आज आएगा बड़ा फैसला: राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव से जुड़ी 439 याचिकाओं पर हाईकोर्ट की सुनवाई

राजस्थान हाईकोर्ट आज पंचायत और शहरी निकाय चुनावों से जुड़ी 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाएगा। निर्णय दोपहर 2 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगा।

राजस्थान हाईकोर्ट शुक्रवार को पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकाय चुनावों को टालने, प्रशासक नियुक्त करने तथा परिसीमन व पुनर्गठन से जुड़े मामलों पर लंबित 439 याचिकाओं पर अहम फैसला सुनाएगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ दोपहर 2 बजे निर्णय करेगी।

जयपुर। राजस्थान में पंचायत और शहरी निकाय चुनावों से जुड़ा महत्वपूर्ण कानूनी विवाद शुक्रवार को निर्णायक मोड़ पर पहुंचेगा, जब हाईकोर्ट इन मुद्दों पर लंबित 439 याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाएगा। इनमें चुनाव टालने, निकायों में प्रशासक नियुक्त करने, परिसीमन और पुनर्गठन जैसी प्रक्रियाओं को चुनौती देने वाली याचिकाएँ शामिल हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ इन सभी याचिकाओं पर दोपहर 2 बजे जयपुर में निर्णय सुनाएगी। 

राज्य के निकाय और पंचायत स्तर पर चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए इस फैसले पर सभी राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और प्रशासन की नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है कि कोर्ट का निर्णय आने वाले महीनों में स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली, चुनावी समयसीमा और प्रशासनिक संरचना को सीधे प्रभावित कर सकता है।

वीसी से सुनाया जाएगा फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट शुक्रवार को पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों से जुड़ी 439 याचिकाओं पर अहम फैसला सुनाएगा। खंडपीठ जयपुर से निर्णय देगी, जबकि मुख्य न्यायाधीश का अदालत कक्ष जोधपुर में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ा रहेगा। इन याचिकाओं में चुनाव टालने, प्रशासकों की नियुक्ति को नियम विरुद्ध बताने और परिसीमन-पुनर्गठन प्रक्रियाओं को चुनौती दी गई है। अदालत ने इन सभी मामलों पर 12 अगस्त को सुनवाई पूरी कर ली थी और फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब यह निर्णय निकाय व पंचायत चुनाव प्रक्रिया पर सीधा प्रभाव डाल सकता है।

सरकार ने दिए चुनाव टलने के संकेत

राजस्थान सरकार ने संकेत दिए हैं कि शहरी निकायों और पंचायत चुनावों का आयोजन अब अगले साल मई से पहले संभव नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि निर्वाचन आयोग का विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम (SIR) और समान अवधि में होने वाली परीक्षाएँ चुनावी प्रक्रिया को समय पर पूरा करने में बाधा बन रही हैं।

इन परिस्थितियों के चलते प्रशासनिक स्तर पर यह माना जा रहा है कि चुनाव की तैयारियों को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। सरकार का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब विपक्ष चुनाव टलने पर सरकार की नीयत पर सवाल उठा रहा है और इस फैसले को राजनीतिक लाभ से जोड़कर देख रहा है।

मंत्री का बयान—“मई से पहले संभव नहीं”

स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने स्पष्ट किया कि मौजूदा व्यवस्थाओं और तैयारियों को ध्यान में रखते हुए मई से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण पूरी होने तक चुनावी अधिसूचना जारी नहीं की जा सकती, जिससे स्वाभाविक रूप से चुनावी समय सीमा आगे खिसक रही है।

मंत्री ने आरोप-प्रत्यारोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव टालना सरकार की मंशा नहीं, बल्कि तकनीकी व प्रक्रिया संबंधी आवश्यकता है। उनका कहना है कि सरकार पारदर्शी और व्यवस्थित चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है और मतदाता सूची की सटीकता इसमें सबसे अहम भूमिका निभाती है।

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