भारत की प्रमुख मेटल और माइनिंग कंपनी वेदांता लिमिटेड के मेगा डिमर्जर (Vedanta Demerger) के बाद अब निवेशकों की नजर चार नई कंपनियों की शेयर बाजार में लिस्टिंग पर टिकी हुई है।
बिजनेस न्यूज़: Vedanta Limited ने अपना मेगा डीमर्जर पूरा कर लिया है, जिसके बाद अब बाजार की नजर इस बात पर है कि चार नई अलग हुई कंपनियों की लिस्टिंग कब होगी। डीमर्जर के तहत योग्य शेयरधारकों को पैरेंट कंपनी में रखे गए 1 शेयर के बदले चार नई कंपनियों के एक-एक शेयर मिलने का प्रावधान किया गया है। यह भारत के मेटल और माइनिंग सेक्टर के सबसे बड़े कॉर्पोरेट पुनर्गठनों में से एक माना जा रहा है।
हालांकि इन नई कंपनियों की स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। सामान्य तौर पर ऐसे डीमर्जर मामलों में लिस्टिंग में कुछ हफ्तों से लेकर कई महीनों तक का समय लग सकता है, क्योंकि इसमें नियामकीय मंजूरी, रिकॉर्ड डेट और एक्सचेंज प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।
वेदांता डिमर्जर में क्या हुआ बदलाव?
वेदांता के डिमर्जर के बाद कंपनी के मुख्य कारोबार को चार स्वतंत्र कंपनियों में बांटा गया है:
- वेदांता एल्युमिनियम मेटल लिमिटेड (VAML)
- वेदांता पावर (पहले तलवंडी साबो पावर)
- वेदांता ऑयल एंड गैस (पहले माल्को एनर्जी)
- वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड
डिमर्जर योजना के तहत शेयरधारकों को एक वेदांता शेयर के बदले चारों नई कंपनियों में एक-एक शेयर मिलने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य हर बिजनेस यूनिट को स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन योग्य बनाना और संचालन में अधिक पारदर्शिता लाना है।
लिस्टिंग में कितना समय लग सकता है?
मार्केट विशेषज्ञों और ब्रोकरेज फर्मों के अनुसार, डिमर्जर के बाद लिस्टिंग की प्रक्रिया तुरंत नहीं होती। इसके लिए नियामकीय मंजूरी, रिकॉर्ड डेट, शेयर आवंटन और एक्सचेंज की औपचारिकताओं को पूरा करना होता है। नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज जैसी संस्थाओं का अनुमान है कि नई कंपनियों की लिस्टिंग में लगभग 3 सप्ताह से लेकर 3 महीने तक का समय लग सकता है। यह समय सीमा पूरी तरह से नियामकीय प्रक्रियाओं और कंपनी की अनुपालन स्थिति पर निर्भर करती है।

पिछली बड़ी कंपनियों के डिमर्जर से क्या सीख मिलती है?
अगर भारत की अन्य बड़ी कंपनियों के डिमर्जर पैटर्न को देखें तो लिस्टिंग में अलग-अलग समय लगा है:
- Tata Motors Demerger: लगभग 1 महीने में नई संरचना बाजार में दिखी
- Siemens Demerger: करीब 73 दिन यानी ढाई महीने का समय लगा
- ITC Hotels Demerger: कुछ महीनों की प्रक्रिया के बाद लिस्टिंग हुई
- Jio Financial Services: बाजार में आने में नियामकीय प्रक्रिया ने समय लिया
इन उदाहरणों से साफ है कि हर डिमर्जर की समयरेखा अलग होती है और वेदांता के मामले में भी यही स्थिति देखने को मिल सकती है। डिमर्जर के बाद वेदांता के शेयर में अस्थिरता देखी गई है। रिकॉर्ड डेट के आसपास शेयर में तेज गिरावट और फिर रिकवरी का ट्रेंड देखने को मिला। एक ही दिन में स्टॉक में 60% से अधिक एडजस्टमेंट जैसा मूव भी देखा गया, जो डिमर्जर स्ट्रक्चर के तकनीकी प्रभाव के कारण था।
वर्तमान में भी वेदांता के शेयर में उतार-चढ़ाव जारी है और यह लगभग ₹328 के आसपास ट्रेड कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे नई कंपनियों की लिस्टिंग की स्पष्टता आएगी, निवेशकों की धारणा में स्थिरता आएगी।









