मणिशंकर अय्यर ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए सवाल, सीईसी के कामकाज की आलोचना

कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी नहीं बताया। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार के कामकाज और निर्वाचन आयोग की

कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त का व्यवहार शर्मनाक लगा।

Mani Shankar Aiyar on Election Commission: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने भारत के चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के व्यवहार को शर्मनाक बताते हुए मौजूदा चुनाव आयुक्तों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। अय्यर ने इसके साथ ही चुनाव आयुक्तों और न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया को पारदर्शिता के नजरिए से कमजोर बताया।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान मणिशंकर अय्यर ने कहा कि उन्हें मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त का व्यवहार उचित नहीं लगा। उन्होंने दोनों चुनाव आयुक्तों की भूमिका पर भी असंतोष व्यक्त किया। उनका आरोप था कि चुनाव आयुक्तों ने सार्वजनिक रूप से उन कई नोट्स का समर्थन नहीं किया, जिन्हें उन्होंने खुद तैयार किया था। इसी आधार पर अय्यर ने मौजूदा चुनाव आयुक्तों को अब तक के सबसे खराब चुनाव आयुक्तों में बताया।

चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर अय्यर का सवाल

मणिशंकर अय्यर ने चुनाव आयोग की संवैधानिक स्थिति और उसकी स्वतंत्रता को लेकर भी अपनी राय रखी। उनका कहना था कि भारत में चुनाव आयोग लंबे समय तक स्वतंत्र संस्था के तौर पर काम करता रहा है और किसी संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए उसे अलग से कानूनी दर्जा देना जरूरी नहीं होना चाहिए।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट को आमतौर पर एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था के रूप में देखा जाता है। उनके अनुसार संवैधानिक संस्थाओं की संरचना ही उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने का आधार देती है। हालांकि, अय्यर का मानना है कि नियुक्तियों की प्रक्रिया में बदलाव ने इस व्यवस्था को प्रभावित किया है। 

उन्होंने चुनाव आयुक्तों और न्यायाधीशों की नियुक्ति के तरीके को पर्याप्त पारदर्शी नहीं बताया। उनके मुताबिक किसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और संस्थागत स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है।

चुनाव आयोग को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?

भारत में चुनाव आयोग की भूमिका चुनाव प्रक्रिया की निगरानी, मतदाता सूची और चुनाव संचालन से जुड़ी होती है। ऐसे में आयोग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को लेकर उठने वाले सवाल राजनीतिक और संवैधानिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अय्यर की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है। हालांकि, उनके आरोप और आकलन उनके व्यक्तिगत राजनीतिक विचार हैं और इन्हें आयोग के बारे में स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

भारत की विदेश नीति पर भी साधा निशाना

बातचीत के दौरान मणिशंकर अय्यर ने भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक रणनीति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत एक तरफ दुनिया के सामने बातचीत और कूटनीति की जरूरत पर जोर देता है, लेकिन दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ उसके संबंधों में संवाद की कमी दिखाई देती है। अय्यर ने भारत-पाकिस्तान संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच नियमित कूटनीतिक बातचीत न होना चिंता का विषय है। उन्होंने भारत के उस रुख पर भी सवाल उठाया जिसमें युद्ध के बजाय बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही जाती है।

क्वाड और चीन को लेकर भी टिप्पणी

कांग्रेस नेता ने क्वाड (Quad) में भारत की भागीदारी को लेकर भी अपनी आलोचना सामने रखी। उनका कहना था कि इस समूह में शामिल होने से भारत ने चीन के साथ अपने संबंधों को लेकर एक अतिरिक्त रणनीतिक चुनौती पैदा की है। उन्होंने अमेरिका की ओर से क्वाड की उपयोगिता को लेकर कथित टिप्पणियों का संदर्भ देते हुए सवाल किया कि भारत की मौजूदा विदेश नीति को किस तरह की रणनीतिक स्वायत्तता कहा जा सकता है।

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