अशोक गहलोत का केंद्र सरकार पर हमला, बोले- प्रधानमंत्री पूरे देश का होता है, सिर्फ पार्टी का नहीं

राजस्थान के पूर्व मुख़्यमंत्री अशोक गहलोत ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सभी देशवासियों का होता है, केवल एक पार्टी काम कर रहे है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम बनने के बाद नेता पूरे देश का होता है, लेकिन मोदी केवल अपनी पार्टी के प्रधानमंत्री की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने लोकतंत्र और विपक्ष की भूमिका पर भी चिंता जताई।

जयपुर: Ashok Gehlot ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद कोई नेता केवल अपनी पार्टी का नहीं रहता, बल्कि पूरे देश का प्रतिनिधि बन जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में यह भावना कमजोर होती दिखाई दे रही है और सरकार केवल अपनी राजनीतिक विचारधारा तक सीमित होकर काम कर रही है।

दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए गहलोत ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक सहिष्णुता को मजबूत बनाए रखना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

“प्रधानमंत्री सबका होता है”

अशोक गहलोत ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे पद किसी एक दल तक सीमित नहीं होते। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री बनता है तो वह देश के हर नागरिक का प्रतिनिधि होता है, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा से जुड़ा हो।

गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री का दायित्व केवल अपनी पार्टी के समर्थकों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें विपक्ष और अलग-अलग विचारधाराओं के लोगों के साथ भी समान व्यवहार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राजनीति में संवाद, सहयोग और सम्मान की भावना लोकतंत्र की बुनियाद होती है। यदि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विश्वास खत्म होता है तो लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर पड़ने लगती हैं।

मोदी सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में आलोचना को स्वीकार करने की जगह विरोध की आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार की आलोचना करने वालों को राष्ट्रविरोधी बताने की प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। गहलोत के मुताबिक लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना विपक्ष का संवैधानिक अधिकार और जिम्मेदारी दोनों है।

उन्होंने कहा कि देश में राजनीतिक और सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ रहा है, जिसका असर लोकतांत्रिक वातावरण पर दिखाई दे रहा है।

राहुल गांधी के बयान का समर्थन

Rahul Gandhi के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी लगातार देश के मुद्दों को उठाते रहे हैं और लोगों को आगाह करने का काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि चाहे नोटबंदी का मुद्दा हो, कोविड-19 महामारी का संकट हो या बेरोजगारी और आर्थिक चुनौतियां—राहुल गांधी ने हर बार सरकार को चेतावनी देने और जनता का पक्ष रखने की कोशिश की है।

गहलोत ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राहुल गांधी अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं और उनका उद्देश्य देशहित में सवाल उठाना है।

“देश की एकता सबसे बड़ी प्राथमिकता

अशोक गहलोत ने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता और सामाजिक एकता में है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने देश की एकता और अखंडता के लिए बड़ा योगदान दिया।

उन्होंने कहा कि देश को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी समुदायों और वर्गों को साथ लेकर चलना जरूरी है। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राष्ट्रीय एकता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

रूस के उदाहरण से समझाया राजनीतिक संदेश

गहलोत ने अपने बयान में सोवियत संघ के विघटन का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि कभी अमेरिका के मुकाबले सुपरपावर माने जाने वाले सोवियत संघ के कई हिस्सों में टूट जाने से दुनिया ने यह सीखा कि आंतरिक विभाजन किसी भी देश को कमजोर कर सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधता वाले देश में सामाजिक सौहार्द और संवाद की राजनीति बेहद जरूरी है। यदि समाज में विभाजन बढ़ता है तो उसका असर राष्ट्रीय एकता पर पड़ सकता है।

लोकतंत्र और विपक्ष की भूमिका पर जोर

गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष केवल आलोचना करने के लिए नहीं होता, बल्कि सरकार को जवाबदेह बनाए रखने का काम भी करता है।

उन्होंने कहा कि मजबूत लोकतंत्र वही होता है जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी जिम्मेदारियां ईमानदारी से निभाएं। विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों को देशविरोधी करार देना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए विपक्ष सरकार की नीतियों और कार्यशैली को लेकर लगातार आक्रामक रुख अपना रहा है।

राजीव गांधी की विरासत को किया याद

राजीव गांधी की पुण्यतिथि के मौके पर गहलोत ने उनकी राजनीतिक सोच और आधुनिक भारत के विजन का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि राजीव गांधी उस दौर में भारत को 21वीं सदी के लिए तैयार करने की बात कर रहे थे, जब देश तकनीकी और डिजिटल बदलाव के शुरुआती चरण में था।

गहलोत के अनुसार, राजीव गांधी का सपना था कि भारत आधुनिक तकनीक, शिक्षा और युवा शक्ति के दम पर दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो।

युवाओं को वोटिंग अधिकार देने का फैसला

गहलोत ने कहा कि राजीव गांधी ने युवाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया था। उन्होंने 18 वर्ष की आयु में मतदान का अधिकार देने के फैसले को ऐतिहासिक बताया।

उन्होंने कहा कि उस समय इस फैसले का राजनीतिक विरोध भी हुआ था, लेकिन राजीव गांधी का मानना था कि युवा देश के भविष्य के निर्माता हैं और उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल करना जरूरी है।

आज भारत की युवा आबादी दुनिया में सबसे बड़ी लोकतांत्रिक ताकतों में से एक मानी जाती है और इसका श्रेय उस दूरदर्शी सोच को भी जाता है।

देश की राजनीति में बढ़ती बयानबाजी

हाल के महीनों में भारतीय राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी लगातार बढ़ी है। विपक्ष जहां लोकतांत्रिक संस्थाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि वह विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर काम कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में लोकतंत्र, सामाजिक सौहार्द और राजनीतिक संवाद जैसे मुद्दे भारतीय राजनीति के केंद्र में बने रहेंगे।

राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ सकता है विवाद

अशोक गहलोत का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण और विपक्ष की भूमिका को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक, प्रधानमंत्री की भूमिका, लोकतंत्र में विपक्ष की अहमियत और राष्ट्रीय एकता जैसे विषय आगामी राजनीतिक बहसों में प्रमुख मुद्दे बने रह सकते हैं।

गहलोत के बयान ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में सत्ता और विपक्ष के संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।

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