LIVE95 साल की मां को कांवड़ पर लेकर निकला बेटा: काशी विश्वनाथ में 3 किमी लंबी लाइन, बरेली में हेलिकॉप्टर से फूल बरसाए गए

सावन सोमवार पर 95 साल की मां को कांवड़ पर लेकर बेटा निकला। काशी विश्वनाथ में 3 किमी लंबी कतार लगी, बरेली में हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा हुई।
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सावन के सोमवार पर उत्तर प्रदेश के शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंदिर में दर्शन के लिए लाइन करीब 3 किलोमीटर तक पहुंच गई। इस बीच एक श्रद्धालु की भक्ति और मातृसेवा ने लोगों का ध्यान खींचा, जो अपनी 95 साल की मां को कांवड़ पर बैठाकर यात्रा पर निकला।

सावन के सोमवार को भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों का रुख करते हैं। इस दौरान कई भक्त पैदल कांवड़ यात्रा पूरी करते हैं। लेकिन 95 साल की मां को कांवड़ पर लेकर निकलने वाले बेटे की तस्वीर और कहानी आस्था के साथ-साथ मां-बेटे के रिश्ते को भी सामने लाती है।

बुजुर्ग मां को कांवड़ पर लेकर चलना सामान्य यात्रा से बिल्कुल अलग है। बेटे के लिए यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि अपनी मां की आस्था और इच्छा को पूरा करने से जुड़ा भावनात्मक प्रयास भी माना जा रहा है। मां कांवड़ में बैठीं और बेटा उन्हें लेकर भगवान शिव के दर्शन के लिए आगे बढ़ता रहा।

सावन के दौरान कांवड़ यात्रा में बड़ी संख्या में शिवभक्त शामिल होते हैं। कई श्रद्धालु लंबी दूरी पैदल तय करके शिवालयों तक पहुंचते हैं। रास्ते में बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते हैं। ऐसे माहौल में 95 साल की मां को कांवड़ पर लेकर चलने वाले बेटे ने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।

उधर, वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम में भी भक्तों की भारी भीड़ रही। बाबा के दर्शन के लिए करीब 3 किलोमीटर लंबी कतार लगी। दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। सावन सोमवार के कारण मंदिर और आसपास के क्षेत्र में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही बढ़ गई।

काशी विश्वनाथ में सावन के सोमवार का विशेष महत्व है। गंगा स्नान और जल लेकर बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक की परंपरा के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु वाराणसी पहुंचते हैं। सोमवार के दिन भीड़ बढ़ने के कारण दर्शन व्यवस्था को संभालना प्रशासन और मंदिर प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।

लंबी कतार के बावजूद श्रद्धालुओं में उत्साह बना रहा। लोग हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। कतार में महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे भी शामिल रहे। कई श्रद्धालु घंटों इंतजार के बाद बाबा के दर्शन करने की उम्मीद में खड़े रहे।

काशी विश्वनाथ धाम में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए बैरिकेडिंग और निर्धारित रास्तों का इस्तेमाल किया गया। सावन के दौरान मंदिर क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं।

इस बीच बरेली में भी सावन सोमवार को लेकर विशेष धार्मिक आयोजन देखने को मिला। यहां श्रद्धालुओं और कांवड़ियों पर हेलिकॉप्टर से फूलों की बारिश की गई। आसमान से फूल बरसने का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। पुष्पवर्षा के दौरान भक्तों में उत्साह देखने को मिला और धार्मिक माहौल और भी भक्तिमय हो गया।

सावन सोमवार पर उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। कई मंदिरों को फूलों से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की।

कांवड़ यात्रा के दौरान सेवा शिविर भी लगाए जाते हैं। कई स्थानों पर स्थानीय लोग कांवड़ियों और श्रद्धालुओं के लिए पानी, भोजन और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। सावन के दौरान धार्मिक आस्था के साथ सेवा और सामाजिक सहयोग का भी माहौल दिखाई देता है।

95 साल की मां को कांवड़ पर लेकर चलने वाले बेटे की कहानी इसी आस्था और पारिवारिक भावनाओं को सामने लाती है। उम्र बढ़ने के कारण बुजुर्ग व्यक्ति के लिए लंबी पैदल यात्रा करना मुश्किल होता है। ऐसे में बेटे ने अपनी मां को यात्रा में शामिल करने के लिए उन्हें कांवड़ पर बैठाकर आगे बढ़ने का रास्ता चुना।

यह दृश्य उन श्रद्धालुओं के लिए भी भावुक करने वाला रहा, जिन्होंने मां-बेटे को यात्रा करते देखा। लोगों के लिए यह केवल कांवड़ यात्रा नहीं, बल्कि मां के प्रति बेटे के समर्पण और सम्मान की तस्वीर भी बन गई।

सावन के सोमवार पर मंदिरों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं से संयम बरतने की अपील की जाती है। लंबी कतार में खड़े लोगों को धैर्य रखने और सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करने की जरूरत होती है। खासकर बुजुर्गों और बच्चों के साथ आने वाले परिवारों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।

काशी विश्वनाथ में तीन किलोमीटर लंबी कतार इस बात का संकेत है कि सावन सोमवार पर बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में कितना उत्साह है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग काशी पहुंच रहे हैं और भगवान शिव के दर्शन कर अपनी मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना कर रहे हैं।

बरेली में हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा ने भी सावन के धार्मिक उत्साह को और बढ़ा दिया। फूलों की बारिश के बीच श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए और इस पल को यादगार बनाया।

सावन के दौरान उत्तर प्रदेश के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती है। सोमवार और अन्य विशेष तिथियों पर मंदिरों में सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक भीड़ जुट सकती है। ऐसे में प्रशासन के सामने सुरक्षा, यातायात और दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की जिम्मेदारी रहती है।

कुल मिलाकर, सावन सोमवार पर उत्तर प्रदेश में आस्था के कई रंग देखने को मिले। 95 साल की मां को कांवड़ पर बैठाकर यात्रा पर निकले बेटे ने श्रद्धा के साथ मां के प्रति समर्पण की मिसाल पेश की। वहीं वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम में बाबा के दर्शन के लिए करीब 3 किलोमीटर लंबी कतार लगी रही। बरेली में हेलिकॉप्टर से श्रद्धालुओं पर फूलों की बारिश की गई। सावन सोमवार के कारण प्रदेश के शिवालयों में दिनभर भक्तिमय माहौल बना रहा।

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