। उस समय ट्रंप ने इन अभ्यासों को महंगा बताते हुए इन्हें उत्तर कोरिया के लिए उकसाने वाला भी कहा था। बाद में दोनों देशों ने सैन्य अभ्यासों को अलग-अलग स्तरों और नए स्वरूपों में फिर शुरू किया।

अब एक बार फिर ट्रंप की ओर से सैन्य अभ्यासों में कटौती की बात ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका, दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच सुरक्षा मुद्दे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं। ट्रंप का मानना है कि किम के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों का इस्तेमाल तनाव कम करने के लिए किया जा सकता है।

किम के साथ अच्छे रिश्तों पर ट्रंप का जोर

सैन्य अभ्यास कम करने के निर्देश की वजह बताते हुए ट्रंप ने किम जोंग उन के साथ अपने संबंधों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच अच्छे रिश्ते हैं और ऐसे में अमेरिका तथा दक्षिण कोरिया के बड़े सैन्य अभ्यास उत्तर कोरिया को गलत संदेश दे सकते हैं।

ट्रंप का यह रुख उनके पहले कार्यकाल के दौरान अपनाई गई कूटनीतिक रणनीति से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने किम के साथ सीधे संवाद को प्राथमिकता दी थी और उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत का रास्ता अपनाया था।

हालांकि, दोनों देशों के बीच संबंधों में उस समय कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका था। इसके बावजूद ट्रंप और किम की मुलाकातों ने अमेरिका-उत्तर कोरिया संबंधों को लेकर वैश्विक कूटनीति में नया अध्याय जरूर जोड़ा था।

सैन्य तैयारी और कूटनीति के बीच संतुलन

अमेरिका के लिए दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य सहयोग एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उसकी सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वहीं दक्षिण कोरिया उत्तर कोरिया की सैन्य क्षमताओं को देखते हुए अमेरिकी सुरक्षा सहयोग को अपनी रक्षा व्यवस्था के लिए अहम मानता है।

ऐसे में सैन्य अभ्यासों में कटौती का फैसला केवल सैन्य प्रशिक्षण तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसका असर अमेरिका-दक्षिण कोरिया सुरक्षा संबंधों और उत्तर कोरिया के साथ संभावित कूटनीतिक संवाद पर भी पड़ सकता है।

दूसरी ओर, यदि सैन्य अभ्यासों में कमी आती है तो उत्तर कोरिया इसे तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक संकेत के रूप में देख सकता है। लेकिन दक्षिण कोरिया के लिए यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि सैन्य तैयारियों और क्षेत्रीय सुरक्षा क्षमता पर इसका नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

अमेरिका-उत्तर कोरिया संबंधों पर नजर

ट्रंप के ताजा निर्देश से एक बार फिर अमेरिका की उत्तर कोरिया नीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक तरफ अमेरिका दक्षिण कोरिया के साथ अपने सुरक्षा गठबंधन को बनाए रखना चाहता है, वहीं ट्रंप किम जोंग उन के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को कूटनीतिक अवसर के रूप में देखते हैं।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सैन्य अभ्यासों में कटौती केवल प्रशिक्षण के स्तर में बदलाव तक सीमित रहती है या अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच नए कूटनीतिक संपर्क का रास्ता भी खोलती है। फिलहाल दक्षिण कोरिया का तय कार्यक्रम के अनुसार अभ्यास करने का रुख बताता है कि दोनों सहयोगियों के बीच सैन्य तैयारी को लेकर प्राथमिकताएं बनी हुई हैं।

अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच सैन्य अभ्यास तथा उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा स्थिति के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकती है। ट्रंप के बयान ने एक बार फिर सैन्य दबाव और कूटनीतिक बातचीत के बीच संतुलन को वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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