महाराष्ट्र सरकार ने नया आदेश जारी किया है जिसमें सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि विधायक या सांसद के कार्यालय आने पर तुरंत खड़ा हों, सम्मानपूर्वक संवाद करें और उनकी बात ध्यान से सुनें। निर्देशों के उल्लंघन पर कार्रवाई होगी।
Mumbai: महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में एक नया आदेश जारी किया है। इस आदेश में कहा गया है कि राज्य के अधिकारियों को विधायकों और सांसदों के दफ्तर में आने पर उनका सम्मानपूर्वक स्वागत करना होगा। अधिकारी को तुरंत अपनी कुर्सी से उठकर उनसे मिलना होगा और उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुनना होगा। बातचीत के दौरान अधिकारियों को विनम्रता बनाए रखनी होगी। सरकार का कहना है कि ऐसा करने से प्रशासनिक जवाबदेही (accountability) और शासन (governance) में सुधार होगा।
निर्वाचित प्रतिनिधियों को देना होगा उचित सम्मान
मुख्य सचिव राजेश कुमार की ओर से जारी किए गए इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ व्यवहार में सम्मान और शिष्टाचार अनिवार्य है। आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर कोई अधिकारी इन निर्देशों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

हाल ही में कई निर्वाचित प्रतिनिधियों ने अधिकारियों की ओर से उनसे मिलने या उनकी समस्याओं का समाधान करने में देरी होने की शिकायत की थी। सरकार का मानना है कि नए निर्देशों से प्रशासन और विधायकों-सांसदों के बीच संवाद बेहतर होगा और जनप्रतिनिधियों की चिंताओं का समाधान समय पर होगा।
फोन कॉल और बातचीत में भी रहना होगा शिष्टाचार
नए दिशानिर्देश केवल दफ्तर में मिलने तक सीमित नहीं हैं। अधिकारियों को फोन पर बातचीत करते समय भी शिष्टाचार का पालन करना होगा। बातचीत के दौरान भाषा संयमित और सम्मानजनक होनी चाहिए। आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि अधिकारी प्रतिनिधियों की बातों को बीच में न रोकें और उन्हें पूरा समय दें।
पत्रों के लिए नया रजिस्टर
सरकार ने निर्देश दिया है कि हर दफ्तर में विधायकों और सांसदों के पत्रों के लिए अलग रजिस्टर रखा जाएगा। इसमें पत्रों की प्रविष्टि करना अनिवार्य होगा और इसका जवाब दो महीने के भीतर देना होगा। अगर किसी मामले का समाधान समय पर संभव न हो तो इसे विभाग प्रमुख के पास भेजा जाएगा। संबंधित विधायक या सांसद को औपचारिक रूप से यह जानकारी दी जाएगी कि मामला विचाराधीन है।








