उत्तराखंड में जल जीवन मिशन से बदली तस्वीर, 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पहुंचा नल का पानी

उत्तराखंड में जल जीवन मिशन के तहत 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल का पानी पहुंचा। जल गुणवत्ता, स्रोत संरक्षण और महिलाओं की भागीदारी पर जोर।

उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के जरिए 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से पेयजल उपलब्ध कराया गया है। योजना के तहत जल गुणवत्ता, स्रोत संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी पर भी जोर दिया जा रहा है।

जल जीवन मिशन: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पानी के लिए लंबी दूरी तय करने वाले ग्रामीणों की मुश्किलें कम हुई हैं। जल जीवन मिशन के तहत 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल से पेयजल पहुंचाने का दावा किया गया है। इसके साथ ही सरकारी स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनबाड़ी केंद्रों को भी नल जल सुविधा से जोड़ा गया है।

पहाड़ों में पानी के लिए संघर्ष की तस्वीर बदल रही

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में लंबे समय से पेयजल की समस्या ग्रामीण जीवन की बड़ी चुनौतियों में शामिल रही है। दुर्गम रास्तों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों, खासकर महिलाओं को पानी लाने के लिए कई किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ता था। गर्मियों में कई गांवों में यह समस्या और गंभीर हो जाती थी।

अब जल जीवन मिशन के जरिए इस स्थिति में बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है। पाइपलाइन और जल टैंक जैसी सुविधाओं के विस्तार से ग्रामीण परिवारों को उनके घर के पास ही पानी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

पिथौरागढ़ के रमेश राम के मुताबिक, उनके गांव में गर्मियों के दौरान पानी की कमी इतनी ज्यादा होती थी कि लोगों को घर छोड़ने तक की स्थिति का सामना करना पड़ता था। गांव में जल टैंक बनने और घरों में नल लगने के बाद लोगों की रोजमर्रा की परेशानी काफी कम हुई है।

15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पहुंचा नल जल

उत्तराखंड सरकार के अनुसार, राज्य में जल जीवन मिशन के तहत 15 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल से पेयजल पहुंचाया जा चुका है। राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इसे एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया जा रहा है।

योजना का उद्देश्य केवल घरों तक पाइपलाइन पहुंचाना नहीं है। पेयजल की गुणवत्ता बनाए रखने, योजनाओं के नियमित संचालन और भविष्य में जल उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

राज्य के सरकारी और अशासकीय स्कूलों के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों को भी नल जल सुविधा से जोड़ा गया है। इससे बच्चों, मरीजों और ग्रामीण महिलाओं को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।

पानी की गुणवत्ता जांच में महिलाओं की भागीदारी

जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता की जांच को भी महत्व दिया जा रहा है। गांवों में महिलाओं को पानी की जांच के लिए किट उपलब्ध कराने और उन्हें जांच प्रक्रिया से जोड़ने की पहल की गई है।

ग्रामीण पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव के लिए लगभग 7,800 नल जल मित्रों के चयन की जानकारी दी गई है। इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को पाइपलाइन और जल योजनाओं के रखरखाव की जिम्मेदारी से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।

इससे योजना में ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर छोटी समस्याओं का समाधान करने में मदद मिल सकती है।

जल स्रोतों के संरक्षण पर भी जोर

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में केवल पाइपलाइन बिछाना पर्याप्त नहीं है। प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण और पानी की उपलब्धता बनाए रखना भी जरूरी है। इसी को देखते हुए जल जीवन मिशन के अगले चरण में जल स्रोतों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और डिजिटल निगरानी जैसी गतिविधियों पर जोर दिया जा रहा है।

राज्य सरकार ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सुधार आधारित समझौता भी किया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को अधिक टिकाऊ बनाना और उपलब्ध जल स्रोतों का बेहतर प्रबंधन करना है।

महिलाओं और बच्चों को सबसे बड़ा फायदा

पौड़ी गढ़वाल की मंगला देवी के अनुसार, पहले उन्हें सुबह जल्दी उठकर कई किलोमीटर दूर प्राकृतिक जल स्रोत तक जाना पड़ता था। पानी भरने और उसे घर तक लाने में दिन का काफी समय निकल जाता था। अब घर में नल से पानी मिलने के कारण यह समय बच रहा है।

पेयजल की सुविधा का सीधा असर महिलाओं और बच्चों की दिनचर्या पर पड़ता है। पानी लाने में लगने वाला समय बचने से महिलाएं घरेलू काम, आजीविका और अन्य गतिविधियों पर ध्यान दे सकती हैं। बच्चों को भी पानी ढोने के बजाय पढ़ाई के लिए अधिक समय मिल सकता है।

इस तरह उत्तराखंड में जल जीवन मिशन को केवल पेयजल उपलब्ध कराने वाली योजना के तौर पर नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवनशैली में बदलाव लाने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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