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Haridwar Dharma Sansad: तीन दिवसीय धर्म संसद स्थगित, हरिद्वार प्रशासन ने लगाई रोक

Haridwar Dharma Sansad: तीन दिवसीय धर्म संसद स्थगित, हरिद्वार प्रशासन ने लगाई रोक
अंतिम अपडेट: 19-12-2024

हरिद्वार में आज से शुरू होने वाली तीन दिवसीय धर्म संसद को प्रशासन ने मंजूरी नहीं दी। जूना अखाड़े में लगे तंबू हटाए गए, जिससे यति नरसिंहानंद नाराज हैं। पुलिस ने 2021 की विवादित धर्म संसद को ध्यान में रखते हुए सतर्कता बढ़ा दी है।

Haridwar Dharma Sansad: हरिद्वार के जूना अखाड़े में 19 से 21 दिसंबर तक होने वाली धर्म संसद को प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं दी गई है। इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने पहले ही स्थिति स्पष्ट कर दी थी कि कार्यक्रम में हेट स्पीच या विवादित बयानों को अनुमति नहीं दी जाएगी। आयोजन स्थल पर नोटिस चस्पा कर टेंट और पंडाल हटवा दिए गए हैं। स्वामी यति नरसिंहानंद ने इस धर्म संसद का आयोजन किया था, जिसे लेकर पुलिस प्रशासन पहले से ही सतर्क था। पिछले विवादित बयानों के कारण प्रशासन ने इस बार कोई जोखिम उठाने की योजना नहीं बनाई।

यति नरसिंहानंद की नाराजगी

स्वामी यति नरसिंहानंद ने प्रशासन के इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जो भी कहा है, वह कुरान में लिखा है। यदि उनकी बातों में कुछ भी गलत है, तो वह फांसी की सजा भुगतने के लिए तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन उन्हें जानबूझकर प्रताड़ित कर रहा है और उनकी धर्म संसद को रोकने की कोशिश कर रहा है। स्वामी नरसिंहानंद ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सिर्फ बांग्लादेश और पाकिस्तान में हो रहे हिंदू अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाना है।

सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च का ऐलान

स्वामी यति नरसिंहानंद ने 21 दिसंबर को जूना अखाड़े से सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च करने की घोषणा की है। उनका कहना है कि वह यह सवाल उठाएंगे कि क्या उन्हें हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ बोलने का अधिकार मिलना चाहिए या नहीं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में अगर कोई हिंदू मारा जाता है तो क्या उन्हें उस पर रोने का अधिकार नहीं है। इस पैदल मार्च के माध्यम से वह इस मुद्दे को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास करेंगे।

सशर्त अनुमति का प्रस्ताव और निरस्तीकरण

एसडीएम अजयवीर सिंह ने बताया कि धर्म संसद के आयोजन को लेकर प्रशासन ने पहले सशर्त अनुमति देने पर चर्चा की थी। इस शर्त में कार्यक्रम में हेट स्पीच से बचने का निर्देश शामिल था। लेकिन अंतिम समय में प्रशासन ने अनुमति को निरस्त कर दिया। बावजूद इसके आयोजन स्थल पर तैयारी शुरू कर दी गई थी, जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए तंबू और पंडाल हटा दिए। इस निर्णय का उद्देश्य किसी भी संभावित विवादित स्थिति को टालना था।

2021 की विवादित धर्म संसद का प्रभाव

प्रशासन का यह कड़ा रुख 2021 में हुई धर्म संसद के विवादित बयानों के कारण देखा जा रहा है। उस समय स्वामी यति नरसिंहानंद सहित कई संतों पर हेट स्पीच के मामले दर्ज हुए थे। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। इस बार भी प्रशासन किसी भी प्रकार की स्थिति को रोकने के लिए पहले से सतर्क है।

मुख्यमंत्री को पत्र भेजा

स्वामी यति नरसिंहानंद ने पुलिस अधिकारियों पर धमकाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि उन्हें कार्यक्रम की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि अगर उन्हें इस मंच से अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जाएगा, तो वह न्याय के लिए और अधिक कठिन उपायों की ओर जाएंगे।

हिंदुओं पर अत्याचार का मुद्दा

यति नरसिंहानंद ने बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के मुद्दे पर तीन दिवसीय विश्व धर्म संसद का आयोजन बुलाने का आह्वान किया था। इस कार्यक्रम में उनके अनुयायी और कई अन्य संतों के शामिल होने की संभावना थी। इस धर्म संसद के माध्यम से वह वैश्विक मंच पर इस मुद्दे को उठाने की योजना बना रहे थे।

पुलिस की सतर्कता

आयोजन स्थल पर एहतियातन पुलिस तैनात कर दी गई है। अधिकारियों ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी विवादित बयानबाजी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि इस बार कोई भी जोखिम नहीं लिया जाएगा ताकि हिंसा या किसी भी प्रकार की अनिश्चितता से बचा जा सके।

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