सावन के 15वें दिन भगवान शिव की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालु जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और मंत्र जाप करते हैं। जानिए पूजा की सही विधि, धार्मिक महत्व और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
सावन: भगवान शिव को समर्पित सावन महीने में हर दिन पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। सावन का 15वां दिन भी शिव भक्तों के लिए खास है। इस दिन श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करते हैं। इसके साथ बेलपत्र, फूल और धूप-दीप से पूजा कर भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने की कामना करते हैं।
सावन का 15वां दिन क्यों माना जाता है खास?
सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। यही वजह है कि पूरे महीने शिव मंदिरों में श्रद्धालु पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करते हैं।

सावन के 15वें दिन भी भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। इस दिन शिव परिवार की पूजा कर घर में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
शिवलिंग पर जलाभिषेक का विशेष महत्व
सावन में भगवान शिव को जल अर्पित करना पूजा का प्रमुख हिस्सा माना जाता है। भक्त सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और भगवान शिव का ध्यान करते हुए शिवलिंग पर जल या गंगाजल चढ़ाते हैं।
इसके बाद श्रद्धा के अनुसार दूध, दही, शहद और पंचामृत से अभिषेक करने की परंपरा भी निभाई जाती है। पूजा की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है।
जलाभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र और फूल अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ धूप और दीप जलाकर भगवान शिव की आरती की जाती है।
बेलपत्र और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा से बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। बेलपत्र चढ़ाने से पहले उसे साफ कर लेना चाहिए।
पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप किया जा सकता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी करते हैं। मंत्र जाप के बाद भगवान शिव से परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
सावन के 15वें दिन ऐसे करें पूजा
सावन के 15वें दिन पूजा के लिए सुबह स्नान करके पूजा स्थान की साफ-सफाई करें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए पूजा शुरू करें। संभव हो तो शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का दर्शन और जलाभिषेक करें।
शिवलिंग पर सबसे पहले जल या गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धा के अनुसार दूध या पंचामृत से अभिषेक करें। शिवलिंग पर बेलपत्र, फूल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें।
इसके बाद धूप और दीप जलाकर भगवान शिव की आरती करें। 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हुए भगवान भोलेनाथ से परिवार की खुशहाली और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
सावन में भगवान शिव की पूजा करते समय साफ-सफाई और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा सामग्री स्वच्छ होनी चाहिए और बेलपत्र अर्पित करने से पहले उसे अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिव पूजा में दिखावे से अधिक श्रद्धा और भक्ति को महत्व दिया जाता है। इसलिए सावन के 15वें दिन भगवान शिव की पूजा शांत मन और पूरी श्रद्धा के साथ करना शुभ माना जाता है।










