वाराणसी: सावन के अंतिम सोमवार के बाद काशी में बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। शहर में करीब 15 घंटे तक हुई लगातार बारिश के बाद कई इलाकों में सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं। घरों और अस्पताल परिसरों तक बारिश का पानी पहुंच गया। सबसे ज्यादा परेशानी BHU अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और तीमारदारों को हुई। अस्पताल परिसर में पानी भरने के कारण कई लोगों को मरीजों को कंधे पर बैठाकर या सहारा देकर अस्पताल तक पहुंचाना पड़ा। ताजा रिपोर्टों में BHU परिसर में कमर तक पानी भरने की बात सामने आई है।
बारिश का असर सिर्फ BHU तक सीमित नहीं रहा। वाराणसी के कई प्रमुख इलाकों में जलभराव के कारण लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया। सड़कों पर इतना पानी भर गया कि कई जगह वाहन पानी में फंस गए। कारों और दोपहिया वाहनों को निकालने में लोगों को काफी परेशानी हुई। निचले इलाकों में पानी घरों के अंदर तक पहुंचने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
मंगलवार को भी मौसम पूरी तरह साफ नहीं हुआ। मौसम पूर्वानुमान में वाराणसी में बारिश की संभावना बनी हुई है और अधिकतम तापमान करीब 32.7 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
बारिश के दौरान शहर के कई इलाकों में जलनिकासी व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठे। तेज बारिश के कारण नालियों और सीवर सिस्टम पर दबाव बढ़ गया। कई स्थानों पर सड़क और नाले का अंतर ही दिखाई नहीं दे रहा था। पानी सड़क के ऊपर बहने लगा और वाहन चालकों को बेहद सावधानी से गुजरना पड़ा।
BHU अस्पताल परिसर की तस्वीरें और वीडियो लोगों की परेशानी को साफ तौर पर दिखाते हैं। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को जलभराव के बीच रास्ता तय करना पड़ा। कुछ तीमारदार मरीजों को कंधे पर लेकर पानी से होकर आगे बढ़ते नजर आए। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह जलभराव होना मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया।बारिश के कारण कई इलाकों में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। सड़क पर पानी भरने से वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई। कुछ जगह वाहन बीच पानी में बंद पड़ गए। लोगों को अपने वाहन छोड़कर पैदल जाने की स्थिति का सामना करना पड़ा।
वाराणसी पहले से ही गंगा के बढ़े जलस्तर के कारण बाढ़ जैसी स्थिति से जूझ रहा है। पिछले दिनों गंगा का पानी बढ़ने के कारण शहर के सभी 86 घाटों के डूबने की खबर सामने आई थी। वहीं वरुणा नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे घरों में भी पानी पहुंचा है।
ऐसे में लगातार बारिश ने प्रशासन की मुश्किल और बढ़ा दी है। नदी का जलस्तर और बारिश का पानी एक साथ शहर के निचले इलाकों के लिए खतरा बढ़ा सकते हैं। हालांकि मंगलवार को गंगा के जलस्तर में कमी की खबर भी सामने आई है। केंद्रीय जल आयोग ने अगले 24 घंटों में जलस्तर में और कमी की उम्मीद जताई है, जिससे नदी किनारे के इलाकों को कुछ राहत मिल सकती है।
बारिश के कारण घरों में पानी घुसने से लोगों को सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा। निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों की चिंता सबसे ज्यादा बढ़ गई। जिन घरों के आसपास पहले से जलभराव था, वहां स्थिति और खराब हो गई।
काशी में बारिश का असर धार्मिक गतिविधियों पर भी पड़ा। सावन के अंतिम सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों और घाटों की ओर पहुंचे थे। बारिश और जलभराव के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। कई रास्तों पर पानी जमा होने के कारण श्रद्धालुओं को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ा।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने और प्रभावित लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने की है। वहीं नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण पहले से संवेदनशील इलाकों में निगरानी भी बढ़ाई गई है। वाराणसी में बाढ़ के खतरे को देखते हुए राहत और बचाव टीमें पहले से अलर्ट पर हैं।
शहर के कई हिस्सों में बारिश रुकने के बाद भी पानी जमा रहा। इसका कारण केवल बारिश की मात्रा नहीं बल्कि जलनिकासी की क्षमता पर भी निर्भर करता है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से सड़कें क्षतिग्रस्त होने, यातायात प्रभावित होने और संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका रहती है।
बारिश के दौरान लोगों को बिजली के तारों और जलभराव वाले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। पानी में वाहन लेकर जाने से पहले सड़क की स्थिति देखना भी जरूरी है, क्योंकि कई जगह गड्ढे और खुले मैनहोल पानी के नीचे दिखाई नहीं देते।
वाराणसी में इस समय मौसम और नदी दोनों की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। एक तरफ बारिश से शहर में जलभराव की समस्या पैदा हुई है, तो दूसरी तरफ गंगा और वरुणा के बढ़े जलस्तर ने पहले से ही कई इलाकों को प्रभावित किया हुआ है। हालांकि गंगा के जलस्तर में अब कमी की खबर राहत देने वाली है।
कुल मिलाकर, काशी में करीब 15 घंटे की बारिश ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों की बड़ी परीक्षा ले ली है। सड़कें तालाब बन गईं, कई जगह कारें और दूसरे वाहन पानी में फंस गए, घरों में पानी पहुंचा और BHU अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ी। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि आने वाले घंटों में बारिश का दौर कमजोर पड़ता है या शहर को एक और भारी बारिश का सामना करना पड़ता है।