जयपुर के प्रताप नगर थाने में तैनात ASI सुखदेव जाट को ACB ने 10 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। आरोप है कि वह पुलिस केस में मदद और आरोपी की गिरफ्तारी के बदले रकम मांग रहे थे। रकम उनकी वर्दी से बरामद हुई।
जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने मंगलवार को एक पुलिसकर्मी को कथित तौर पर 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान सुखदेव जाट के रूप में हुई है, जो प्रताप नगर थाने में Assistant Sub-Inspector (ASI) के पद पर तैनात था। ACB के अनुसार, ASI ने एक आपराधिक मामले में शिकायतकर्ता को मदद करने, प्रभावी पैरवी करने और आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ चालान पेश करने के बदले रिश्वत की मांग की थी। शिकायत के सत्यापन के बाद ACB ने जाल बिछाया और आरोपी को रिश्वत की रकम लेते हुए कथित तौर पर रंगे हाथ पकड़ लिया।
कार्रवाई के दौरान सुखदेव जाट ने 10 हजार रुपये लेकर उन्हें अपनी खाकी वर्दी की पैंट की जेब में रख लिया। इसी समय पहले से तैनात ACB टीम ने उसे पकड़ लिया। एजेंसी ने उसके कब्जे से रिश्वत की रकम बरामद करने की बात कही है।
शिकायत मिलने के बाद ACB ने किया सत्यापन
ACB की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव के अनुसार, एजेंसी को 11 अगस्त को एक महिला की ओर से लिखित शिकायत मिली थी। शिकायत में बताया गया था कि प्रताप नगर थाने में उसके नाम से संबंधित एक मामला दर्ज है और उसकी जांच ASI सुखदेव जाट कर रहे थे।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि ASI मामले में प्रभावी पैरवी और मदद करने के साथ-साथ आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ चालान पेश करने के लिए पैसे मांग रहे थे।
शिकायत मिलने के बाद ACB ने आरोपों की प्राथमिक जांच और सत्यापन कराया। एजेंसी के मुताबिक, सत्यापन के दौरान रिश्वत की मांग किए जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद अधिकारियों ने आरोपी को पकड़ने के लिए ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई।
10 हजार रुपये की रिश्वत की मांग का आरोप
ACB के मुताबिक, आरोपी पुलिस अधिकारी ने शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। एजेंसी ने शिकायत की पुष्टि करने के बाद शिकायतकर्ता को तय रकम के साथ आरोपी के पास भेजा।
ट्रैप ऑपरेशन के दौरान जैसे ही ASI ने कथित तौर पर रिश्वत की रकम स्वीकार की, ACB की टीम ने कार्रवाई शुरू कर दी। अधिकारियों ने आरोपी को मौके पर ही हिरासत में ले लिया और उसके पास से 10 हजार रुपये बरामद किए।
भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी की इस तरह की कार्रवाई में पहले शिकायत की सत्यता का सत्यापन किया जाता है और उसके बाद आरोपी को रिश्वत स्वीकार करते समय पकड़ने की कोशिश की जाती है। इस मामले में भी एजेंसी ने शिकायत के सत्यापन के बाद ट्रैप की कार्रवाई की।
खाकी वर्दी की जेब में रखे पैसे
इस मामले की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि आरोपी ASI ने कथित तौर पर रिश्वत की रकम किसी अलग स्थान पर छिपाने के बजाय अपनी खाकी वर्दी की पैंट की जेब में रख ली।
ACB के अनुसार, शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये लेने के तुरंत बाद आरोपी ने पैसे जेब में रखे। इसके बाद पहले से आसपास मौजूद टीम ने उसे पकड़ लिया।
एजेंसी ने आरोपी के कब्जे से कथित रिश्वत की रकम बरामद कर ली है। ट्रैप के दौरान मिले सबूतों और अन्य दस्तावेजों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है।
हालांकि, अंतिम रूप से यह तय होना अभी बाकी है कि आरोपी ने भ्रष्टाचार के सभी आरोप किए थे या नहीं। गिरफ्तारी किसी व्यक्ति के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं होती। मामले में आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।
केस में मदद के बदले रिश्वत मांगने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, रिश्वत की मांग किसी सामान्य सरकारी सेवा के लिए नहीं बल्कि पुलिस जांच से जुड़े काम में कथित मदद के बदले की गई थी।
शिकायत के मुताबिक, ASI सुखदेव जाट संबंधित मामले की जांच कर रहे थे। आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्ता को मामले में प्रभावी तरीके से पैरवी में मदद करने और आरोपी को गिरफ्तार करके उसके खिलाफ चालान पेश करने के लिए पैसे मांगे।
ऐसे मामलों में पुलिस जांच अधिकारी के पास मामले की जांच से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होती हैं। इसलिए किसी आरोपी या शिकायतकर्ता से जांच को प्रभावित करने के लिए पैसे मांगना भ्रष्टाचार कानून के तहत गंभीर आरोप बन सकता है।
ACB अब यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि रिश्वत की मांग केवल इस मामले तक सीमित थी या इसके पीछे कोई व्यापक पैटर्न भी था।
ACB की कार्रवाई के बाद पूछताछ जारी
गिरफ्तारी के बाद ACB की टीम आरोपी ASI से पूछताछ कर रही है। जांच में रिश्वत मांगने की परिस्थितियों, संबंधित पुलिस केस, शिकायतकर्ता से संपर्क और कथित लेनदेन से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटाई जा सकती है।
एजेंसी आरोपी के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, दस्तावेजों और संबंधित केस फाइल की भी जांच कर सकती है, यदि जांच अधिकारी इसे आवश्यक समझें।
साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि मामले की जांच किस चरण में थी और आरोपी अधिकारी के पास केस में किस तरह की आधिकारिक भूमिका थी।
राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ ACB की कार्रवाई
राजस्थान में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच और ट्रैप कार्रवाई के लिए ACB महत्वपूर्ण एजेंसी है। सरकारी विभागों में रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने पर एजेंसी सत्यापन के बाद ट्रैप ऑपरेशन कर सकती है।
पुलिस विभाग के अधिकारियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई का महत्व इसलिए भी अधिक होता है क्योंकि पुलिस सीधे नागरिकों की शिकायतों, आपराधिक मामलों की जांच और कानून-व्यवस्था से जुड़े काम करती है।
जयपुर जैसे बड़े शहर में पुलिस अधिकारी के खिलाफ हुई यह कार्रवाई सरकारी सेवाओं में भ्रष्टाचार को लेकर निगरानी की आवश्यकता को भी सामने लाती है।
हालांकि, किसी भी ट्रैप कार्रवाई में आरोपों का अंतिम कानूनी निर्धारण अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होता है।
क्या होता है ACB का ट्रैप ऑपरेशन?
भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने के बाद ACB आमतौर पर पहले यह सत्यापित करती है कि सरकारी कर्मचारी या अधिकारी ने रिश्वत की मांग की है या नहीं। सत्यापन के बाद पर्याप्त आधार मिलने पर ट्रैप की योजना बनाई जाती है।
ट्रैप के दौरान शिकायतकर्ता को संबंधित अधिकारी के पास निर्धारित रकम लेकर भेजा जाता है। टीम आसपास रहकर लेनदेन पर नजर रखती है। रिश्वत स्वीकार किए जाने के बाद अधिकारी को पकड़ने और रकम बरामद करने की कार्रवाई की जाती है।
जयपुर के इस मामले में भी ACB के अनुसार इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया। शिकायतकर्ता ने 10 हजार रुपये दिए और आरोपी ASI ने कथित तौर पर रकम स्वीकार कर अपनी वर्दी की जेब में रख ली।
आगे की जांच में क्या होगा?
गिरफ्तारी के बाद अब ACB मामले में उपलब्ध साक्ष्यों को एकत्र करेगी। कथित रिश्वत की रकम, शिकायतकर्ता के बयान, ट्रैप से जुड़े साक्ष्य और संबंधित पुलिस केस के दस्तावेज जांच का हिस्सा होंगे।
इसके अलावा यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसी अदालत के सामने किन धाराओं के तहत आरोप पेश करती है और क्या आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य पाए जाते हैं।
फिलहाल ACB की कार्रवाई को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तारी के रूप में देखा जाना चाहिए। सुखदेव जाट के खिलाफ आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। आगे की कानूनी प्रक्रिया में आरोपी को अपना पक्ष रखने का अधिकार होगा।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सरकारी पद का इस्तेमाल कथित तौर पर निजी लाभ के लिए करने के आरोपों पर भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियां किस तरह कार्रवाई करती हैं। ACB की जांच पूरी होने और अदालत में मामले की सुनवाई के बाद ही इस प्रकरण का अंतिम कानूनी परिणाम स्पष्ट होगा।










