पश्चिम बंगाल की दो सीटों पर कल उपचुनाव, पहली बार ममता न CM-विधायक और न उम्मीदवार

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है । 15 साल में ऐसा पहली बार हुआ जब ममता बनर्जी न CM, न विधायक और न उम्मीदवार हैं।

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होगा। 15 साल में पहली बार ममता बनर्जी न मुख्यमंत्री, न विधायक और न उम्मीदवार हैं। नंदीग्राम में TMC का भी कोई उम्मीदवार नहीं है। नतीजे 9 अक्टूबर को आएंगे।

कोलकाता: देश के चार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा की कुल छह सीटों पर उपचुनाव के लिए कल, 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा। इनमें पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की दो-दो विधानसभा सीटें, असम की एक लोकसभा सीट और पुडुचेरी की एक विधानसभा सीट शामिल है। सभी सीटों के नतीजे 9 अक्टूबर 2026 को घोषित किए जाएंगे।

इन उपचुनावों में सबसे ज्यादा राजनीतिक नजरें पश्चिम बंगाल पर टिकी हैं। राज्य में करीब 15 साल बाद पहली बार ऐसा चुनाव हो रहा है, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी न तो मुख्यमंत्री हैं, न विधायक और न ही उपचुनाव की उम्मीदवार हैं। मई 2026 में हुए विधानसभा चुनाव में TMC सत्ता से बाहर हो गई थी और ममता बनर्जी भी अपनी सीट हार गई थीं।

नंदीग्राम उपचुनाव पर सबसे ज्यादा नजर

पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों में नंदीग्राम और रेजीनगर शामिल हैं। इनमें नंदीग्राम का राजनीतिक महत्व लंबे समय से काफी अधिक रहा है। यह क्षेत्र TMC और भाजपा के बीच राजनीतिक संघर्ष का प्रमुख केंद्र रहा है।

नंदीग्राम की राजनीति का बंगाल की सत्ता में बदलाव से भी गहरा संबंध रहा है। वर्ष 2007 में भूमि अधिग्रहण के विरोध में हुए आंदोलन ने ममता बनर्जी और TMC को राज्य की राजनीति में मजबूत आधार दिया था। इसी राजनीतिक आंदोलन ने आगे चलकर 2011 में TMC को पश्चिम बंगाल की सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ा था। उनके सामने वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी थे। अधिकारी ने उस चुनाव में ममता को हरा दिया था। इसके बाद नंदीग्राम दोनों नेताओं और TMC-भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव का प्रतीक बन गया।

शुभेंदु अधिकारी ने 2026 में दोनों सीटों पर जीत दर्ज की

2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत हासिल की।
भवानीपुर में उन्होंने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से हराया। शुभेंदु अधिकारी को 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 वोट हासिल हुए।

इस हार के बाद ममता बनर्जी पहली बार ऐसी स्थिति में पहुंचीं, जहां वह राज्य की मुख्यमंत्री भी नहीं रहीं और विधानसभा की सदस्य भी नहीं हैं। यही वजह है कि नंदीग्राम उपचुनाव को पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीति में विशेष महत्व दिया जा रहा है।

नंदीग्राम में ममता ने नहीं उतारा उम्मीदवार

विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा थी कि ममता बनर्जी नंदीग्राम से उपचुनाव लड़ सकती हैं। हालांकि, TMC ने बाद में संचिता प्रधान को इस सीट से उम्मीदवार बनाया।

इसके बाद संचिता प्रधान ने चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया। अब नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी का कोई उम्मीदवार नहीं है। यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नंदीग्राम ममता बनर्जी की राजनीतिक यात्रा और TMC के विस्तार से सीधे जुड़ा रहा है।

नंदीग्राम में TMC और भाजपा के बीच लंबे समय से जारी राजनीतिक मुकाबले के कारण उपचुनाव के नतीजे दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

रेजीनगर में बहुकोणीय मुकाबला

पश्चिम बंगाल की दूसरी उपचुनाव सीट रेजीनगर है। यहां मुकाबला कई प्रमुख राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के बीच है। मैदान में भाजपा, कांग्रेस, TMC के दोनों धड़े, CPI(M) और जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के उम्मीदवार हैं।

रेजीनगर मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्र है। यहां भाजपा के शंकराव सरकार को छोड़कर प्रमुख उम्मीदवार मुस्लिम समुदाय से हैं।

कांग्रेस ने मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी को मैदान में उतारा है। TMC की ओर से रबीउल आलम चौधरी चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं जनता उन्नयन पार्टी ने हुमायूं कबीर के बेटे गोलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया है।

इस तरह रेजीनगर में मुकाबला सिर्फ भाजपा और TMC तक सीमित नहीं है। कांग्रेस, CPI(M) और AJUP की मौजूदगी ने चुनाव को बहुकोणीय बना दिया है। क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक संरचना को देखते हुए यहां का परिणाम भी पश्चिम बंगाल की आगामी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है।

ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक चुनौती

2026 के विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने और अपनी सीट हारने के बाद ममता बनर्जी की राजनीतिक स्थिति पहले की तुलना में अलग है। करीब 15 वर्षों में यह पहली बार है जब वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और विधायक दोनों नहीं हैं।

नंदीग्राम उपचुनाव में TMC का कोई उम्मीदवार नहीं होने से पार्टी की रणनीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं भाजपा के लिए यह क्षेत्र पहले से ही महत्वपूर्ण राजनीतिक आधार रहा है। शुभेंदु अधिकारी की नंदीग्राम में जीत ने भाजपा के प्रभाव को मजबूत किया है।

ऐसे में उपचुनाव के नतीजे यह संकेत दे सकते हैं कि विधानसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ रही है।

चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में मतदान

पश्चिम बंगाल के अलावा तमिलनाडु की दो विधानसभा सीटों, असम की एक लोकसभा सीट और पुडुचेरी की एक विधानसभा सीट पर भी 6 अक्टूबर को मतदान होगा।

इन उपचुनावों के परिणाम स्थानीय राजनीति के साथ-साथ संबंधित राज्यों में प्रमुख राजनीतिक दलों के जनाधार का आकलन करने के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे। 
हालांकि, पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर की सीटों पर होने वाला मतदान विशेष रूप से चर्चा में है।

सभी छह सीटों के लिए मतगणना और परिणाम की घोषणा 9 अक्टूबर 2026 को होगी। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि उपचुनावों में मतदाताओं ने किस राजनीतिक दल और उम्मीदवार पर भरोसा जताया।

15 साल बाद बदली राजनीतिक तस्वीर

पश्चिम बंगाल का यह उपचुनाव इसलिए अलग है क्योंकि राज्य की राजनीति में लंबे समय तक केंद्रीय भूमिका निभाने वाली ममता बनर्जी इस बार सीधे चुनावी मैदान में नहीं हैं। 2011 में TMC को सत्ता तक पहुंचाने वाली राजनीतिक यात्रा में नंदीग्राम का महत्वपूर्ण योगदान रहा था। अब उसी क्षेत्र में हो रहा उपचुनाव राज्य की बदली राजनीतिक तस्वीर के बीच आयोजित हो रहा है।

नंदीग्राम में ममता बनर्जी की अनुपस्थिति, शुभेंदु अधिकारी की पिछली जीत और भाजपा-TMC के बीच लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के कारण चुनाव परिणाम पर देशभर की नजर रहेगी। वहीं रेजीनगर में कई दलों की मौजूदगी इसे अलग तरह का राजनीतिक मुकाबला बना रही है।

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