योग-संगीत का अनोखा संगम: कैलाश खेर और असीस कौर ने बताया कैसे योग बनता है सुरों की ताकत

कैलाश खेर और असीस कौर ने योग-संगीत के अनोखे संगम पर बात की। जानिए कैसे योग और संगीत मिलकर मानसिक शांति और ऊर्जा का स्रोत बनते हैं। श्वास नियंत्रण से बेहतर गायन

संगीत और योग का संबंध बेहद गहरा और वैज्ञानिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। संगीत की दुनिया से जुड़े कई विशेषज्ञ मानते हैं कि बेहतर गायन और स्वर-साधना के लिए शारीरिक और मानसिक संतुलन उतना ही जरूरी है जितना अभ्यास।

एंटरटेनमेंट न्यूज़: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर योग और संगीत के गहरे संबंध पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। भारतीय संगीत जगत के कई प्रसिद्ध कलाकारों का मानना है कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि एक ऐसा माध्यम है जो स्वर, श्वास और मानसिक संतुलन को साधकर संगीत को और प्रभावी बनाता है।

पद्मश्री से सम्मानित गायक कैलाश खेर और लोकप्रिय गायिका असीस कौर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि योग ने न केवल उनके जीवन को संतुलित किया है, बल्कि उनके गायन और रचनात्मकता को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

श्वास और स्वर का गहरा संबंध

विशेषज्ञों के अनुसार, योग के प्राणायाम अभ्यास जैसे अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और नाड़ी शोधन फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाते हैं और सांसों पर नियंत्रण स्थापित करते हैं। यही नियंत्रण गायकों को लंबे समय तक सुर साधने और स्थिर स्वर बनाए रखने में मदद करता है। योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार करता है, बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करता है, जिससे कलाकार मंच पर अधिक आत्मविश्वास और स्थिरता के साथ प्रदर्शन कर पाते हैं।

“योग और संगीत एक ही ऊर्जा के दो रूप” – कैलाश खेर

गायक कैलाश खेर ने योग और संगीत को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए कहा कि दोनों ही आत्मिक शांति और आंतरिक ऊर्जा की ओर ले जाते हैं। उनके अनुसार, “योग ही संगीत है और संगीत ही योग है।” उन्होंने बताया कि उनका बचपन आध्यात्मिक वातावरण में बीता, जहां संतों और महात्माओं का आना-जाना लगा रहता था। बाद में उन्होंने एक आश्रम में रहकर योग और ध्यान की बारीकियां सीखी।

कैलाश खेर के अनुसार, योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं बल्कि एक ध्यान की अवस्था है, जहां व्यक्ति अपनी चेतना को केंद्रित कर परम शांति का अनुभव करता है। उन्होंने कहा कि प्राणायाम का अभ्यास उनके संगीत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि यह सांसों और विचारों दोनों पर नियंत्रण सिखाता है। उनका मानना है कि जब मन स्थिर होता है, तभी संगीत अपनी वास्तविक गहराई और प्रभाव को प्राप्त करता है।

असीस कौर के लिए योग और संगीत जीवन का हिस्सा

लोकप्रिय गायिका असीस कौर, जो “बोलना”, “हुई मलंग” और “रांझा” जैसे गानों के लिए जानी जाती हैं, ने बताया कि योग उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्कूल के दिनों से ही योग शुरू कर दिया था, जहां उनकी योग शिक्षिका ने उनकी लचीली शारीरिक क्षमता को देखते हुए उन्हें विभिन्न आसनों का प्रशिक्षण दिया। बाद में करियर की व्यस्तता के कारण योग से दूरी बनी, लेकिन उन्होंने इसे फिर से अपनाया।

असीस कौर के अनुसार, योग और संगीत दोनों ही शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करते हैं। जब वह मंच पर प्रदर्शन करती हैं, तो उन्हें वही संतुलन महसूस होता है जो योग अभ्यास के दौरान होता है।

श्वास नियंत्रण से बेहतर गायन की कला

असीस कौर ने बताया कि वह अपने दिन की शुरुआत अनुलोम-विलोम और भ्रामरी जैसे प्राणायाम से करती हैं। ये अभ्यास न केवल उनकी आवाज को स्थिर रखते हैं, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कभी-कभी यात्रा के दौरान भी वह भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास करती हैं ताकि उनकी आवाज में स्थिरता बनी रहे।

उनके अनुसार, योग और संगीत दोनों में अनुशासन, नियमित अभ्यास और मानसिक एकाग्रता सबसे महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि योग और संगीत दोनों ही कंपन (वाइब्रेशन) और लय (रिदम) पर आधारित हैं। जहां योग शरीर और मन की ऊर्जा को संतुलित करता है, वहीं संगीत भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम बनता है।

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