यूक्रेन के सूमी में भारत से जुड़ी कुसुम ग्रुप की फार्मा इकाई रूसी ड्रोन हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई। एक कर्मचारी की मौत और कई लोगों के घायल होने की सूचना है। कंपनी के अनुसार, नुकसान 400 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।
कीव: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन के सूमी शहर में भारत से जुड़ी फार्मास्युटिकल कंपनी कुसुम ग्रुप (Kusum Group) की उत्पादन इकाई पर रूसी ड्रोन हमला हुआ है। हमले में एक कर्मचारी की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। कंपनी की मुख्य उत्पादन इमारत को भारी नुकसान पहुंचा है और नुकसान का अनुमान 400 करोड़ रुपये से अधिक लगाया गया है।
यह घटना भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुसुम ग्रुप की जड़ें भारत से जुड़ी हैं और कंपनी यूक्रेन में लंबे समय से दवा निर्माण का काम कर रही है। कंपनी के संस्थापक और प्रमुख राजीव गुप्ता भारतीय मूल के कारोबारी हैं। हमले के समय उनके सूमी में मौजूद नहीं होने की जानकारी सामने आई है।
यूक्रेनी अधिकारियों और कंपनी से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, 4 अक्टूबर को सूमी में रूसी ड्रोन हमलों के दौरान फार्मा परिसर को निशाना बनाया गया। हालांकि, हमले के सटीक उद्देश्य को लेकर स्वतंत्र रूप से कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। यूक्रेनी पक्ष ने इसे नागरिक और चिकित्सा आपूर्ति से जुड़े ढांचे पर हमला बताया है।
सूमी में कुसुम ग्रुप की फैक्ट्री पर हमला
सूमी यूक्रेन का एक सीमावर्ती क्षेत्र है और रूस के साथ जारी युद्ध के दौरान यहां नियमित रूप से ड्रोन और मिसाइल हमले होते रहे हैं। 4 अक्टूबर को हुए हमले में कुसुम ग्रुप की दवा निर्माण इकाई को गंभीर नुकसान पहुंचा।
रिपोर्टों के मुताबिक, ड्रोन हमले के बाद फैक्ट्री की मुख्य संरचना का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया। घटनास्थल से धुएं का बड़ा गुबार उठता दिखाई दिया। हमले में एक कर्मचारी की जान चली गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए। यूक्रेनी क्षेत्रीय अधिकारियों ने भी सूमी क्षेत्र में उस दिन रूसी हमलों के कारण एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने की जानकारी दी।
कुसुम ग्रुप ने मृत कर्मचारी के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। कंपनी के अनुसार, मारे गए कर्मचारी येवहेन वोलोदिमिरोविच मिरोशनिचेंको ने 2009 से कंपनी के इंजीनियरिंग विभाग में काम किया था।
राजीव गुप्ता कौन हैं और यूक्रेन में कैसे शुरू हुआ कारोबार?
राजीव गुप्ता भारत के राजस्थान के भरतपुर से जुड़े कारोबारी हैं। कुसुम ग्रुप ने शुरुआत में भारत से दवाओं को यूक्रेन भेजने और वहां उनका वितरण करने के कारोबार से अपनी गतिविधियां शुरू की थीं।
समय के साथ कंपनी ने वितरण से आगे बढ़कर खुद दवा निर्माण शुरू किया। उपलब्ध कंपनी संबंधी जानकारी के अनुसार, भारत में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के बाद 2009 में यूक्रेन के सूमी में विनिर्माण संयंत्र शुरू किया गया।
कंपनी का कारोबार मुख्य रूप से जेनेरिक दवाओं के निर्माण और आपूर्ति से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, कुसुम ग्रुप 50 से अधिक दवा उत्पाद बनाता है और यूक्रेन के अलावा मध्य एशिया तथा अन्य विदेशी बाजारों में भी अपनी दवाएं पहुंचाता है।
भारत में कंपनी की उत्पादन सुविधाएं भिवाड़ी, राजस्थान और पीथमपुर, मध्य प्रदेश में भी हैं। कुसुम ग्रुप ने कहा है कि भारत में मौजूद उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल यूक्रेन में दवाओं की आपूर्ति को जारी रखने के लिए किया जा सकता है।
फैक्ट्री को 400 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान
ड्रोन हमले से कंपनी की सूमी इकाई को भारी आर्थिक क्षति पहुंची है। विभिन्न रिपोर्टों में नुकसान का अनुमान कम से कम 400 करोड़ रुपये यानी करीब 50 मिलियन डॉलर से अधिक बताया गया है।
मुख्य उत्पादन ढांचे के बड़े हिस्से के नष्ट होने से कंपनी के यूक्रेन स्थित विनिर्माण संचालन पर तत्काल असर पड़ा है। यह संयंत्र युद्ध के दौरान भी उत्पादन जारी रखे हुए था, लेकिन ताजा हमले के बाद उसकी सामान्य गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं।
कंपनी ने हालांकि संकेत दिया है कि उसका कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। भारत में मौजूद इकाइयों की मदद से यूक्रेन में आवश्यक दवाओं की आपूर्ति को बनाए रखने की कोशिश की जाएगी।
हमले में एक कर्मचारी की मौत
हमले में एक कर्मचारी की मौत हुई है। शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में मृतक को इंजीनियर बताया गया था, जबकि कंपनी ने बाद में बताया कि वह इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े कर्मचारी थे।
यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, सूमी क्षेत्र में 4 अक्टूबर से 5 अक्टूबर के बीच कई रूसी हमले हुए। क्षेत्रीय प्रशासन ने 24 घंटे की अवधि में दर्जनों हमलों की जानकारी दी और सूमी समुदाय में एक व्यक्ति की मौत तथा कई लोगों के घायल होने की पुष्टि की।
यह घटना उस व्यापक रूसी हवाई अभियान का हिस्सा थी, जिसमें यूक्रेन के कई शहरों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया।
जेलेंस्की ने जताया दुख
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सूमी में फार्मास्युटिकल सुविधा पर हुए हमले का उल्लेख करते हुए मृत व्यक्ति के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
यूक्रेनी पक्ष ने कहा कि सूमी में जिस फार्मास्युटिकल परिसर को नुकसान पहुंचा, वहां आवश्यक दवाओं से जुड़ा उत्पादन और भंडारण होता था। यूक्रेनी अधिकारियों ने हमले को नागरिक बुनियादी ढांचे पर रूसी हमलों की व्यापक श्रृंखला का हिस्सा बताया है।
हालांकि, युद्ध के दौरान किसी हमले के सैन्य उद्देश्य या लक्ष्य की स्वतंत्र पुष्टि अक्सर कठिन होती है। इसलिए हमले के पीछे रूस की वास्तविक परिचालन मंशा पर अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
कुसुम ग्रुप पहले भी हमले का सामना कर चुका है
यह कुसुम ग्रुप की यूक्रेन स्थित गतिविधियों पर पहला हमला नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल 2025 में भी कंपनी के एक गोदाम को ड्रोन हमले में नुकसान पहुंचा था।
ताजा हमला इसलिए अधिक गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इस बार सूमी स्थित मुख्य उत्पादन सुविधा को भारी नुकसान पहुंचा है और एक कर्मचारी की मौत हुई है। इससे यूक्रेन में भारतीय मूल की कंपनियों के लिए युद्ध से जुड़े सुरक्षा जोखिम एक बार फिर सामने आए हैं।
युद्ध के बीच दवा उत्पादन पर असर
कुसुम ग्रुप की सूमी इकाई का महत्व केवल एक कारोबारी संपत्ति के रूप में नहीं है। कंपनी जेनेरिक और आवश्यक दवाओं के निर्माण से जुड़ी है, इसलिए उत्पादन में लंबे समय तक व्यवधान का असर स्थानीय और क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है।
युद्ध के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े बुनियादी ढांचे की सुरक्षा एक संवेदनशील मुद्दा रही है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत नागरिक सुविधाओं और चिकित्सा से जुड़े ढांचे की सुरक्षा महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि, किसी विशिष्ट हमले में अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हुआ या नहीं, यह तय करने के लिए स्वतंत्र तथ्य-जांच और कानूनी मूल्यांकन आवश्यक होता है।
भारत ने यूक्रेन और रूस से बातचीत बढ़ाई
यह घटना ऐसे समय हुई है जब भारत रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान के लिए दोनों पक्षों से संवाद बनाए रखने पर जोर दे रहा है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल में कहा था कि भारत ने संघर्ष के समाधान के लिए अपने कूटनीतिक प्रयास तेज किए हैं और मॉस्को तथा कीव दोनों के साथ बातचीत जारी रखी है।
भारत का आधिकारिक रुख लंबे समय से यह रहा है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए। ऐसे में भारतीय मूल की कंपनी की संपत्ति पर हमला नई दिल्ली के लिए आर्थिक और मानवीय दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
भारतीय कारोबारियों के लिए बढ़ी सुरक्षा चिंता
यूक्रेन में काम कर रही भारतीय कंपनियों और भारतीय मूल के कारोबारियों के लिए ताजा हमला सुरक्षा जोखिम को रेखांकित करता है। युद्ध के दौरान किसी भी क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों का संचालन करना लॉजिस्टिक्स, कर्मचारियों की सुरक्षा, बीमा और आपूर्ति श्रृंखला के लिहाज से चुनौतीपूर्ण है।
कुसुम ग्रुप के मामले में भारत में मौजूद उत्पादन इकाइयां कंपनी को वैकल्पिक आपूर्ति क्षमता उपलब्ध करा सकती हैं। इससे यूक्रेन में क्षतिग्रस्त संयंत्र के बावजूद आवश्यक दवाओं की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता प्रभावित कर्मचारियों की सुरक्षा, नुकसान का आकलन और उत्पादन व्यवस्था को फिर से व्यवस्थित करना है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि सूमी संयंत्र को पूरी तरह दोबारा संचालन में आने में कितना समय लगेगा।












