भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य पर ध्यान न देने के कारण कई गंभीर स्त्री रोग अनदेखे रह जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, असामान्य पीरियड्स, बार-बार होने वाले इंफेक्शन, वजन बदलाव और हार्मोन असंतुलन संकेत हैं कि समय पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। सही पोषण, नियमित व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।
Women Health Issues: महिलाओं के लिए अपने स्वास्थ्य पर सतर्क रहना बेहद जरूरी है क्योंकि असामान्य पीरियड्स, लगातार दर्द, बार-बार इंफेक्शन और हार्मोन असंतुलन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की ओर संकेत कर सकते हैं। भारत में करीब 70 प्रतिशत महिलाएं कभी न कभी ऐसे मुद्दों का सामना करती हैं, लेकिन जागरूकता की कमी और समय पर जांच न होने के कारण समस्या बढ़ जाती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पोषण, नींद, व्यायाम और नियमित चेकअप के जरिए इन जोखिमों को नियंत्रित किया जा सकता है।
पीरियड्स और प्राथमिक चेतावनी संकेत
महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञ का कहना है कि पीरियड्स को प्राथमिकता देना जरूरी है। नियमित और सहने योग्य पीरियड सामान्य हैं, लेकिन हर घंटे पैड बदलना, बड़े थक्के या सात दिन से ज्यादा ब्लीडिंग गंभीर संकेत हो सकते हैं। स्वच्छता का ध्यान रखें, लेकिन अत्यधिक केमिकल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करें, क्योंकि शरीर स्वयं को साफ रखने में सक्षम है।
महिला रोग विशेषज्ञ यह भी बताती हैं कि बार-बार होने वाले इंफेक्शन, असामान्य दर्द या अचानक वजन परिवर्तन को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर डॉक्टर से जांच कराने से बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।

लाइफस्टाइल और पोषण का महत्व
हार्मोन संतुलन और स्वास्थ्य के लिए पोषण और वजन महत्वपूर्ण हैं। आयरन, कैल्शियम और विटामिन से भरपूर आहार जरूरी है। अत्यधिक या कम वजन पीसीओएस और बांझपन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान रखना भी आवश्यक है।
सक्रिय शारीरिक संबंध रखने वाली महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर की नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह अनुसार एचपीवी वैक्सीन पर विचार करना चाहिए। तनाव और नींद की कमी सीधे पीरियड्स और हार्मोन संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।













