नेपाल में फिर बाढ़ और भूस्खलन से तबाही, 21 लोगों की मौत; हाईवे बंद, 10 पर्वतारोही लापता

नेपाल में लगातार बारिश के बीच बाढ़ और भूस्खलन से कम से कम 21 लोगों की मौत हुई है। कई घर-पुल बह गए और हाईवे बंद हैं। बुटवल मे 1,000 से ज्यादा लोगो को निकाला गया

नेपाल में लगातार बारिश के बीच बाढ़ और भूस्खलन से कम से कम 21 लोगों की मौत हुई है। कई घर-पुल बह गए और हाईवे बंद हैं। बुटवल में 1,000 से ज्यादा लोगों को निकाला गया। मनांग में हिमस्खलन के बाद 10 लोग लापता हैं।

काठमांडू: नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच बाढ़, भूस्खलन और हिमस्खलन ने कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित कर दिया है। अब तक कम से कम 21 लोगों की मौत की खबर है। बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई घर और पुल बह गए हैं, जबकि कई प्रमुख मार्गों पर आवाजाही बाधित हुई है। बुटवल में बाढ़ प्रभावित इलाकों से 1,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

इस बीच, मनांग जिले में 7,126 मीटर ऊंचे हिमलुंग हिमाल पर हिमस्खलन के बाद पर्वतारोहियों और उनके सपोर्ट स्टाफ समेत 10 लोगों के लापता होने की सूचना है। अधिकारी राहत, बचाव और स्थिति की निगरानी में जुटे हैं।

बागलुंग में घर मलबे में दबा, महिला और तीन बेटों की मौत

लगातार बारिश के कारण नेपाल के कई जिलों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति गंभीर हो गई है। बागलुंग जिले में भूस्खलन की चपेट में आने से एक घर मलबे में दब गया। इस हादसे में एक महिला और उसके तीन बेटों की मौत हो गई।

पाल्पा जिले में भी बाढ़ और भूस्खलन से दो लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। अलग-अलग इलाकों में लगातार बारिश के कारण जमीन खिसकने और नदियों का जलस्तर बढ़ने से लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है।

प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। कई प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटी हैं।

नारायणी नदी खतरे के निशान से 2 मीटर ऊपर

लगातार बारिश के कारण नेपाल की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। देवघाट में नारायणी नदी रविवार सुबह 7:45 बजे 11 मीटर के स्तर पर बह रही थी। यह खतरे के निशान से करीब 2 मीटर ऊपर है।

अधिकारियों ने नदी का जलस्तर और बढ़ने की आशंका जताई थी। नदी के आसपास और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा गया है।

बुटवल में बाढ़ के खतरे को देखते हुए करीब 200 परिवारों को उनके घरों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। वहीं, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 1,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

कई निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों पर पानी आने और भूस्खलन के कारण कई स्थानों पर यातायात भी प्रभावित हुआ है।

कई घर और पुल बहे, हाईवे पर आवाजाही प्रभावित

बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल के कई हिस्सों में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। कई घर और पुल पानी के तेज बहाव में बह गए हैं। भूस्खलन के कारण कई जगह हाईवे और प्रमुख सड़क मार्ग बंद हो गए हैं।

सड़क संपर्क प्रभावित होने से प्रभावित क्षेत्रों तक राहत और बचाव दलों की पहुंच भी चुनौतीपूर्ण हो रही है। प्रशासन की ओर से बंद मार्गों को बहाल करने और प्रभावित लोगों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

भारी बारिश के कारण कई इलाकों में बिजली और संचार व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। स्थानीय स्तर पर नुकसान का आकलन जारी है।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में बिजली उत्पादन बंद

बाढ़ और लगातार बारिश का असर नेपाल के बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा कारणों से बिजली उत्पादन रोकना पड़ा है।

प्रभावित परियोजनाओं में 140 मेगावाट का कालीगंडकी, 25 मेगावाट का अपर मादी, 44 मेगावाट का सुपर मादी, 20 मेगावाट का नामार्जुन मादी और 40 मेगावाट का सेती रिवर प्रोजेक्ट शामिल हैं।

बाढ़ के कारण बिजली ट्रांसमिशन से जुड़ा बुनियादी ढांचा भी प्रभावित हुआ है। 220 किलोवोल्ट की कालीगंडकी कॉरिडोर ट्रांसमिशन लाइन के दो टावर गिर गए हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों को नुकसान पहुंचा है।

इससे प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को लेकर भी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। संबंधित एजेंसियां नुकसान का आकलन कर रही हैं।

खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान

बाढ़ का असर नेपाल के कृषि क्षेत्रों पर भी पड़ा है। कई निचले इलाकों में खेतों में पानी भर गया है, जिससे फसलों को नुकसान हुआ है।

लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण कृषि भूमि के जलमग्न होने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बाढ़ के साथ-साथ भूस्खलन भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

मनांग में हिमस्खलन, 10 लोग लापता

बाढ़ और भूस्खलन के बीच नेपाल के मनांग जिले से हिमस्खलन की गंभीर घटना सामने आई है। नार-फू क्षेत्र में स्थित 7,126 मीटर ऊंचे हिमलुंग हिमाल पर हिमस्खलन हुआ।

इसके बाद पर्वतारोहियों और सपोर्ट स्टाफ समेत 10 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।

एक्सपीडिशन ऑपरेटर्स एसोसिएशन नेपाल के महासचिव ऋषि भंडारी ने रविवार को घटना की पुष्टि की। उनके मुताबिक, लापता लोगों में 2 लोग इमेजिन नेपाल प्राइवेट लिमिटेड और 8 लोग हिमालयन हॉलीडेज नेपाल से जुड़े हैं।

हिमलुंग हिमाल नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में स्थित प्रमुख पर्वतों में शामिल है और यहां पर्वतारोहण अभियानों के दौरान मौसम और ऊंचाई से जुड़ी चुनौतियां बनी रहती हैं।

पर्यटन विभाग ने निगरानी बढ़ाई

नेपाल के पर्यटन विभाग के महानिदेशक रामकृष्ण लामिछाने ने बताया कि विभाग घटना की स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है।

उन्होंने कहा कि अधिकारी घटना से संबंधित अधिक जानकारी जुटा रहे हैं। साथ ही लापता लोगों का पता लगाने और बचाव प्रयासों से जुड़ी जानकारी भी ली जा रही है।

हिमस्खलन वाले क्षेत्र में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां राहत एवं बचाव अभियान को चुनौतीपूर्ण बना सकती हैं। अधिकारियों की ओर से लापता लोगों की स्थिति और आगे की कार्रवाई से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।

एक महीने पहले भी आई थी बड़ी बाढ़

नेपाल में मौजूदा प्राकृतिक आपदा ऐसे समय आई है, जब देश पहले ही एक बड़ी बाढ़ की त्रासदी का सामना कर चुका है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ में 1,453 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5,500 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए गए हैं।

इस पिछली आपदा के बाद भी कई इलाकों में राहत और पुनर्वास से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई थीं। ऐसे में लगातार बारिश और नई बाढ़-भूस्खलन की घटनाओं ने प्रभावित क्षेत्रों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है।

राहत और बचाव अभियान जारी

नेपाल के कई हिस्सों में प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय स्तर की टीमें प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटी हैं। बाढ़ के खतरे वाले इलाकों में लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

फिलहाल प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने, लापता लोगों की तलाश, सड़क और बिजली जैसी जरूरी सेवाओं को बहाल करने तथा संभावित नए नुकसान को रोकने की है।

लगातार बारिश के कारण स्थिति तेजी से बदल सकती है। इसलिए नदियों के जलस्तर, भूस्खलन प्रभावित इलाकों और पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम की निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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