अमेरिका चीन से आयात होने वाले सामान पर एक और 7.5 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन की अतिरिक्त विनिर्माण क्षमता को लेकर चल रही जांच के आधार पर यह शुल्क लगाया जा सकता है।
US China Tariff: अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव एक बार फिर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन चीन से आयात होने वाले सामान पर करीब 7.5 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने के विकल्प पर विचार कर रहा है। यह फैसला अगले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संभावित बैठक से पहले सामने आ सकता है।
अगर नया शुल्क लागू होता है तो चीन से आने वाले उत्पादों पर ट्रंप प्रशासन के मौजूदा टैरिफ का प्रभावी बोझ बढ़कर करीब 20 फीसदी तक पहुंच सकता है। हालांकि, अंतिम दर और इसे लागू करने का तरीका अभी तय नहीं हुआ है। व्हाइट हाउस ने भी इस संबंध में सामने आई रिपोर्टों को आधिकारिक घोषणा नहीं माना है।
चीन पर क्यों बढ़ सकता है टैरिफ?
अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और दोनों के बीच लंबे समय से व्यापार, तकनीक, औद्योगिक उत्पादन और बाजार पहुंच को लेकर मतभेद रहे हैं। ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति में घरेलू उद्योगों को संरक्षण देने और विदेशी आयात पर शुल्क बढ़ाने पर जोर रहा है। प्रस्तावित नया टैरिफ इसी संरक्षणवादी नीति की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है।
खास बात यह है कि यह शुल्क चीन पर पहले से लागू उन टैरिफ के अतिरिक्त हो सकता है, जिन्हें ट्रंप के पहले कार्यकाल में लगाया गया था और बाद में बाइडेन प्रशासन के दौरान भी जारी रखा गया।
7.5 फीसदी कैसे लागू होगा?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन चीन के लिए एक ऊंची टैरिफ दर घोषित करने और उसके कुछ हिस्से को अस्थायी रूप से निलंबित करके प्रभावी दर 7.5 फीसदी रखने के विकल्प पर विचार कर रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किन शुल्कों को निलंबित किया जाएगा और यह व्यवस्था कितने समय तक लागू रहेगी। इसलिए अंतिम टैरिफ दर और उससे प्रभावित होने वाले उत्पादों की जानकारी आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
चीन की क्या है प्रतिक्रिया?

बीजिंग पहले ही संकेत दे चुका है कि अमेरिका के साथ मौजूदा व्यापार समझौते के तहत लागू टैरिफ व्यवस्था को लेकर उसका रुख स्पष्ट है। चीन और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों में किसी भी नए शुल्क को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत और जवाबी कार्रवाई की संभावना बनी रहती है। यदि चीन प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ के जवाब में अपने यहां अमेरिकी उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाता है, तो इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक तनाव फिर तेज हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बढ़ते टैरिफ से कंपनियों की लागत, सप्लाई चेन और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है।
क्या फिर शुरू हो सकता है ट्रेड वॉर?
अमेरिका और चीन के बीच पहले भी बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाए जा चुके हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार विवाद के दौरान अरबों डॉलर के सामान पर शुल्क बढ़ाया गया था, जिसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी पड़ा। अब अगर वॉशिंगटन नया शुल्क लागू करता है और बीजिंग जवाबी कदम उठाता है, तो दुनिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच नए ट्रेड वॉर की आशंका बढ़ सकती है। इसका असर इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल और अन्य क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, अमेरिका और चीन मौजूदा व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर भी विचार कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच हुआ एक साल का समझौता 10 नवंबर को समाप्त होने वाला है। ऐसे में संभावित टैरिफ और व्यापार वार्ता दोनों समानांतर रूप से महत्वपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी प्रशासन ने मार्च में चीन समेत कई प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ अतिरिक्त उत्पादन क्षमता से जुड़े मुद्दों को लेकर 1974 के Trade Act की Section 301 के तहत जांच शुरू की थी। इस जांच का संभावित असर भविष्य की अमेरिकी व्यापार नीति पर पड़ सकता है।
ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात पर नजर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 24 सितंबर को वाशिंगटन में मुलाकात होने की संभावना जताई जा रही है। इस बैठक से पहले टैरिफ का मुद्दा दोनों देशों के बीच बातचीत में अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि टैरिफ से संबंधित कोई भी आधिकारिक फैसला प्रशासन की ओर से सीधे घोषित किया जाएगा। इसलिए फिलहाल प्रस्तावित 7.5 फीसदी शुल्क को संभावित नीति के रूप में देखा जा रहा है, अंतिम फैसला नहीं।









