उत्तर प्रदेश सरकार की बड़ी पहल, बटेश्वर धाम को मिलेगा वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नया स्थान

उत्तर प्रदेश सरकार ने बटेश्वर धाम को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में बड़ी पहल की है। इस कदम से धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन को नई

उत्तर प्रदेश की Bharatiya Janata Party सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। 

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहरों को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी परियोजना पर तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पैतृक भूमि आगरा स्थित बटेश्वर धाम को विश्वस्तरीय आध्यात्मिक और विरासत पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के नए अवसर भी पैदा करेगी।

71.50 करोड़ रुपये की परियोजना से होगा व्यापक विकास

भारत सरकार की SASCI (Scheme for Special Assistance to States for Capital Investment) योजना के तहत इस परियोजना पर कुल 71.50 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। अब तक इसमें से 56.11 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। पर्यटन विभाग के अनुसार, इस परियोजना का लक्ष्य बटेश्वर धाम को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है। इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा बटेश्वर धाम परिसर

श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बटेश्वर धाम परिसर में आधुनिक आधारभूत ढांचा विकसित किया जा रहा है। इसमें शामिल हैं—

  • विशाल पार्किंग सुविधा
  • स्वच्छ और आधुनिक सार्वजनिक शौचालय
  • पुरुष और महिलाओं के लिए लगभग 20 कमरों की डॉरमेट्री सुविधा
  • आधुनिक कैफेटेरिया और फूड कियोस्क
  • सोवेनियर शॉप और गिफ्ट स्टोर्स
  • बच्चों के लिए विशेष मनोरंजन जोन
  • ओपन सीटिंग एरिया और विज़िटर सपोर्ट सेंटर

इन सुविधाओं का उद्देश्य देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को एक सहज और समृद्ध अनुभव प्रदान करना है।

डिजिटल गैलरी और सांस्कृतिक अनुभव का अनूठा संगम

बटेश्वर धाम को केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और शैक्षणिक अनुभव केंद्र के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। परियोजना के तहत दो प्रमुख डिजिटल म्यूजियम गैलरी तैयार की जा रही हैं—

  • गैलरी 1: इसमें चारों वेदों और शिव पुराण की कथाओं को आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।
  • गैलरी 2: यहां ‘चार धाम यात्रा’ और ‘समुद्र मंथन’ जैसे पौराणिक प्रसंगों को इंटरैक्टिव अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

इसके अलावा शिव सहस्रनाम खंड में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों और उनकी महिमा को आधुनिक इंस्टॉलेशन के जरिए दर्शाया जाएगा।

ध्यान पथ और शिव प्रांगण बनेंगे प्रमुख आकर्षण

परियोजना का सबसे प्रमुख आकर्षण इसका केंद्रीय लैंडस्केप क्षेत्र होगा, जिसे एक अनुभवात्मक आध्यात्मिक स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां एक विशाल वटवृक्ष के पास ध्यानमग्न भगवान शिव की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके चारों ओर ‘ध्यान पथ’ और ‘शिव प्रांगण’ विकसित किया जाएगा, जहां श्रद्धालु शांति और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।

परियोजना के तहत एक विशेष ‘पंचभूत शिव स्कल्पचर गार्डन’ विकसित किया जा रहा है, जो पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—इन पांच तत्वों को समर्पित होगा। इसके साथ ही—

  • 12 ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियों वाला शिवलिंगम पार्क
  • यमुना नदी और भगवान शिव के संबंध को दर्शाने वाला ‘कालिंदी वनम’
  • भगवान नंदी की भव्य प्रतिमा

जैसे आकर्षण भी परिसर का हिस्सा होंगे। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य तेजी से विरासत और आध्यात्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बन रहा है।

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