Varuthini Ekadashi 2026: इस दिन किए गए दान से मिलेगा धार्मिक लाभ

वरूथिनी एकादशी 13 अप्रैल 2026 को। जल, सत्तू, वस्त्र, गुड़ और बेल का दान करने से सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और मोक्ष प्राप्त होता है।

वरूथिनी एकादशी 2026 इस साल 13 अप्रैल को पड़ रही है। वैशाख मास की पहली एकादशी पर जल, सत्तू, वस्त्र, छाता, चप्पल, गुड़ और बेल का दान करने से जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति मिलती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए पुण्य कर्म 10 हजार साल की तपस्या के समान फल देते हैं और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होते हैं।

Varuthini Ekadashi 2026 Daan: इस साल वैशाख मास की पहली एकादशी, वरूथिनी एकादशी, 13 अप्रैल को पड़ रही है। भारत के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धालु इस दिन विष्णु पूजा और दान करते हैं। जल, सत्तू, वस्त्र, छाता, चप्पल, गुड़ और बेल का दान विशेष पुण्य प्रदान करता है। इसे करने से पितरों की तृप्ति होती है, स्वास्थ्य और समृद्धि बढ़ती है, और व्यक्ति पाप, रोग और भय से मुक्ति पाता है। इस व्रत के दौरान विशेष ध्यान और नियम पालन से आध्यात्मिक लाभ और मोक्ष की प्राप्ति संभव होती है।

जल दान पितरों और सूर्यदेव को तृप्ति

वैशाख मास में जल का दान सर्वोत्तम माना गया है। स्कंद पुराण में बताया गया है कि प्यासे को जल पिलाने या जल से भरे मटके का दान करने से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं। जल दान पितरों की तृप्ति के लिए भी फायदेमंद है। इससे मृतकों की आत्मा को शांति मिलती है और घर में सुख-शांति का वातावरण बनता है।

सत्तू और वस्त्र का दान

इस माह में सत्तू का दान करना बहुत शुभ माना गया है। सत्तू सुपाच्य और ठंडी वस्तु होने के कारण स्वास्थ्य में सुधार लाता है और घर में समृद्धि बनाए रखता है। साथ ही, गर्मियों में जरूरतमंदों को हल्के और सफेद कपड़े का दान करने से पाप समाप्त होते हैं। इससे मानसिक शांति मिलती है और सूर्य व अग्नि दोष शांत होते हैं।

प्रतिष्ठा और ग्रह शांति

तपते सूरज की गर्मी से बचाने के लिए छाता, चप्पल या टोपी का दान करना बेहद फलदायी होता है। इससे दीर्घायु, प्रतिष्ठा और गर्मी से राहत मिलती है। वैशाख मास में गुड़ और चीनी का दान भी शुभ माना गया है। मीठे का दान वाणी में मधुरता लाता है और पारिवारिक जीवन सुखद बनाता है। इसके साथ ही शुक्र और बुध ग्रह की कृपा भी प्राप्त होती है।

फल और बेल का दान

बेल का दान वैशाख माह के दौरान विशेष फलदायी है। इससे रोगों से मुक्ति मिलती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। फल और बेल के दान से घर में स्वास्थ्य और समृद्धि बढ़ती है। यह व्रत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और इसे करने से पापों का नाश होता है।

वरूथिनी एकादशी का महत्व

वरूथिनी एकादशी वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की पहली एकादशी को आती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन किया गया व्रत और पुण्य कर्म जीवन में सुख, समृद्धि, रोगमुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति दिलाता है। पद्म पुराण में कहा गया है कि वैशाख मास में किए गए पुण्य कर्म अन्य मासों के मुकाबले कई गुना अधिक फलदायी होते हैं। इस दिन व्रत करने से पाप, कष्ट, रोग और भय से मुक्ति मिलती है। साथ ही, मृत्यु के बाद व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त होता है।

Leave a comment