उत्तरकाशी में भारी बर्फबारी के बाद ट्रेकिंग पर रोक, गंगोत्री नेशनल पार्क में पर्वतारोहण भी बंद

उत्तरकाशी के उच्च हिमालय में भारी बर्फबारी के बाद गंगोत्री नेशनल पार्क में ट्रेकिंग और पर्वतारोहण पर अस्थायी रोक लगी। 136 ट्रेकर्स के फंसने के बाद फैसला लिया गया।
उत्तरकाशी में भारी बर्फबारी के बाद ट्रेकिंग पर रोक, गंगोत्री नेशनल पार्क में पर्वतारोहण भी बंद
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उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के बाद गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन ने ट्रेकिंग और पर्वतारोहण गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगा दी है। बीते दिनों मौसम अचानक बिगड़ने के बाद ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी हिमपात हुआ था। बर्फबारी के कारण हाई अल्टीट्यूड एक्सपीडिशन और ट्रेकिंग के लिए गए करीब 136 पर्वतारोही और ट्रेकर्स के फंसने की घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नए परमिट जारी करने पर फिलहाल रोक लगाई है।

बताया गया कि 26 और 27 सितंबर को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम खराब हुआ और भारी बारिश के साथ बर्फबारी हुई। इसके बाद कई ऊंचाई वाले ट्रेक रूटों पर बर्फ जम गई। रास्तों पर फिसलन बढ़ने और कुछ स्थानों पर मार्ग बाधित होने की आशंका पैदा हो गई। ऐसे मौसम में ट्रेकर्स और पर्वतारोहियों की आवाजाही जोखिमपूर्ण हो सकती है। इसी को देखते हुए गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन ने यह अस्थायी निर्णय लिया है।

इससे पहले उच्च हिमालय में अचानक हुई बर्फबारी के कारण करीब 136 पर्वतारोही, ट्रेकर और सहयोगी स्टाफ अलग-अलग बेस कैंपों में फंस गए थे। इनमें हाई अल्टीट्यूड एक्सपीडिशन के 89 सदस्य, कालिंदी पास बेस कैंप पर 18 और ऑडेन कोल पास बेस कैंप पर 29 लोग शामिल बताए गए थे। मौसम खराब होने के कारण इन लोगों के लिए नीचे लौटना आसान नहीं था। इसके बाद जिला प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान शुरू किया।

फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेली रेस्क्यू अभियान चलाया गया। हर्षिल स्थित सेना के हेलीपैड को रेस्क्यू अभियान के लिए महत्वपूर्ण बेस के रूप में इस्तेमाल किया गया। प्रशासन, सेना, पुलिस, एसडीआरएफ, आपदा प्रबंधन और गंगोत्री नेशनल पार्क की टीमें बचाव अभियान में जुटीं। शुरुआती अभियान में कई ट्रेकर्स को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया।

जागरण की रिपोर्ट के अनुसार सोमवार और मंगलवार को चले रेस्क्यू अभियान में 67 पर्वतारोहियों और ट्रेकर्स को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। वहीं 53 पर्वतारोहियों और ट्रेकर्स के स्वयं वापस लौटने की सूचना थी। इसके अलावा माउंट श्रीकंठ के आरोहण के लिए गया सीमा सुरक्षा बल का 18 सदस्यीय दल अभियान जारी रखे हुए था।

रेस्क्यू होकर लौटे ट्रेकर्स ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ की मोटी परत जमने की जानकारी दी। कालिंदी खाल बेस और ऑडेन कोल पास जैसे क्षेत्रों में करीब पांच से छह फीट तक बर्फबारी होने की सूचना मिली। इतनी अधिक बर्फबारी के बाद सामान्य ट्रेकिंग मार्गों पर आवाजाही मुश्किल हो सकती है। कई जगह बर्फ के नीचे रास्ते छिप जाने और फिसलन बढ़ने का खतरा भी रहता है।

गंगोत्री नेशनल पार्क के उप निदेशक मयंक गर्ग के अनुसार, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी को देखते हुए सुरक्षा कारणों से ट्रेकिंग और पर्वतारोहण की अनुमति पर अस्थायी रोक लगाई गई है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मौसम और रास्तों की स्थिति सामान्य होने तक नए ट्रेकर्स को जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने की अनुमति न दी जाए।

गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र में गंगोत्री-गोमुख-तपोवन, गरतांग गली और केदारताल सहित कई प्रमुख ट्रेक रूट हैं। भारी बारिश और बर्फबारी के बाद इन मार्गों की स्थिति प्रभावित हुई है। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार पार्क प्रशासन ने अग्रिम आदेश तक पार्क क्षेत्र में प्रवेश प्रतिबंधित किया है, क्योंकि कई रास्तों पर बर्फ जमने, फिसलन बढ़ने और मार्ग बाधित होने की आशंका है।

भारी बर्फबारी का असर केवल उच्च हिमालयी पर्वतारोहण मार्गों तक सीमित नहीं है। उत्तरकाशी वन प्रभाग के अधिकारियों के मुताबिक दयारा बुग्याल और डोडीताल जैसे ट्रेक रूटों पर भी मौसम को देखते हुए आवाजाही रोकी गई थी। इन रास्तों को दोबारा खोलने के लिए जिलाधिकारी की अनुमति आवश्यक होगी। इसका मतलब है कि प्रशासन मौसम और मार्ग की स्थिति का आकलन करने के बाद ही सामान्य आवाजाही बहाल करेगा।

प्रशासन के लिए हालिया घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि खराब मौसम के कारण ऊंचाई वाले इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान चलाना पड़ा। हेली रेस्क्यू के साथ-साथ पैदल बचाव दलों को भी तैयार रखा गया। आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और गंगोत्री नेशनल पार्क की टीमें अलर्ट मोड पर रखी गई थीं।

रेस्क्यू अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग को भी तैयार रखा गया था। प्रशासन ने चिकित्सकों की टीम, जरूरी दवाइयों और एंबुलेंस को नजदीकी स्थानों पर तैयार रखने के निर्देश दिए थे, ताकि बर्फबारी में फंसे किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने पर उसे तत्काल चिकित्सा सहायता दी जा सके। ट्रेकर्स के लिए राशन, पैक्ड फूड और पेयजल की व्यवस्था रखने के निर्देश भी दिए गए थे।

उत्तरकाशी में इस समय मौसम को लेकर प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के चारधाम सेक्टर के ताजा नाउकास्ट में उत्तरकाशी से गंगोत्री मार्ग के लिए हल्की बारिश का उल्लेख किया गया है, जबकि उस अपडेट में कोई चेतावनी दर्ज नहीं थी। हालांकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थानीय मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए ट्रेकिंग गतिविधियों को दोबारा शुरू करने का फैसला केवल मैदानी मौसम देखकर नहीं किया जाएगा।

गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन की रोक से पर्यटन और ट्रेकिंग कारोबार पर भी असर पड़ने की बात सामने आई है। गढ़वाल हिमालय माउंटेनियरिंग एंड ट्रेकिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र राणा ने कहा है कि बहुत अधिक ऊंचाई वाले जोखिमपूर्ण पास पर रोक समझ में आती है, लेकिन दयारा, डोडीताल, सातताल, क्यारकोटी और गंगोत्री-गोमुख जैसे अपेक्षाकृत अलग परिस्थितियों वाले मार्गों पर भी पूरी तरह रोक लगाने से पर्यटन गतिविधियों को नुकसान हो सकता है। यह ट्रेकिंग कारोबार से जुड़े संगठन का पक्ष है, जबकि पार्क प्रशासन फिलहाल सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।

ट्रेकिंग कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि कई पर्यटक पहले से बुकिंग कराकर उत्तरकाशी पहुंचते हैं। अचानक रास्ते बंद होने से उनकी यात्रा योजना प्रभावित होती है। इसके अलावा ट्रेकिंग एजेंसियां पहले से राशन, उपकरण और दूसरे संसाधनों की व्यवस्था करती हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसला मौसम और रास्तों की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखकर किया गया है।

गंगोत्री-गोमुख ट्रेक उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन मार्गों में शामिल है। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। लेकिन उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम तेजी से बदलने के कारण सामान्य दिनों में भी सावधानी जरूरी होती है। भारी बर्फबारी के बाद रास्ते की स्थिति और कठिन हो सकती है। इसलिए प्रशासन ने फिलहाल आवाजाही पर रोक लगाकर जोखिम कम करने का फैसला किया है।

इसी तरह केदारताल, तपोवन और अन्य ऊंचाई वाले ट्रेक भी मौसम की मार से प्रभावित हो सकते हैं। बर्फबारी के बाद रास्ते पर जमा बर्फ के साथ-साथ चट्टानों से पत्थर गिरने, फिसलन और मार्ग के क्षतिग्रस्त होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में ट्रेकिंग शुरू करने से पहले मार्ग का भौतिक निरीक्षण और सुरक्षा आकलन करना जरूरी होगा।

बीते दिनों 136 लोगों के फंसने की घटना ने प्रशासन के सामने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में निगरानी और आपातकालीन तैयारियों की जरूरत भी सामने रखी है। हालांकि कई लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में ट्रेकर्स के एक साथ फंसने से रेस्क्यू अभियान को बड़े स्तर पर चलाना पड़ा। खराब मौसम के बीच हेलीकॉप्टर संचालन भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए पैदल रेस्क्यू टीमों को भी तैयार रखना पड़ा।

फिलहाल गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन की ओर से ट्रेकिंग और पर्वतारोहण गतिविधियों पर रोक अस्थायी है। रोक कब हटेगी, यह मौसम और ट्रेक रूटों की स्थिति पर निर्भर करेगा। अधिकारियों का कहना है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के कारण फिलहाल सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। मार्ग सुरक्षित होने और मौसम में सुधार के बाद ही अनुमति दोबारा शुरू करने पर फैसला लिया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन का फोकस अब फंसे हुए पर्वतारोहियों और ट्रेकर्स की सुरक्षित वापसी के साथ-साथ ट्रेकिंग मार्गों की स्थिति का आकलन करने पर है। जहां जरूरत है, वहां बचाव दल और स्वास्थ्य सेवाओं को तैयार रखा गया है। वहीं पार्क प्रशासन नए पर्वतारोहण और ट्रेकिंग परमिट जारी करने से फिलहाल बच रहा है।

उत्तरकाशी में हुई भारी बर्फबारी ने एक बार फिर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता को सामने ला दिया है। कुछ ही घंटों में मौसम बदलने के बाद कई फीट बर्फ जमा हो सकती है और सामान्य दिखाई देने वाला ट्रेक रूट भी जोखिमपूर्ण बन सकता है। ऐसे में प्रशासन द्वारा फिलहाल गतिविधियां रोकना और मार्गों की स्थिति की निगरानी करना मौजूदा परिस्थितियों का हिस्सा है।

फिलहाल पर्यटकों और ट्रेकिंग से जुड़े लोगों को प्रशासन के अगले आदेश का इंतजार करना होगा। गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र में प्रवेश और नए ट्रेकिंग परमिट पर लगी अस्थायी रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक मार्गों को सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता। वहीं हालिया रेस्क्यू अभियान के बाद प्रशासन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किसी भी नए अभियान को अनुमति देने से पहले मौसम और बर्फ की स्थिति का आकलन करेगा।

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