वायुसेना प्रमुख ए. पी. सिंह का बयान: 'शत्रु के किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है IAF'

वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह ने कहा कि IAF किसी भी शत्रु के दुस्साहस का त्वरित और मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। सुखोई Su-३०, जानें पूरी खबर।

भारतीय वायुसेना (IAF) प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने बुधवार को कहा कि भारतीय वायुसेना किसी भी शत्रु देश के दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है।

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने बुधवार को दृढ़ शब्दों में कहा कि भारतीय वायुसेना किसी भी शत्रु देश की आक्रामक हरकत का तत्काल और प्रभावी जवाब देने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत, विशेषकर वायुसेना, दो मोर्चों पर एक साथ युद्ध लड़ने की क्षमता विकसित कर चुका है और किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

एयर चीफ मार्शल सिंह का यह बयान उस समय आया जब वह 1971 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय विजय की 54वीं वर्षगांठ पर आयोजित ‘विजय दिवस’ समारोह में शामिल होने के लिए असम के डिब्रूगढ़ में मौजूद थे। इस अवसर पर भारतीय वायुसेना ने शानदार हवाई प्रदर्शन कर 1971 के युद्ध में निभाई गई अपनी निर्णायक भूमिका को श्रद्धांजलि दी।

भारतीय वायुसेना की स्टील्थ क्षमता और रणनीति को किया मजबूत

डिब्रूगढ़ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान एयर चीफ मार्शल सिंह ने बताया कि भारतीय वायुसेना पिछले अनुभवों, बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और आधुनिक युद्धक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी स्टील्थ क्षमता, तकनीक और सामरिक तैयारियों को लगातार मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा,

'यदि कोई शत्रु राष्ट्र भारत के खिलाफ किसी प्रकार का दुस्साहस करता है, तो भारतीय वायुसेना उसे उसके ही अंदाज में करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।'

उनके अनुसार, वायुसेना की परिचालन क्षमता, त्वरित प्रतिक्रिया और उच्च स्तर की प्रशिक्षण प्रणाली किसी भी परिस्थिति में भारतीय सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

1971 युद्ध में भारतीय वायुसेना की निर्णायक भूमिका

एयर चीफ मार्शल सिंह ने 1971 के युद्ध को याद करते हुए कहा कि भारतीय वायुसेना की बहादुरी और सटीक रणनीति ने पूरे अभियान की दिशा बदल दी थी। उन्होंने विशेष रूप से उन हवाई अभियानों का उल्लेख किया जिनके माध्यम से पाकिस्तान की सामरिक क्षमता कम हुई और युद्ध का समय से पहले निर्णायक अंत हुआ। उन्होंने कहा,

'चाहे दिन के समय किए गए ऑपरेशन हों, आखिरी निर्णायक हमले हों या बांग्लादेश में तत्कालीन राज्यपाल भवन पर कार्रवाई, भारतीय वायुसेना की भूमिका ने युद्ध को समाप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।'

केवल 13 दिनों में पाकिस्तानी सेना का आत्मसमर्पण और युद्धविराम की अपील भारतीय सशस्त्र बलों की दृढ़ कार्रवाई और समन्वित रणनीति का प्रमाण था।

तीनों सेनाओं की संयुक्त कार्यकुशलता: 1971 की सबसे बड़ी सीख

एयर चीफ मार्शल सिंह ने यह भी कहा कि 1971 का युद्ध इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि तीनों सेनाओं — थलसेना, नौसेना और वायुसेना — के संयुक्त अभियान किसी भी बड़े सैन्य लक्ष्य को हासिल करने में कितने प्रभावी हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि नदी पार करना, एयरड्रॉप अभियानों का सफलतापूर्वक संचालन और जमीनी सेना के साथ लगातार तालमेल, ये सभी कार्य तभी संभव हो पाए जब तीनों सेनाओं ने एकजुट होकर रणनीतिक योजना पर काम किया।

उन्होंने कहा, संयुक्त अभियान युद्ध जीतने की दिशा में सबसे बड़ी ताकत साबित होते हैं और आज भी हमारी सैन्य नीति में यही सिद्धांत केंद्र में है। विजय दिवस समारोह के तहत डिब्रूगढ़ के मोहनबाड़ी एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना ने एक भव्य हवाई प्रदर्शन आयोजित किया। पूर्वी वायु कमान द्वारा आयोजित इस इवेंट में सैन्य अधिकारी, वायुसेना के पूर्व दिग्गज, स्थानीय प्रशासन, आम नागरिक और बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे मौजूद थे।

एयर शो में भारतीय वायुसेना के प्रमुख युद्धक और परिवहन विमानों ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया, जिनमें शामिल थे—

  • सुखोई Su-30 मल्टी-रोल फाइटर जेट
  • डोर्नियर Do-228 निगरानी विमान
  • एंटोनोव AN-32 परिवहन विमान
  • चिनूक और Mi-17 हेलीकॉप्टर

इन विमानों के मनमोहक हवाई करतबों और फॉर्मेशन फ्लाइंग ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

 

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