संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव के लिए दौड़ तेज हो गई है। आठ उम्मीदवारों में पांच महिलाएं हैं। हालिया अनौपचारिक मतदान में गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट सबसे आगे रहीं। अगर किसी महिला का चयन हुआ तो वह UN की पहली महिला महासचिव होंगी।
न्यूयोर्क: संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव के चुनाव की प्रक्रिया अब अहम चरण में पहुंच गई है। 80 साल के इतिहास में पहली बार किसी महिला के इस सर्वोच्च पद पर पहुंचने की संभावना मजबूत दिखाई दे रही है। मौजूदा दौड़ में आठ उम्मीदवार हैं, जिनमें पांच महिलाएं हैं। हालिया अनौपचारिक वोटिंग में गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट सबसे आगे रही हैं।
वर्तमान महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का कार्यकाल दिसंबर 2026 के अंत में समाप्त होना है। संयुक्त राष्ट्र ने नए महासचिव के चयन की प्रक्रिया नवंबर 2025 में औपचारिक रूप से शुरू की थी। इस बार प्रक्रिया में पारदर्शिता और सभी सदस्य देशों की भागीदारी पर भी जोर दिया गया है।
कैरोलिन बिर्केट सबसे आगे, ग्रिन्सपैन भी मजबूत दावेदार
गुयाना की राजनयिक कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट हालिया सुरक्षा परिषद की अनौपचारिक स्ट्रॉ पोल में सबसे आगे रहीं। उन्हें आठ देशों ने समर्थन दिया, जबकि तीन ने विरोध किया और चार ने कोई राय नहीं दी। इससे पहले कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन शुरुआती अनौपचारिक मतदान में मजबूत स्थिति में थीं।
हालांकि, इन स्ट्रॉ पोल के नतीजों को अंतिम चुनाव नहीं माना जा सकता। इनका उद्देश्य सुरक्षा परिषद के सदस्यों के बीच उम्मीदवारों की स्वीकार्यता का अंदाजा लगाना है। आने वाले दौर में समीकरण बदल सकते हैं और किसी उम्मीदवार का समर्थन बढ़ या घट सकता है।
संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक सूची के अनुसार इस समय आठ नाम प्रक्रिया में दर्ज हैं। इनमें इवोन बाकि, रेबेका ग्रिन्सपैन, मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा, राफेल मारियानो ग्रॉसी, कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट, ओलारा ओटुनु और मैकी साल शामिल हैं; आधिकारिक सूची में मिशेल बाचेलेट का नाम भी दर्ज है, हालांकि उनकी उम्मीदवारी को लेकर चिली ने बाद में समर्थन वापस ले लिया था।
महिला महासचिव बनने का ऐतिहासिक मौका
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 1945 में हुई थी, लेकिन आज तक इस संगठन का नेतृत्व किसी महिला ने नहीं किया है। यही वजह है कि 2026 की चयन प्रक्रिया को लैंगिक समानता के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के चयन अभियान में सदस्य देशों से महिला उम्मीदवारों को नामित करने पर विशेष विचार करने का आग्रह किया गया था। कई देशों ने भी महिला महासचिव के पक्ष में समर्थन व्यक्त किया है। हालांकि, कोई औपचारिक नियम ऐसा नहीं है जिसके तहत इस बार महिला उम्मीदवार को ही चुना जाना अनिवार्य हो।
अगर कैरोलिन बिर्केट, रेबेका ग्रिन्सपैन या किसी अन्य महिला उम्मीदवार को अंतिम समर्थन मिल जाता है, तो वह संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में पहली महिला महासचिव होंगी।
UN महासचिव का चुनाव आम चुनाव जैसा नहीं
संयुक्त राष्ट्र महासचिव का चयन सीधे दुनिया के नागरिक नहीं करते। यह एक बहु-स्तरीय राजनीतिक और कूटनीतिक प्रक्रिया है, जिसमें सुरक्षा परिषद और महासभा दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
सबसे पहले सदस्य देश उम्मीदवारों को नामित करते हैं। उम्मीदवारों से उनके विजन, अनुभव और अभियान से जुड़ी वित्तीय जानकारी भी मांगी जाती है। इसके बाद महासभा के अध्यक्ष उम्मीदवारों के साथ सार्वजनिक संवाद आयोजित करते हैं, जहां वे सदस्य देशों और नागरिक समाज के सवालों का जवाब देते हैं।
इसके बाद सुरक्षा परिषद उम्मीदवारों पर विचार करती है और अनौपचारिक स्ट्रॉ पोल आयोजित करती है। इन मतदानों का मकसद यह पता लगाना होता है कि कौन उम्मीदवार सुरक्षा परिषद के भीतर व्यापक स्वीकार्यता हासिल कर सकता है।
पांच स्थायी सदस्यों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य होते हैं। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस पांच स्थायी सदस्य हैं। इन देशों के पास वीटो पावर है।
महासचिव पद के लिए किसी उम्मीदवार को सुरक्षा परिषद में कम से कम नौ सदस्यों का समर्थन चाहिए। लेकिन नौ वोट हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है। पांच स्थायी सदस्यों में से किसी एक का नकारात्मक रुख भी उम्मीदवार की राह रोक सकता है।
यही कारण है कि महासचिव पद की दौड़ में उम्मीदवारों के लिए केवल ज्यादा से ज्यादा देशों का समर्थन जुटाना ही पर्याप्त नहीं होता। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना पड़ता है कि सुरक्षा परिषद के किसी स्थायी सदस्य की ओर से वीटो की स्थिति न बने।
स्ट्रॉ पोल का असली मतलब क्या है?
अनौपचारिक स्ट्रॉ पोल को चुनाव का अंतिम परिणाम नहीं माना जाता। इसमें सुरक्षा परिषद के सदस्य उम्मीदवारों के प्रति अपना रुख बताते हैं। इससे उम्मीदवारों और सदस्य देशों को यह समझने में मदद मिलती है कि किस नाम को कितना समर्थन मिल रहा है।
आमतौर पर उम्मीदवारों के लिए तीन तरह के संकेत होते हैं—समर्थन, विरोध और कोई राय नहीं। इन संकेतों से यह पता चलता है कि कौन उम्मीदवार मजबूत स्थिति में है और किसे आगे की बातचीत में अधिक समर्थन जुटाने की आवश्यकता है।
हालिया मतदान में बिर्केट का आठ समर्थन वाला प्रदर्शन उन्हें मजबूत स्थिति में ले गया है, लेकिन अभी चयन की प्रक्रिया पूरी होने में समय है। संयुक्त राष्ट्र की प्रक्रिया में आगे भी बातचीत और विचार-विमर्श जारी रहना है।

क्षेत्रीय संतुलन भी बन सकता है बड़ा मुद्दा
महासचिव के चुनाव में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का मुद्दा लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र के नियमों में कोई बाध्यकारी क्षेत्रीय रोटेशन व्यवस्था नहीं है, लेकिन सदस्य देश अक्सर इस बात को ध्यान में रखते हैं कि अलग-अलग क्षेत्रों को नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए।
इस बार लैटिन अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र के उम्मीदवारों की मजबूत मौजूदगी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। बिर्केट गुयाना से आती हैं, जबकि ग्रिन्सपैन कोस्टा रिका से हैं। मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा भी लैटिन अमेरिकी क्षेत्र से हैं।
कैरिबियन क्षेत्र से आने वाली बिर्केट का चयन होने पर वह न केवल पहली महिला महासचिव बनेंगी, बल्कि इस क्षेत्र से इस पद तक पहुंचने वाली पहली व्यक्ति भी होंगी।
भारत के शशि थरूर भी रह चुके हैं उम्मीदवार
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की दौड़ में भारत की ओर से शशि थरूर भी शामिल हो चुके हैं। 2006 में भारत ने उन्हें उम्मीदवार बनाया था। उस समय थरूर संयुक्त राष्ट्र में लंबे समय तक काम कर चुके थे और उनके पास अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का व्यापक अनुभव था।
थरूर शुरुआती दौर से ही मजबूत दावेदारों में शामिल रहे, लेकिन अंततः दक्षिण कोरिया के बान की-मून महासचिव चुने गए। यह चुनाव भी सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के समर्थन के महत्व का उदाहरण बना।
बान की-मून के बाद एंतोनियो गुटेरेस 2017 में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बने। संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार गुटेरेस संगठन के दसवें महासचिव हैं।
इस बार फैसला आसान नहीं होगा
अगले महासचिव के सामने दुनिया की कई गंभीर चुनौतियां होंगी। युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव, जलवायु संकट, विकास की असमानता और संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय चुनौतियां संगठन के सामने बड़ी समस्याएं हैं।
इसीलिए सदस्य देश ऐसे उम्मीदवार की तलाश में हैं जो अलग-अलग शक्तियों के बीच संवाद कायम कर सके और संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता को मजबूत कर सके। उम्मीदवारों के बीच सुधार, बहुपक्षवाद और संघर्ष रोकने को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण भी सामने आए हैं।
अंतिम फैसला कब होगा?
अभी किसी उम्मीदवार को विजेता मानना जल्दबाजी होगी। संयुक्त राष्ट्र की प्रक्रिया में आगे सुरक्षा परिषद के भीतर और दौर की बातचीत तथा मतदान हो सकते हैं। जब सुरक्षा परिषद किसी एक नाम पर पर्याप्त सहमति बना लेगी, तो वह महासभा को उस उम्मीदवार की सिफारिश करेगी।
इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा नियुक्ति पर फैसला करेगी। सामान्य तौर पर महासचिव का कार्यकाल पांच साल का होता है और उन्हें दूसरे कार्यकाल के लिए भी नियुक्त किया जा सकता है।
इस बार सबसे बड़ा सवाल केवल यह नहीं है कि एंतोनियो गुटेरेस की जगह कौन लेगा, बल्कि यह भी है कि क्या संयुक्त राष्ट्र को 80 साल में पहली महिला महासचिव मिलेगी। बिर्केट की हालिया बढ़त ने इस संभावना को निश्चित रूप से चर्चा के केंद्र में ला दिया है, लेकिन अंतिम फैसला अभी दूर है।












