उत्तर प्रदेश में लगातार कई दिनों से हो रही बारिश के बाद अब बारिश और बाढ़ का असर कई जिलों में गंभीर दिखाई दे रहा है। प्रदेश की कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी पहुंच गया है। गांवों में जलभराव और बाढ़ की स्थिति के कारण बड़ी संख्या में परिवारों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है। कुशीनगर में करीब 600 परिवारों के घर छोड़कर तटबंध पर शरण लेने की जानकारी सामने आई है। वहीं कई जिलों में सड़कें और छोटे पुल पानी में डूब गए हैं। लगातार बारिश से मकानों और पुरानी इमारतों पर भी खतरा बढ़ गया है। इसी बीच 70 साल पुरानी एक कोठी के महज करीब तीन सेकंड में ढहने का वीडियो सामने आया है।
उत्तर प्रदेश में 25 और 26 सितंबर को हुई भारी बारिश ने व्यापक नुकसान पहुंचाया है। राहत आयुक्त कार्यालय की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, 25 सितंबर की सुबह से 27 सितंबर की सुबह तक 48 घंटे में प्रदेश में 97.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 4.5 मिलीमीटर बताया गया है। इसी अवधि में बारिश से जुड़ी घटनाओं में 56 लोगों की मौत और 46 लोगों के घायल होने की जानकारी अधिकारियों ने दी है। एक हजार से ज्यादा मकानों को नुकसान पहुंचने की भी रिपोर्ट है।
कुशीनगर में नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद गंडक यानी नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ा है। नदी के बढ़ते पानी का असर आसपास के दियारा और निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। दो गांवों के करीब 1,400 परिवार बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। इनमें से करीब 600 परिवारों को अपने घर छोड़कर तटबंध पर शरण लेने की स्थिति बनी है। घरों में पानी पहुंचने और लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच लोग अपने जरूरी सामान को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं।
बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित जगह पर रहने के साथ-साथ भोजन, पीने के पानी, दवाइयों और रोजमर्रा की जरूरी चीजों की व्यवस्था की है। जिन परिवारों ने घर छोड़े हैं, उन्हें अस्थायी तौर पर तटबंधों या ऊंचे स्थानों पर रहना पड़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए ऐसी परिस्थितियां और मुश्किल हो जाती हैं। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है, लेकिन कई इलाकों में पानी और आवागमन की समस्या बनी हुई है।
गोंडा और बदायूं में भी कई छोटे पुलों के ऊपर से पानी बहने की स्थिति सामने आई है। कुछ स्थानों पर लोग पानी के बीच से पुल पार करते नजर आए। रिपोर्ट के मुताबिक कई जगह पुलों पर दो से तीन फीट तक पानी पहुंच गया है। ऐसी स्थिति में आवागमन जोखिम भरा हो गया है। नदी और नालों का पानी बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क मार्ग भी प्रभावित हुए हैं।
सीतापुर में सरायन और पिरई नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार दोनों नदियों का जलस्तर करीब 30 सेंटीमीटर ऊपर बताया गया। बाढ़ और जलभराव की आशंका को देखते हुए कई परिवार अपने जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं। कुछ जगह ट्रैक्टर और जेसीबी की मदद से सामान निकालने की कोशिश की जा रही है।
उन्नाव में भी जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। कई इलाकों में लोग मकानों और दुकानों की छतों पर रहने को मजबूर हुए हैं। लगातार बारिश के कारण जमीन पर पानी जमा है और सामान्य आवाजाही प्रभावित हुई है। जिन इलाकों में जलनिकासी की व्यवस्था कमजोर है, वहां बारिश रुकने के बाद भी पानी निकलने में समय लग रहा है।
बारिश और जलभराव के बीच प्रदेश के कई हिस्सों से मकान, दीवार और पेड़ गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं। इसी बीच करीब 70 साल पुरानी एक कोठी के केवल तीन सेकंड में भरभराकर गिरने की घटना चर्चा में है। लगातार बारिश के बाद पुरानी और कमजोर इमारतों पर खतरा बढ़ जाता है। ऐसे भवनों में पानी के कारण नींव और दीवारों की मजबूती प्रभावित होने की आशंका रहती है।
बाराबंकी में करीब 150 साल पुरानी एक मस्जिद के सरयू नदी में बह जाने की जानकारी भी रिपोर्ट में सामने आई है। बताया गया कि यह ढांचा काफी समय से नदी के बढ़ते पानी और कटान के प्रभाव में था। लगातार बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण आसपास के क्षेत्रों में भी लोगों की चिंता बढ़ी हुई है।
उन्नाव में गंगा एक्सप्रेस-वे पर भी बारिश के पानी का असर दिखाई दिया। जलभराव के बाद पंप लगाकर पानी बाहर निकालने की जरूरत पड़ी। बड़े मार्गों पर जलनिकासी प्रभावित होने से यातायात व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के सामने सड़क और एक्सप्रेस-वे से पानी निकालने की चुनौती बनी हुई है।
लखनऊ में भी बारिश का असर कई स्थानों पर देखने को मिला। राष्ट्र प्रेरणा स्थल परिसर में जलभराव की स्थिति सामने आई। वहीं हरदोई में एडीएम की गाड़ी के कीचड़ में फंसने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। इन घटनाओं से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बारिश ने केवल ग्रामीण इलाकों को ही नहीं, बल्कि शहरों और प्रशासनिक क्षेत्रों को भी प्रभावित किया है।
लगातार बारिश के बाद सोमवार को लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी समेत प्रदेश के कई शहरों में मौसम कुछ समय के लिए साफ हुआ और लोगों को लंबे अंतराल के बाद धूप देखने को मिली। हालांकि कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश का दौर जारी रहा। बारिश रुकने के बावजूद नदियों के बढ़े जलस्तर और जलभराव के कारण तत्काल राहत नहीं मिली है।
मौसम विभाग के अनुसार 28 सितंबर को भी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की संभावना बनी हुई है। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार 11 जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि 36 जिलों में गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। कुछ इलाकों में 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक तेज हवा के झोंके चलने की संभावना भी बताई गई है।
जिन क्षेत्रों में भारी बारिश का अलर्ट बताया गया है, उनमें रामपुर, बरेली, बहराइच, बिजनौर, मुरादाबाद, लखीमपुर खीरी, अमरोहा, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं तथा आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए निचले इलाकों और जलभराव वाले स्थानों पर रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
बारिश और बाढ़ के कारण कई जिलों में स्कूलों को भी बंद रखने का फैसला लिया गया है। 28 सितंबर को लखीमपुर खीरी, रामपुर, पीलीभीत और मुरादाबाद में कक्षा 12 तक के स्कूल-कॉलेज बंद रखने के आदेश की जानकारी सामने आई है। बरेली में स्कूलों के साथ डिग्री कॉलेज बंद रखने का आदेश भी बताया गया है। प्रशासन ने यह निर्णय बच्चों की सुरक्षा और जलभराव की स्थिति को देखते हुए लिया है।
गोंडा, बदायूं और जौनपुर में भी स्कूल बंद किए जाने की जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में दी गई है। अलग-अलग जिलों में अवकाश का दायरा स्थानीय परिस्थितियों और जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए संबंधित जिले के प्रशासनिक आदेश को प्राथमिक मानना जरूरी है।
बारिश के कारण प्रदेश में मौतों का आंकड़ा भी बढ़ा है। 25 से 27 सितंबर की सुबह तक 48 घंटे की अवधि में 56 लोगों की मौत और 46 लोगों के घायल होने की आधिकारिक स्थिति रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में कई जिलों के नाम सामने आए हैं। सीतापुर में सात मौतें रिपोर्ट की गईं। अवध क्षेत्र में 11 मौतें हुईं, जबकि कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में पांच और गोरखपुर तथा मुरादाबाद में चार-चार मौतों की जानकारी दी गई है।
बारिश से जुड़ी घटनाओं में मकान और दीवार गिरने, पेड़ गिरने, पानी में डूबने और अन्य हादसों की जानकारी सामने आई है। बलरामपुर में मकान गिरने से महिला की मौत की रिपोर्ट है। बाराबंकी में दीवार और पेड़ गिरने से मौतें हुईं। गोंडा में पेड़ गिरने से नवजात की जान जाने की जानकारी सामने आई है। बहराइच में भी पेड़ गिरने से मौत की खबर है।
बाढ़ का असर पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में पहले से बना हुआ है। इससे पहले भी गंगा, सरयू, घाघरा और शारदा जैसी नदियों के खतरे के निशान के ऊपर बहने की रिपोर्ट सामने आई थी। फर्रुखाबाद में गंगा की बाढ़ से बड़ी आबादी प्रभावित हुई थी और कई विद्यालय बंद किए गए थे। सीतापुर, बहराइच, बाराबंकी और गोंडा के निचले क्षेत्रों में भी नदी और बैराज के पानी का असर देखा गया था।
नदी के बढ़ते जलस्तर के साथ कटान की समस्या भी गंभीर हो जाती है। कई जगह खेतों और संपर्क मार्गों के किनारे कटाव शुरू होने से ग्रामीणों में चिंता रहती है। बाढ़ का पानी घटने के बाद भी कटान और कमजोर जमीन के कारण मकानों तथा सड़कों को खतरा बना रह सकता है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की निगरानी केवल पानी रहने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पानी घटने के बाद भी सुरक्षा जांच की जरूरत होती है।
बारिश के कारण स्कूल बंद करने का फैसला भी इसी सुरक्षा चिंता से जुड़ा है। जलभराव वाले रास्तों से बच्चों का स्कूल पहुंचना मुश्किल हो सकता है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें और छोटे पुल पानी में डूब जाते हैं। ऐसे में स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए जोखिम बढ़ जाता है। जिलों में स्थानीय प्रशासन परिस्थितियों के अनुसार छुट्टी का निर्णय ले रहा है।
प्रदेश के कई हिस्सों में लगातार बारिश के कारण घरों की छतों और दीवारों पर भी असर पड़ा है। पुराने मकानों में पानी रिसने और नींव कमजोर होने की आशंका रहती है। 70 साल पुरानी कोठी के अचानक गिरने की घटना के बाद पुराने भवनों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे भवनों में रहने वाले लोगों के लिए स्थानीय प्रशासन की ओर से समय रहते सुरक्षा आकलन करना महत्वपूर्ण हो सकता है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों को सुरक्षित रखना है। जिन परिवारों के घरों में पानी पहुंच गया है, उन्हें ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने, भोजन-पानी उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत होती है। कुशीनगर में करीब 600 परिवारों के तटबंध पर पहुंचने की जानकारी इसी स्थिति को दर्शाती है।
लगातार बारिश के कारण ग्रामीण इलाकों में खेती पर भी असर पड़ सकता है। खेतों में पानी जमा होने से फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ता है। जिन क्षेत्रों में नदी का पानी खेतों तक पहुंच गया है, वहां पानी लंबे समय तक जमा रहने पर फसल प्रभावित हो सकती है। फिलहाल कई इलाकों में फसल नुकसान का आकलन जारी है। राहत आयुक्त कार्यालय की स्थिति रिपोर्ट में भी बारिश से फसलों पर हुए नुकसान का आकलन जारी होने की जानकारी दी गई है।
शहरों में जलभराव की समस्या अलग तरह की चुनौती पैदा करती है। सड़कें पानी में डूबने से वाहन चलाना मुश्किल हो जाता है और कई जगह ट्रैफिक की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। नालों की क्षमता से अधिक पानी आने पर जलनिकासी में समय लगता है। बारिश रुकने के बाद भी निचले इलाकों में पानी जमा रह सकता है।
फिलहाल मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अगले चरण की बारिश को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। 28 सितंबर को भारी बारिश के साथ बिजली गिरने और तेज हवा की संभावना वाले जिलों की सूची जारी की गई है। ऐसे में खुले स्थानों, पेड़ों के नीचे और कमजोर इमारतों के आसपास जाने से बचना जरूरी है।
यूपी में पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश ने एक साथ कई तरह की चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। कहीं नदी का पानी गांवों में पहुंच रहा है, कहीं पुलों के ऊपर पानी बह रहा है, तो कहीं पुराने मकान और दीवारें गिर रही हैं। कई जिलों में स्कूल बंद किए गए हैं और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। कुशीनगर में 600 परिवारों का तटबंध पर पहुंचना और 70 साल पुरानी कोठी का कुछ ही सेकंड में ढहना इस बारिश के व्यापक असर की तस्वीर सामने रखता है।
आने वाले दिनों में स्थिति काफी हद तक नदी के जलस्तर, बैराजों से पानी छोड़े जाने और बारिश की तीव्रता पर निर्भर करेगी। जिन इलाकों में नदियां पहले से खतरे के निशान के ऊपर हैं, वहां अतिरिक्त बारिश से स्थिति और बिगड़ सकती है। वहीं जिन क्षेत्रों में बारिश थम गई है, वहां भी जलभराव और कटान का असर तुरंत खत्म नहीं होगा।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित रखना, आवागमन वाले मार्गों पर खतरे की निगरानी करना और बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाना है। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच लोगों से सावधानी बरतने की अपील की जा रही है। उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर कमजोर पड़ने के बावजूद बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है।










