Juniper Research की रिपोर्ट के मुताबिक 6G की शुरुआत अमेरिका और साउथ कोरिया से हो सकती है। 2030 तक चीन सबसे बड़ा 6G मार्केट बनेगा, जबकि टॉप-9 देशों की सूची में भारत को जगह नहीं मिली है।
Tech: दुनियाभर में 6G तकनीक को लेकर रिसर्च और तैयारियां तेज हो गई हैं। Juniper Research की नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 6G नेटवर्क की शुरुआती शुरुआत अमेरिका और साउथ कोरिया से होगी, जबकि 2030 तक चीन दुनिया का सबसे बड़ा 6G मार्केट बन सकता है। हालांकि टॉप-9 देशों की सूची में भारत शामिल नहीं है।
6G को लेकर दुनिया में बढ़ी तैयारी
5G के विस्तार के बीच अब दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां और टेलीकॉम संस्थाएं 6G तकनीक पर तेजी से काम कर रही हैं। माना जा रहा है कि 6G आने के बाद इंटरनेट स्पीड और नेटवर्क क्षमता में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

रिसर्च फर्म Juniper Research की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2029 तक दुनिया में 6G कनेक्शंस की संख्या करीब 46 लाख तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 6G नेटवर्क की शुरुआती कमर्शियल शुरुआत अमेरिका और साउथ कोरिया से होने की संभावना है।
2030 तक चीन बन सकता है सबसे बड़ा 6G मार्केट
रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक चीन दुनिया का सबसे बड़ा 6G मार्केट बनकर उभरेगा। इसके बाद अमेरिका और कनाडा का स्थान रहेगा। चीन पहले से ही 6G रिसर्च, सैटेलाइट नेटवर्क और एडवांस टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रहा है।
टॉप-9 संभावित 6G मार्केट देशों में चीन, अमेरिका, कनाडा, जापान, ब्रिटेन, साउथ कोरिया, सऊदी अरब, फ्रांस और कतर शामिल हैं। इस सूची में भारत का नाम नहीं है, हालांकि रिपोर्ट में भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया है।
भारत की क्या होगी भूमिका?
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, जर्मनी और UAE जैसे देश 6G तकनीक के विकास और विस्तार में अहम भूमिका निभाएंगे। भारत सरकार पहले ही स्वदेशी 6G तकनीक और टेलीकॉम रिसर्च को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।
India में 6G विजन को लेकर कई स्तर पर काम चल रहा है। सरकार और निजी कंपनियां मिलकर भविष्य की नेटवर्क तकनीकों पर रिसर्च कर रही हैं। आने वाले वर्षों में भारत 6G डिवाइस, नेटवर्क डेवलपमेंट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा योगदान दे सकता है।
6G के साथ आएंगी नई तकनीकें
रिपोर्ट के अनुसार, 6G सिर्फ तेज इंटरनेट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई नई तकनीकों को साथ लेकर आएगा। इनमें टेराहर्ट्ज स्पेक्ट्रम, AI-नेटिव नेटवर्क्स और इंटीग्रेटेड सेंसिंग एंड कम्युनिकेशन जैसी तकनीकें शामिल हैं।
AI-नेटिव नेटवर्क्स ऐसे स्मार्ट नेटवर्क होंगे जो खुद को ऑटोमैटिक मैनेज कर सकेंगे। वहीं ISAC तकनीक नेटवर्क को डेटा ट्रांसफर के साथ-साथ आसपास की चीजों को पहचानने की क्षमता भी दे सकती है।
इसके अलावा नॉन-टेरेस्ट्रियल नेटवर्किंग के जरिए सैटेलाइट आधारित कनेक्टिविटी को और मजबूत बनाया जा सकता है, जिससे दूरदराज इलाकों में भी बेहतर नेटवर्क उपलब्ध हो सकेगा।
2030 तक तय हो सकता है 6G का फाइनल स्टैंडर्ड
फिलहाल 6G किस तकनीकी मानक पर काम करेगा, इसे लेकर अंतिम फैसला होना बाकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक इसके स्टैंडर्ड तय किए जा सकते हैं।
दुनियाभर में मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस (MWC) जैसे बड़े टेक इवेंट्स में 6G पर चर्चा शुरू हो चुकी है। वहीं Qualcomm जैसी कंपनियां 6G सपोर्टेड डिवाइस और नेटवर्क टेक्नोलॉजी पर काम कर रही हैं। माना जा रहा है कि 2028 के आसपास शुरुआती 6G डिवाइस और नेटवर्क टेस्टिंग देखने को मिल सकती है।












