उत्तराखंड में नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़ा महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। केंद्र सरकार ने EPFO में अनिवार्य कवरेज के लिए निर्धारित मासिक वेतन सीमा को 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया है। नई व्यवस्था के बाद उत्तराखंड में करीब 40 हजार अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के दायरे में आने की उम्मीद है। इससे पात्र कर्मचारियों को नियमित भविष्य निधि बचत के साथ कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा योजना (EDLI) के तहत सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा।
केंद्र सरकार ने 16 सितंबर 2026 को EPFO की अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा बढ़ाने का फैसला घोषित किया था। 17 सितंबर को केंद्र सरकार की ओर से जारी जानकारी में बताया गया कि अनिवार्य कवरेज की सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। सरकार के अनुसार, देशभर में इस बदलाव से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी EPFO की अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल हो सकते हैं।
यह सीमा वर्ष 2014 में 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये की गई थी। करीब 12 वर्ष बाद इसमें फिर बदलाव किया गया है।
उत्तराखंड में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी हैं, जिनका वेतन पहले निर्धारित 15 हजार रुपये की सीमा से अधिक था। वेतन और EPFO की अनिवार्य कवरेज सीमा के बीच अंतर के कारण ऐसे कर्मचारी इस व्यवस्था में स्वतः शामिल नहीं हो पाते थे। अब 15 हजार से 25 हजार रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले पात्र कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग EPFO के सामाजिक सुरक्षा दायरे में आ सकेगा।
क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-1 वीवीबी सिंह के अनुसार, उत्तराखंड में करीब 40 हजार अतिरिक्त कर्मचारियों को इस बदलाव का लाभ मिलने की संभावना है।
नई व्यवस्था के तहत पात्र कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि में नियमित बचत का प्रावधान लागू होगा। नौकरी के दौरान कर्मचारी और नियोक्ता की ओर से नियमानुसार अंशदान जमा होने से कर्मचारी के लिए दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा तैयार होती है।
इसके साथ ही लागू नियमों के अनुसार कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत पेंशन संबंधी सामाजिक सुरक्षा और EDLI के तहत बीमा कवरेज भी जुड़ता है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई सीमा के तहत आने वाले कर्मचारियों को PF बचत, EPS पेंशन और EDLI बीमा कवर योजना के प्रावधानों के अनुसार मिलेगा।
25 हजार रुपये की नई सीमा EPFO में अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर कर्मचारी को तुरंत 25 हजार रुपये के वेतन के आधार पर इतनी ही राशि की पेंशन मिलने लगेगी।
पेंशन का वास्तविक लाभ कर्मचारी की पात्रता, पेंशन योग्य सेवा, योगदान और कर्मचारी पेंशन योजना के लागू नियमों के आधार पर निर्धारित होगा। नई सीमा से अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आने का अवसर मिलेगा, जबकि पेंशन की राशि प्रत्येक कर्मचारी की सेवा और लागू गणना व्यवस्था पर निर्भर करेगी।
EPFO के फैसले का असर केवल सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन तक सीमित नहीं है। PF खाते में होने वाली नियमित बचत कर्मचारी के लिए नौकरी के वर्षों के दौरान तैयार होने वाला दीर्घकालिक वित्तीय आधार भी बनाती है।
बीमा सुरक्षा कर्मचारी की मृत्यु जैसी परिस्थितियों में पात्र परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था से जुड़ी होती है। नई वेतन सीमा बढ़ने से पात्र कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थेच्या विविध भागांशी जोडले जाण्याची संधी मिळेल.
देहरादून स्थित EPFO क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से नियोक्ताओं से अपील की गई है कि संशोधित वेतन सीमा के अनुसार पात्र हो चुके कर्मचारियों को EPFO में शामिल कराया जाए और उनके अंशदान को नियमानुसार जमा किया जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नई सीमा का लाभ पात्र कर्मचारियों को वास्तविक रूप से PF, पेंशन और बीमा सुरक्षा व्यवस्था में मिले।
EPFO के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में उत्तराखंड क्षेत्र में करीब 9,744 योगदान करने वाले प्रतिष्ठान और 7.74 लाख से अधिक योगदान करने वाले सदस्य EPFO के दायरे में थे।
नई वेतन सीमा से प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा कवरेज का दायरा और बढ़ने की संभावना है। खासकर उन प्रतिष्ठानों और कर्मचारियों के लिए यह बदलाव लागू होगा, जहां वेतन पहले की 15 हजार रुपये की सीमा से ऊपर था, लेकिन अब 25 हजार रुपये की नई सीमा के भीतर आता है।
EPFO की ओर से रोजगार के औपचारिकीकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार की प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना का उद्देश्य अतिरिक्त रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के साथ नए कर्मचारियों को संगठित रोजगार और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना है।
उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में इस योजना की पहली किस्त के दौरान पात्र कर्मचारियों और नियोक्ताओं को करीब 19 करोड़ रुपये की राशि वितरित किए जाने की जानकारी क्षेत्रीय EPFO अधिकारियों ने दी है।
EPFO की ओर से कर्मचारी नामांकन अभियान-2026 भी चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे पात्र कर्मचारियों को EPFO कवरेज में लाना है, जो अब तक किसी कारण से इस व्यवस्था से बाहर रह गए हैं।
अभियान के तहत नियोक्ताओं को कुछ शर्तों के साथ पात्र कर्मचारियों का पूर्व प्रभाव से नामांकन कराने का अवसर दिया जा रहा है। EPFO देहरादून के अनुसार, यह अभियान 31 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध है।
EPFO की ओर से बकाया भुगतान और पुराने विवादों के समाधान को लेकर भी कदम उठाए जा रहे हैं। देहरादून क्षेत्रीय कार्यालय में ‘विश्वास योजना’ के तहत अब तक 70 लाख रुपये से जुड़े 54 आवेदन प्राप्त होने की जानकारी दी गई है।
इस योजना के तहत EPF बकाया के विलंबित भुगतान से संबंधित कुछ मामलों में दंडात्मक नुकसान को कम करने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य पुराने मामलों के निपटारे में तेजी लाना और नियोक्ताओं को लंबित EPF देनदारियों को नियमित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
केंद्र सरकार के मुताबिक, पूरे देश में EPFO की अनिवार्य कवरेज सीमा बढ़ाने से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ सकते हैं। सरकार का अनुमान है कि इस बदलाव से सरकारी खर्च में भी वृद्धि होगी, क्योंकि अतिरिक्त कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल करने के लिए बजटीय सहायता की जरूरत होगी।
केंद्र ने इसके लिए लगभग 11,339 करोड़ रुपये के वार्षिक सरकारी व्यय का अनुमान बताया है, जबकि मौजूदा बजटीय सहायता करीब 10,250 करोड़ रुपये है। पांच वर्षों में अनुमानित अतिरिक्त खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपये बताया गया है।
उत्तराखंड के करीब 40 हजार कर्मचारियों का संभावित रूप से इस दायरे में आना प्रदेश के औपचारिक रोजगार क्षेत्र के लिए बदलाव है। अब तक जिन कर्मचारियों की मासिक मजदूरी या वेतन 15 हजार रुपये से ऊपर होने के कारण अनिवार्य EPFO कवरेज लागू नहीं होता था, उनमें से नई सीमा के भीतर आने वाले पात्र कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा ढांचे से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
इससे कर्मचारियों को नौकरी के दौरान बचत और भविष्य में सेवानिवृत्ति सुरक्षा के लिए संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध होगी।
25 हजार रुपये की संशोधित सीमा के भीतर आने वाले कर्मचारियों को अपने नियोक्ता से EPFO कवरेज और पात्रता की स्थिति की जानकारी लेने की आवश्यकता होगी। यदि कोई कर्मचारी संशोधित सीमा के भीतर आता है और संबंधित प्रतिष्ठान EPFO के दायरे में है, तो नियोक्ता को नियमानुसार उसकी सदस्यता और अंशदान की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
EPFO अधिकारियों ने नियोक्ताओं से पात्र कर्मचारियों को नई सीमा के अनुसार जोड़ने और समय पर अंशदान जमा करने की अपील की है।
नई व्यवस्था के तहत पात्र कर्मचारियों को PF बचत, EPS के तहत पेंशन संबंधी सुरक्षा और EDLI के तहत बीमा कवरेज का लाभ योजना के नियमों के अनुसार मिल सकेगा। 15 हजार रुपये पर स्थिर रही अनिवार्य कवरेज सीमा को 25 हजार रुपये किए जाने से प्रदेश में संगठित रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों की संख्या बढ़ने की संभावना है।










