यूपी के गांव-कस्बों में रात की बिजली कटौती जारी, 2-3 हजार मेगावाट की कमी से संकट बढ़ा

यूपी में 2-3 हजार मेगावाट बिजली की कमी से गांव-कस्बों में रात 3-4 घंटे कटौती हो रही है। गीले कोयले और तकनीकी दिक्कतों से उत्पादन प्रभावित है।

उत्तर प्रदेश में कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने और बिजली घरों में तकनीकी दिक्कतों के कारण 2-3 हजार मेगावाट की कमी बनी है। गांवों और कस्बों में रात के समय 3-4 घंटे बिजली कटौती हो रही है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में फिलहाल रात के समय बिजली कटौती से राहत मिलने की उम्मीद कम है। वर्षा के कारण कोयला गीला होने से तापीय बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। नेपाल में आई बाढ़ से हाइड्रो पावर की उपलब्धता भी घटी है। इन कारणों से प्रदेश में करीब 2-3 हजार मेगावाट बिजली की कमी बनी हुई है, जिसके चलते रात में 3-4 घंटे कटौती हो रही है।

गीले कोयले से घटा तापीय बिजली उत्पादन

उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ने से ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में रात के समय कटौती की जा रही है। वर्षा के कारण कोयला खदान क्षेत्रों में आपूर्ति प्रभावित हुई है। गीले कोयले और तकनीकी समस्याओं के चलते प्रदेश के कई तापीय बिजली घरों में उत्पादन कम हुआ है।

अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने सोमवार को अधिकारियों के साथ बैठक कर बिजली आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि इन दिनों देशभर में बिजली संकट की स्थिति बनी हुई है। भारी वर्षा के कारण कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने से सिंगरौली, रिहंद, खुर्जा, मेजा, लैंको, रोजा और बारा तापीय बिजली घरों से उत्पादन घटा है।

इसके अलावा तकनीकी कारणों से अनपरा, हरदुआगंज, जवाहपुर और ओबरा की कुछ यूनिटों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। इन परिस्थितियों के कारण प्रदेश में करीब 2 से 3 हजार मेगावाट बिजली की कमी बनी हुई है।

दिन में सोलर पावर से मिल रही राहत

प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग करीब 30 हजार मेगावाट है, जबकि उपलब्धता लगभग 27 हजार मेगावाट ही है। दिन के समय सोलर पावर की उपलब्धता के कारण मांग के अनुसार बिजली आपूर्ति करने में अपेक्षाकृत आसानी हो रही है। लेकिन रात में सौर ऊर्जा उपलब्ध नहीं होने के कारण संकट बढ़ जाता है।

इसका सबसे ज्यादा असर गांवों और कस्बों में देखने को मिल रहा है। इन क्षेत्रों में रात के समय करीब 3 से 4 घंटे बिजली कटौती की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक बंद पड़ी अन्य यूनिटों से जल्द उत्पादन शुरू कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। डॉ. गोयल ने उम्मीद जताई है कि करीब एक सप्ताह में बिजली आपूर्ति की स्थिति सामान्य हो सकती है।

इस बीच अनपरा से लैंको और बारा को कोयले की आपूर्ति में सुधार किया गया है। इसके परिणामस्वरूप रात में करीब 700 मेगावाट बिजली उत्पादन बढ़ाया गया है। केंद्रीय कोयला मंत्रालय से भी पर्याप्त कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।

गांवों में तय शेड्यूल के अनुसार नहीं मिल रही बिजली

रात में जिन क्षेत्रों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है, वहां दिन के समय अतिरिक्त बिजली देकर इसकी भरपाई करने के निर्देश दिए गए हैं। मौजूदा शेड्यूल के अनुसार गांवों में 18 घंटे, बुंदेलखंड में 20 घंटे और नगर पंचायत एवं तहसील क्षेत्रों में 21.30 घंटे बिजली आपूर्ति का प्रावधान है।

वहीं जिला मुख्यालय, बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को बिजली कटौती से मुक्त रखा गया है। ग्रामीण और कस्बाई उपभोक्ताओं को इसलिए रात की कटौती का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उस समय अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है।

Power Exchange से भी पर्याप्त बिजली नहीं

बिजली की कमी पूरी करने के लिए राज्य आम तौर पर इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से बिजली खरीदता रहा है। लेकिन 1 सितंबर से औसतन 16 घंटे तक अधिकतम 10 रुपये प्रति यूनिट की दर पर भी पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है। रात के समय स्थिति और ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

जानकारों के अनुसार, पहले नेपाल से इंडियन एनर्जी एक्सचेंज को करीब 1,500 मेगावाट हाइड्रो पावर उपलब्ध हो जाती थी। लेकिन मौजूदा स्थिति में नेपाल को भारत की ओर से करीब 700 मेगावाट बिजली दी जा रही है। इससे रात के समय बिजली की उपलब्धता पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।

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