फ्लड फ्रीक्वेंसी एनालिसिस-2026 रिपोर्ट में यूपी के 37 जिलों के 439 गांवों को बाढ़ के लिहाज से संवेदनशील बताया गया है। पूर्वांचल के कई जिले हाई रिस्क जोन में हैं, जहां पिछले 17 वर्षों में बार-बार बाढ़ दर्ज की गई।
बाराबंकी: उत्तर प्रदेश में बाढ़ का खतरा लगातार गंभीर होता जा रहा है। फ्लड फ्रीक्वेंसी एनालिसिस-2026 रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 37 जिलों के 439 गांव बार-बार बाढ़ से प्रभावित हो रहे हैं। रिपोर्ट में बलरामपुर, गोरखपुर, बलिया और आजमगढ़ समेत कई पूर्वांचल जिलों को हाई रिस्क जोन में रखा गया है, जहां पिछले 17 वर्षों में कई बार बाढ़ की स्थिति बनी।
बलरामपुर और पूर्वांचल के जिले सबसे ज्यादा संवेदनशील
रिपोर्ट के अनुसार Balrampur के 25 गांव सबसे अधिक प्रभावित पाए गए हैं। तुलसीपुर, हरैया सतघरवा और गैसड़ी ब्लाक के कई गांवों में 17 वर्षों में 16 बार बाढ़ दर्ज की गई। इसके अलावा Azamgarh, Ballia, Gorakhpur, Bahraich और Ayodhya समेत कई पूर्वांचल जिलों को डेंजर जोन में रखा गया है।

गोरखपुर के जंगल कौड़िया, खोराबार और सहजनवां क्षेत्र, जबकि बलिया के बांसडीह और रेवती इलाके लगातार बाढ़ की मार झेल रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि इन इलाकों में बाढ़ की पुनरावृत्ति 15 बार तक हुई है।
नेपाल से छोड़े गए पानी से बढ़ती है समस्या
यूपी में घाघरा, सरयू, राप्ती, शारदा, गंडक और गंगा नदी के किनारे बसे गांव हर साल बाढ़ से प्रभावित हो रहे हैं। नेपाल क्षेत्र में भारी बारिश और वहां से छोड़े जाने वाले पानी के कारण नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है, जिससे हालात तेजी से बिगड़ते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार अगस्त और सितंबर सबसे संवेदनशील महीने हैं। इस दौरान लगातार बारिश और नदियों के उफान से कई गांवों का संपर्क कट जाता है। हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद होती है और बड़ी आबादी प्रभावित होती है।
शहरों में भी बढ़ रहा जलभराव का खतरा
अध्ययन में यह भी सामने आया कि अब बाढ़ और जलभराव का संकट केवल नदी किनारे के गांवों तक सीमित नहीं है। शहरों में खराब ड्रेनेज सिस्टम, नालों पर अतिक्रमण और तालाब खत्म होने की वजह से स्थिति और गंभीर होती जा रही है।
Varanasi, Kanpur, Barabanki और गोरखपुर जैसे शहरों में भारी बारिश के दौरान जलभराव की समस्या तेजी से बढ़ी है। प्रशासन ने संभावित खतरे को देखते हुए कई जिलों में बचाव और राहत कार्यों के लिए पूर्वाभ्यास शुरू कर दिया है।









