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सावधान! ChatGPT का ज्यादा इस्तेमाल कर सकता है मानसिक स्वास्थ्य पर असर, रिसर्च में बड़ा खुलासा

सावधान! ChatGPT का ज्यादा इस्तेमाल कर सकता है मानसिक स्वास्थ्य पर असर, रिसर्च में बड़ा खुलासा
अंतिम अपडेट: 24-03-2025

आजकल ChatGPT जैसे AI चैटबॉट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। यह तकनीक कई कामों को आसान बना रही है, लेकिन इसका ज्यादा इस्तेमाल कुछ खतरों को भी जन्म दे सकता है। हाल ही में एक स्टडी में यह सामने आया है कि ChatGPT के ज्यादा इस्तेमाल से अकेलापन बढ़ सकता है और लोग सामाजिक मेलजोल से दूर हो सकते हैं। चलिए जानते हैं इस स्टडी से जुड़े प्रमुख बिंदुओं के बारे में।

चैटबॉट्स के बढ़ते इस्तेमाल से बढ़ता अकेलापन

OpenAI और MIT द्वारा की गई एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो लोग रोजाना ChatGPT जैसे चैटबॉट्स के साथ ज्यादा समय बिताते हैं, वे भावनात्मक रूप से इस पर निर्भर होने लगते हैं। परिणामस्वरूप, उन्हें वास्तविक जीवन में सामाजिक मेलजोल में परेशानी होती है और वे अकेलापन महसूस करने लगते हैं। रिसर्च में यह पाया गया कि इन चैटबॉट्स के उपयोगकर्ता अपने मानव रिश्तों में कम भावनात्मक जुड़ाव महसूस करते हैं, जिससे वे और भी अकेला महसूस करने लगते हैं।

चैटबॉट्स का मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

चैटबॉट्स, जैसे कि ChatGPT, युवाओं और मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। हालांकि, उनकी मानसिक स्थिति पर इनका असर गंभीर हो सकता है। रिसर्चर ने यह पाया कि जो लोग इन चैटबॉट्स के साथ ज्यादा समय बिताते हैं, वे अपनी भावनाओं को समझने और व्यक्त करने में कठिनाई महसूस करते हैं। इसके परिणामस्वरूप, उन्हें अकेलेपन और सामाजिक अलगाव का सामना करना पड़ सकता है।

कभी-कभी AI से जुड़ी चिंताएं और जोखिम

हाल ही में एक अन्य मामले में बच्चों के चैटबॉट्स के द्वारा आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप भी सामने आया था। यह घटना इस बात का सबूत है कि चैटबॉट्स का अत्यधिक उपयोग और उनकी क्षमता लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। हालांकि, रिसर्चर्स का कहना है कि इस प्रकार के मामलों में पूरी तरह से निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।

चैटबॉट्स और मानसिक परेशानी के बीच रिश्ता

मनोवैज्ञानिकों और रिसर्चर्स के मुताबिक, चैटबॉट्स का उपयोग मानसिक परेशानी से जूझ रहे लोगों के लिए एक अस्थायी राहत का साधन हो सकता है, लेकिन लंबे समय में यह और भी बड़ी समस्याएं पैदा कर सकता है। जब लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से भावनात्मक संबंध स्थापित करने लगते हैं, तो वे वास्तविक रिश्तों की जगह नहीं ले सकते। इस तकनीक का अधिक इस्तेमाल सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

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