Columbus

ELSS में गिरावट! टैक्स सेविंग स्कीम से क्यों हट रहे निवेशक?

🎧 Listen in Audio
0:00

बजट के बाद ELSS में निवेश सुस्त पड़ा है। नए टैक्स रिजीम के चलते निवेशकों का रुझान घटा, लेकिन लॉन्ग टर्म ग्रोथ के लिए यह अब भी बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

वित्त वर्ष 2024-25 समाप्त होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं। आमतौर पर, जनवरी से मार्च के बीच टैक्स सेविंग के उद्देश्यों से ELSS फंड्स में निवेश बढ़ता है, लेकिन इस बार इसके इनफ्लो में गिरावट देखी गई है। फरवरी 2025 में इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) फंड्स में मात्र ₹615 करोड़ का इनफ्लो आया, जबकि जनवरी में यह ₹797 करोड़ था। यह गिरावट निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं और नए टैक्स रिजीम के प्रभाव को दर्शाती है।

ELSS निवेश में गिरावट की वजह क्या?

वित्तीय विशेषज्ञ मानते हैं कि ELSS में निवेश घटने का मुख्य कारण सरकार द्वारा पेश किया गया नया टैक्स रिजीम है। नए टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री रखी गई है, जिससे पारंपरिक टैक्स सेविंग टूल्स का आकर्षण कम हुआ है। अधिकतर करदाता अब सरल और छूट रहित टैक्स सिस्टम को अपनाने लगे हैं, जिससे ELSS की मांग घटी है।

बजट के बाद ELSS में क्यों आई सुस्ती?

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2025 में ELSS फंड्स में निवेश मात्र ₹615 करोड़ रहा, जो जनवरी 2025 में आए ₹797 करोड़ की तुलना में कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए टैक्स रिजीम को अधिक आकर्षक बनाए जाने के कारण निवेशकों ने पारंपरिक टैक्स बचत विकल्पों से दूरी बनानी शुरू कर दी है।

मिराए एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) की हेड ऑफ डिस्ट्रीब्यूशन एंड स्ट्रैटेजिक अलायंसेस, सुरंजना बोर्थाकुर का कहना है कि जनवरी से मार्च के बीच आमतौर पर ELSS फंड्स में निवेश बढ़ता है, लेकिन इस बार इनफ्लो अपेक्षाकृत कम रहा। उनका मानना है कि नए टैक्स रिजीम के कारण निवेश प्रभावित हुआ है, हालांकि लॉन्ग टर्म निवेश के लिए ELSS अभी भी एक बेहतर विकल्प है।

क्या ELSS में निवेश का दौर खत्म हो रहा है?

बजाज फिनसर्व एसेट मैनेजमेंट कंपनी के सीनियर फंड मैनेजर सौरभ गुप्ता के अनुसार, आयकर अधिनियम, 1961 के सेक्शन 80C के तहत मिलने वाला डिडक्शन ELSS के लिए सबसे बड़ा आकर्षण रहा है। हालांकि, अब ज्यादा करदाता नए टैक्स रिजीम की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे ELSS की लोकप्रियता कम हो रही है।

हालांकि, ELSS का तीन साल का अनिवार्य लॉक-इन पीरियड निवेशकों को अनुशासन सिखाने में मदद करता है और लॉन्ग टर्म निवेश को बढ़ावा देता है। नए निवेशकों के लिए, जो पहली बार बाजार में गिरावट और उतार-चढ़ाव का अनुभव कर रहे हैं, यह एक स्थिर और फायदेमंद निवेश विकल्प साबित हो सकता है।

ELSS क्या है और यह कैसे काम करता है?

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) एक म्युचुअल फंड है, जो अपने फंड का अधिकांश हिस्सा इक्विटी और इक्विटी से जुड़े फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करता है। यह आयकर अधिनियम, 1961 के सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट प्रदान करने वाला एकमात्र म्युचुअल फंड स्कीम है।

अन्य म्युचुअल फंड स्कीम्स के विपरीत, ELSS का अनिवार्य लॉक-इन पीरियड 3 वर्ष होता है, यानी आप तीन साल से पहले इसे रिडीम नहीं कर सकते। हालांकि, अन्य टैक्स सेविंग निवेश विकल्पों की तुलना में ELSS का लॉक-इन पीरियड सबसे कम है, जिससे यह टैक्स सेविंग फंड के रूप में लोकप्रिय बना हुआ है।

Leave a comment