मध्य प्रदेश में बैगा, सहरिया और भारिया जनजाति की महिलाओं को Ladli Behna Yojana का लाभ नहीं मिलने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने याचिका दायर कर करीब पांच लाख महिलाओं के प्रभावित होने का दावा किया है।
भोपाल: मध्य प्रदेश में बैगा, सहरिया और भारिया विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिलाओं को Ladli Behna Yojana का लाभ नहीं मिलने का मामला अदालत पहुंच गया है। पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर की है। उनका कहना है कि ₹1,500 के विशेष आहार अनुदान को आधार बनाकर करीब पांच लाख महिलाओं को योजना से बाहर किया गया है। मामले पर बुधवार को सुनवाई होगी।
विशेष आहार अनुदान के कारण Ladli Behna से वंचित होने का दावा
मध्य प्रदेश में बैगा, सहरिया और भारिया विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिलाओं को Ladli Behna Yojana का लाभ नहीं मिलने का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने इस संबंध में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर की है। मामले पर बुधवार को सुनवाई प्रस्तावित है।

याचिका में दावा किया गया है कि इन जनजातियों के परिवारों को मिलने वाले विशेष आहार अनुदान की वजह से महिलाओं को लाड़ली बहना योजना के लिए अपात्र माना जा रहा है। सरकार की ओर से इन परिवारों को बच्चों के पोषण के लिए हर महीने ₹1,500 की सहायता दी जाती है। प्रशासनिक व्यवस्था के तहत यह राशि परिवार की महिला मुखिया के खाते में पहुंचती है।
करीब पांच लाख महिलाओं के प्रभावित होने का दावा
पारस सकलेचा के अनुसार, बैगा सहित संबंधित जनजातियों के परिवारों को वर्ष 2017-18 से विशेष आहार अनुदान दिया जा रहा है। यह सहायता मुख्य रूप से बच्चों के पोषण और कुपोषण की समस्या से निपटने के उद्देश्य से दी जाती है। उनका दावा है कि इसी राशि को महिला के खाते में मिलने वाली सहायता मानकर करीब पांच लाख महिलाओं को Ladli Behna Yojana से बाहर रखा गया है।
याचिका में दोनों योजनाओं के उद्देश्यों को अलग बताया गया है। सकलेचा का तर्क है कि आहार अनुदान बच्चों के पोषण से जुड़ा है, जबकि लाड़ली बहना योजना महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और पोषण को ध्यान में रखकर संचालित की जाती है। ऐसे में एक योजना का लाभ मिलने को दूसरी योजना की पात्रता खत्म करने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए, ऐसा उनका कहना है।
बैगा परिवारों की संख्या में कमी का भी मुद्दा
पूर्व विधायक ने बैगा समुदाय की आबादी और परिवारों की संख्या में कथित कमी को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, 2011 की जनगणना में मध्य प्रदेश में बैगा जनजाति की आबादी करीब 4.15 लाख थी। वर्ष 2019 में बैगा परिवारों की संख्या 82,258 बताई गई थी, जो 2025 में घटकर 72,788 रह गई।
सकलेचा ने इन आंकड़ों के आधार पर छह वर्षों में करीब 9,500 बैगा परिवारों की कमी का दावा किया है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के आदिवासी जनप्रतिनिधियों को भी इस मुद्दे को उठाना चाहिए। यह दावा और इसके आंकड़े संबंधित सरकारी रिकॉर्ड के संदर्भ में देखे जाने हैं।
सरकार ने योजना के नियमों का दिया हवाला
दूसरी ओर, विधानसभा में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से दिए गए जवाब में योजना के पात्रता नियमों का हवाला दिया गया है। सरकार के अनुसार, लाड़ली बहना योजना के प्रावधानों में ऐसी महिलाओं को लाभ नहीं दिया जाता, जिन्हें किसी अन्य योजना के तहत ₹1,000 से अधिक की आर्थिक सहायता मिल रही हो।
इसी नियम के आधार पर विशेष आहार अनुदान प्राप्त करने वाली महिलाओं को Ladli Behna Yojana का लाभ नहीं मिलने की बात सामने आई है। अब हाईकोर्ट में दायर याचिका के जरिए इस व्यवस्था पर सवाल उठाया गया है। बुधवार की सुनवाई में अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता और सरकार की ओर से रखे जाने वाले तर्कों के आधार पर मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।











