2500 फ्लाइट देरी पर SC सख्त! लेकिन तत्काल सुनवाई से किया इनकार, सरकार पर जताया भरोसा

IndiGo फ्लाइट देरी और कैंसिलेशन पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया। अदालत ने कहा कि सरकार पहले ही कदम उठा चुकी है, इसलिए अभी अर्जेंसी नहीं दिखती।

IndiGo फ्लाइट देरी पर दायर याचिका की तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार किया। अदालत ने कहा कि सरकार पहले ही स्थिति संभाल रही है, इसलिए अभी अर्जेंसी नहीं है। देशभर में 2500 से अधिक उड़ानों की देरी से यात्री परेशान हुए।

New Delhi: सुप्रीम कोर्ट में एयरलाइन संकट से जुड़ी याचिका का उल्लेख एक वकील ने किया, जिसमें बताया गया कि देशभर के 95 एयरपोर्ट्स पर लगभग 2500 फ्लाइट्स देरी से चलीं। वकील ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग फंस गए हैं और उन्हें गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

लेकिन चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि स्थिति को देखते हुए चिंता समझ में आती है, पर सरकार पहले ही इस मुद्दे पर ध्यान दे चुकी है। उन्होंने कहा कि कई लोग अर्जेंट काम से यात्रा कर रहे होंगे, उन्हें असुविधा हुई है, लेकिन सरकार ने समय रहते कदम उठाए हैं। इसलिए अदालत को अभी कोई ‘अर्जेंसी’ दिखाई नहीं देती।

देरी और कैंसिलेशन पर विवाद

एयरलाइन में जारी संकट के बीच कई जगह फ्लाइट ऑपरेशंस प्रभावित हुए। वकील ने बताया कि लगभग 2500 उड़ानों में बड़ी देरी दर्ज की गई, जिसके कारण लाखों यात्रियों की यात्रा बाधित हुई।

हाल ही में IndiGo की कई कमर्शियल पैसेंजर फ्लाइट्स या तो रद्द कर दी गईं या घंटों देरी से उड़ान भरी। इस स्थिति ने यात्रियों को न सिर्फ परेशानी दी बल्कि कई लोगों की महत्वपूर्ण यात्राएँ भी प्रभावित हुईं। देश के कई हवाई अड्डों पर यात्रियों की लंबी कतारें और शिकायतें सामने आईं।

याचिका में कहा गया कि जिस स्तर पर उड़ानें प्रभावित हुईं, उसे देखते हुए अदालत को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि यात्रियों को राहत मिल सके और एयरलाइन पर उचित जिम्मेदारी तय हो सके।

CJI की टिप्पणी

चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत स्थिति से अनजान नहीं है। देशभर में उड़ानों के प्रभावित होने का असर लाखों लोगों पर पड़ता है। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया और शिकायत पोर्टल्स पर अपनी समस्याएं दर्ज कराई हैं।

लेकिन अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब सरकार स्वयं इस मामले को देख रही है और कदम उठा रही है, तब तत्काल सुनवाई करने का सीधा कारण नहीं दिखता। न्यायालय ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर जो समाधान संभव है, वह सरकार के पास है। अदालत केवल तभी तत्काल हस्तक्षेप करेगी, जब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो या यात्रियों के अधिकारों का सीधा उल्लंघन हो रहा हो।

दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका

इस बीच मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है। हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें केंद्र सरकार और एयरलाइन को यात्रियों की सहायता करने और उचित धन-वापसी (Refund) सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि जिन यात्रियों की उड़ानें रद्द हुईं या कई घंटे देरी से चलीं, उन्हें या तो पूरा रिफंड दिया जाए या उनकी यात्रा का वैकल्पिक प्रबंध किया जाए। याचिकाकर्ता ने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में लोग उड़ान पर निर्भर करते हैं, ऐसे में एयरलाइन द्वारा बार-बार कैंसिलेशन और देरी गंभीर मुद्दा बन गया है।

हाईकोर्ट ने इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई तय की है। अदालत यह देखेगी कि क्या यात्रियों को राहत देने और एयरलाइन पर जिम्मेदारी तय करने के लिए कोई दिशा-निर्देश आवश्यक हैं।

सरकार का हस्तक्षेप

केंद्र सरकार पहले ही एयरलाइन संचालन में आ रही दिक्कतों को लेकर जानकारी जुटा रही है। अधिकारियों ने एयरलाइन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है कि किन कारणों से उड़ानें समय पर संचालित नहीं हो पा रही हैं और किस तरह यात्रियों को राहत दी जा सकती है।

सरकार के हस्तक्षेप के कारण ही सुप्रीम कोर्ट ने इसे प्रशासनिक मामला बताया और कहा कि फिलहाल त्वरित न्यायिक हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता। अदालत का मानना है कि जब सरकार स्वयं स्थिति में सुधार करने में लगी है, तब पहले उसे समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने देनी चाहिए।

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