हिमाचल प्रदेश में अगले एक हफ्ते तक बारिश की कोई संभावना नहीं है। अक्टूबर में सूखे जैसी स्थिति बनी रही, और नवंबर में भी बारिश के अभाव ने फसलों के लिए खतरा पैदा कर दिया है। फिलहाल, रबी फसलों की बिजाई केवल 5% क्षेत्र में हुई है। वहीं, शिमला में कल्पा की तुलना में अधिक ठंड महसूस की जा रही है। मनाली-लेह, जंस्कार और काजा मार्ग पर पानी जमने से यात्रा भी जोखिमपूर्ण हो गई है।
शिमला: मौसम विभाग के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में अगले एक सप्ताह तक वर्षा की कोई संभावना नहीं है। 2020 के बाद से अक्टूबर में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। इस बार अक्टूबर में ऊना में केवल आठ और मंडी में तीन मिलीमीटर वर्षा हुई, जबकि अन्य स्थानों पर कोई वर्षा नहीं हुई। नवंबर में भी ऐसी स्थिति बनी रहने से फसलों पर संकट उत्पन्न हो सकता है। इसके अलावा, शुष्क ठंड के कारण लोग बीमार भी पड़ रहे हैं।
हिमाचल में रबी फसलों की बिजाई में कमी, तापमान में गिरावट
प्रदेश में अब तक केवल पांच प्रतिशत क्षेत्र में रबी फसलों की बिजाई हो पाई है, जो बारिश की कमी से प्रभावित है। हालांकि, जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहां स्थिति बेहतर है।
शुक्रवार को धूप खिलने के बावजूद, अधिकतर स्थानों पर अधिकतम तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट देखी गई। नारकंडा में तापमान 3.9, कल्पा में 2.8 और हमीरपुर में 2.7 डिग्री गिरा है। न्यूनतम तापमान में भी एक से दो डिग्री सेल्सियस की कमी आई है।
हिमाचल प्रदेश में तापमान की जानकारी (डिग्री सेल्सियस)
स्थान न्यूनतम अधिकतम
शिमला 11.2 22.1
सुंदरनगर 8.9 29.4
धर्मशाला 15.3 27.0
ऊना 11.5 32.0
नाहन 15.9 26.8
केलंग 2.3 19.5
सोलन 10.5 28.0
शिमला में बढ़ी ठंड, कल्पा की तुलना में अधिक
इन दिनों शिमला में तापमान कल्पा से अधिक ठंडा हो गया है। शिमला का अधिकतम तापमान 22.1 डिग्री सेल्सियस है, जिसमें एक डिग्री की गिरावट आई है, जबकि कल्पा में अधिकतम तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस है, जो 2.8 डिग्री बढ़ा है।
मनाली-लेह मार्ग पर बर्फबारी की कमी से पानी जमने से सफर हुआ जोखिम भरा
मनाली-लेह, जंस्कार और काजा मार्ग पर वाहनों की गति धीमी हो गई है। हालांकि रोहतांग और बारालाचा दर्रे में हिमपात नहीं हुआ है, लेकिन तापमान गिरने के कारण पानी जमने लगा है। इस वजह से लेह मार्ग के बारालाचा, जंस्कार के शिंकुला और काजा के कुंजुम दर्रे पर यात्रा करना खतरनाक हो गया है।
परिवहन निगम ने इन मार्गों पर सेवाएं बंद कर दी हैं, जबकि छोटे वाहनों की आवाजाही जारी है, लेकिन पानी जमा होने से यात्रा करना जोखिम भरा हो गया है। मौसम साफ होने के कारण रोहतांग दर्रे और स्पीति के कुंजम दर्रे में वाहन चलाने में कोई समस्या नहीं आ रही है।
सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने बताया कि मनाली-सरचू, मनाली-जंस्कार और मनाली-काजा मार्ग पर मरम्मत कार्य जारी है, लेकिन गिरते तापमान के कारण दर्रों में काम धीमा हो गया है। लेह से मनाली पहुंचे वाहन चालकों ने बताया कि सरचू, बारालाचा और भरतपुर के बीच सड़क पर बहने वाला पानी जमने लगा है।