यूक्रेन युद्ध पर बदला यूरोप का रुख, मेलोनी ने पुतिन से बातचीत के दिए संकेत

यूक्रेन युद्ध पर बदला यूरोप का रुख, मेलोनी ने पुतिन से बातचीत के दिए संकेत

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए रूस से बातचीत का समर्थन किया। उनके बयान से यूरोप की नीति में बदलाव के संकेत मिले हैं और पुतिन से सीधी वार्ता की संभावना बढ़ी है।

World News: रूस यूक्रेन युद्ध को लेकर यूरोप की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरे यूरोपियन यूनियन की राजनीति और कूटनीति को नई दिशा दे दी है। मेलोनी ने साफ संकेत दिए हैं कि अब यूरोप को यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधी बातचीत शुरू करनी चाहिए। इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले समय में मेलोनी और पुतिन एक ही मंच पर शांति वार्ता करते नजर आ सकते हैं।

रूस यूक्रेन जंग पर इटली PM का बड़ा रुख

रोम में नए साल के मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जॉर्जिया मेलोनी ने कहा कि अब वक्त आ गया है जब यूरोप को सिर्फ एक पक्ष के साथ खड़े रहने की बजाय शांति की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने माना कि रूस से बातचीत के बिना यूक्रेन युद्ध को रोकना मुश्किल है।

मेलोनी ने कहा कि वह फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की राय से सहमत हैं। मैक्रों पहले ही यह सुझाव दे चुके हैं कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ दोबारा बातचीत शुरू की जानी चाहिए। मेलोनी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब यूरोप लंबे समय से युद्ध, आर्थिक दबाव और ऊर्जा संकट से जूझ रहा है।

यूरोप की भूमिका सीमित रहने की स्वीकारोक्ति

रिपोर्ट के मुताबिक, मेलोनी ने यह भी माना कि अब तक यूरोप की भूमिका इस युद्ध में सीमित रही है। इसकी बड़ी वजह यह रही कि यूरोप ने बातचीत में केवल एक पक्ष पर फोकस किया। उन्होंने कहा कि अगर शांति चाहिए तो सभी पक्षों से संवाद जरूरी है।

मेलोनी के मुताबिक, यूरोप को अब अपनी कूटनीति पर दोबारा विचार करना होगा। लगातार हथियार और प्रतिबंध समाधान नहीं हैं। बातचीत ही वह रास्ता है जिससे युद्ध रोका जा सकता है और स्थायी शांति की उम्मीद की जा सकती है।

यूक्रेन के लिए EU Special Envoy का प्रस्ताव

जल्दबाजी और किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचने के लिए जॉर्जिया मेलोनी ने एक अहम सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि रूस से बातचीत शुरू करने से पहले यूरोपियन यूनियन को यूक्रेन के लिए एक Special Envoy नियुक्त करना चाहिए।

यह पहली बार है जब यूरोपियन यूनियन के भीतर इस तरह का विचार खुलकर सामने आया है। इस Special Envoy की भूमिका रूस, यूक्रेन और यूरोपीय देशों के बीच बातचीत का सेतु बनने की होगी। इसका मकसद यह होगा कि बातचीत एकतरफा न होकर संतुलित और व्यावहारिक हो।

अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है और सभी पक्षों की सहमति बनती है, तो भविष्य में मेलोनी और पुतिन को एक ही टेबल पर शांति वार्ता करते देखना असंभव नहीं होगा।

EU में रूस को लेकर गहरे मतभेद

हालांकि मेलोनी का बयान जितना बड़ा है, उतनी ही मुश्किलें इसके रास्ते में भी हैं। यूरोपियन यूनियन के भीतर रूस को लेकर गहरे मतभेद मौजूद हैं। अभी तक EU की टॉप लीडरशिप रूस के साथ बातचीत पर एकमत नहीं हो पाई है।

बाल्टिक देश जैसे कुछ सदस्य राष्ट्र रूस के साथ किसी भी तरह की बातचीत के सख्त खिलाफ रहे हैं। इन देशों का मानना है कि पुतिन से बात करना कमजोरी का संकेत होगा। वहीं इटली और फ्रांस जैसे देश अब कूटनीतिक समाधान की बात करने लगे हैं।

ट्रंप की बयानबाजी से परेशान यूरोप

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बयानबाजी ने भी यूरोप की चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर लगातार आक्रामक बयान दे रहे हैं। उन्होंने यहां तक कहा है कि चाहे ग्रीनलैंड खरीदना पड़े या कोई और तरीका अपनाना पड़े, वह इसे हासिल किए बिना नहीं मानेंगे।

ट्रंप का तर्क है कि अगर अमेरिका ऐसा नहीं करता तो रूस और चीन ग्रीनलैंड पर कब्जा कर सकते हैं। यूरोपियन यूनियन की लीडरशिप इस बयानबाजी को लेकर पहले से ही असहज है। ऐसे में रूस यूक्रेन युद्ध और ट्रंप की नीतियों ने यूरोप को दोहरे दबाव में डाल दिया है।

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