नीरजा मोदी स्कूल में छात्रा की आत्महत्या मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम स्कूल पहुंची और अभिभावकों व प्रशासन से विस्तृत बातचीत की। टीम ने मौके का मुआयना करने के बाद जिला कलक्ट्रेट में प्रशासन, पुलिस और शिक्षा अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की।
जयपुर। नीरजा मोदी स्कूल में छात्रा की आत्महत्या के बाद जांच की गंभीरता बढ़ गई है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की टीम बुधवार को स्कूल पहुंची, जहां उन्होंने छात्रा के परिवार और स्कूल प्रशासन से अलग-अलग बातचीत कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। टीम ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर परिजनों द्वारा उठाए गए सवालों पर भी विचार किया। इसके बाद दल जिला कलक्ट्रेट पहुँचा, जहां जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, पुलिस और चिकित्सा अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। टीम ने अब तक पुलिस और प्रशासन द्वारा की गई जांच की प्रगति पर विस्तृत सवाल पूछे।
डीसीपी (साउथ) राजर्षिराज वर्मा ने बताया कि पुलिस छात्रा के माता-पिता, स्कूल शिक्षकों और छात्रों से लगातार पूछताछ कर रही है ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियाँ सामने आ सकें। वहीं शिक्षा विभाग अपनी जांच पूरी कर चुका है, जबकि पुलिस की जांच अभी जारी है। जांच के परिणामों को लेकर परिवार और आयोग दोनों की नजरें बनी हुई हैं।
परिजनों का दर्द बढ़ा
अमायरा की मौत को 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन परिजनों का दर्द कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। परिवार का कहना है कि नींद की गोलियां भी अब असर नहीं कर रहीं—अमायरा का चेहरा हर पल सामने आ जाता है। परिजनों ने आरोप लगाया कि डेढ़ साल में उन्होंने स्कूल प्रशासन को छह बार बुलिंग और अन्य परेशानियों की जानकारी दी, लेकिन किसी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई। अमायरा के पिता ने बताया कि 2024 और 2025 में कई बार लिखित व मौखिक रूप से स्कूल को अवगत कराया गया, फिर भी अनदेखी की गई। परिवार का आरोप है कि घटना वाले दिन की फुटेज पर भी स्कूल गोलमोल जवाब दे रहा है।

कक्षा की बातचीत पर उठे सवाल
अमायरा के पिता विजय के अनुसार, घटना वाले दिन कक्षा में अमायरा और शिक्षिका के बीच हुई बातचीत कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने बताया कि जब शिक्षिका से यह पूछा गया कि अमायरा क्या कह रही थी, तो उनके जवाब हर बार बदलते नज़र आए। कभी वह कुछ और बतातीं, तो कभी बिल्कुल अलग बात, जिससे परिवार को शक और गहरा हो गया।
परिजनों के मुताबिक, बातचीत के दौरान बच्चे भी असामान्य रूप से शॉक्ड दिख रहे थे। इससे परिवार में यह चिंता बढ़ गई कि कक्षा में वास्तव में क्या हुआ था और किस बात ने बच्चों को इतना विचलित कर दिया। परिवार का कहना है कि यदि सब कुछ सामान्य था, तो शिक्षिका के जवाबों में इस तरह का विरोधाभास क्यों है।
स्कूल जानकारी छुपा रहा
परिजन दावा कर रहे हैं कि शिक्षिका ने यह कहकर सवालों को टालने की कोशिश की कि उन्होंने अमायरा से सिर्फ इतना कहा था कि वह फुटबॉल नहीं खेलेगी। परिवार का कहना है कि ऐसी सामान्य बात से बच्चे शॉक्ड नहीं हो सकते, न ही बातों में इस तरह का बदलाव आ सकता है। इससे उन्हें संदेह है कि घटना की वास्तविकता पूरी तरह सामने नहीं लाई जा रही।
परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपा रहा है और घटना की सही परिस्थितियों का खुलासा नहीं कर रहा। उनका कहना है कि यदि सभी जानकारी पारदर्शी रूप से साझा की जाए, तो कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं। परिवार ने मांग की है कि जांच एजेंसियाँ शिक्षिका के बयानों और कक्षा में मौजूद बच्चों के व्यवहार की गहराई से जांच करें।









