अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पुलिस के जरिए E-20 विरोधी टाउन हॉल रोकना चाहती है। AAP ने कहा कि 1 अगस्त का कार्यक्रम तय समय पर आयोजित होगा।
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पुलिस का इस्तेमाल कर उनकी पार्टी के प्रस्तावित 'नेशनल टाउन हॉल अगेंस्ट E-20' कार्यक्रम को रोकने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद कार्यक्रम में बाधा डालने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद यह आयोजन 1 अगस्त को दोपहर 12 बजे नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किया जाएगा।
केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उनका दावा है कि यह कार्यक्रम E-20 नीति पर सार्वजनिक चर्चा के लिए आयोजित किया जा रहा है और सरकार इस विषय पर खुली बहस से बचना चाहती है।
क्या है पूरा मामला?
AAP के अनुसार, पार्टी ने संविधान क्लब में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर ली थीं। आयोजन स्थल की बुकिंग कराई गई, निर्धारित शुल्क जमा किया गया और आधिकारिक रसीद भी प्राप्त कर ली गई। केजरीवाल का आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने क्लब प्रबंधन से संपर्क कर बुकिंग रद्द कराने की कोशिश की। हालांकि, क्लब प्रशासन ने कथित तौर पर बुकिंग रद्द करने से इनकार कर दिया क्योंकि सभी औपचारिकताएं पहले ही पूरी हो चुकी थीं। इसके बाद, AAP का कहना है कि पुलिस ने कार्यक्रम आयोजकों से आयोजन की अनुमति लेने की मांग शुरू कर दी।
इनडोर कार्यक्रम के लिए अनुमति की जरूरत नहीं: AAP
केजरीवाल ने कहा कि मौजूदा नियमों के अनुसार किसी बंद हॉल या इनडोर कार्यक्रम के लिए अलग से पुलिस अनुमति लेना अनिवार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद आयोजकों पर दबाव बनाया जा रहा है और कार्यक्रम रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी कार्यक्रमों को रोका जाएगा तो यह लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल खड़े करता है। AAP का कहना है कि यह मुद्दा केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक संवाद से भी जुड़ा हुआ है।
केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
प्रेस वार्ता के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार E-20 नीति को लेकर बढ़ रही सार्वजनिक चर्चा और आलोचना से असहज दिखाई दे रही है। उनके अनुसार, यदि सरकार को अपनी नीति पर भरोसा है तो उसे खुली बहस से नहीं डरना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस के माध्यम से लोगों को कार्यक्रम में शामिल होने से हतोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है। केजरीवाल ने कहा कि लोकतांत्रिक समाज में नागरिकों को अपनी राय रखने और सार्वजनिक मंचों पर चर्चा करने का पूरा अधिकार है।

प्रधानमंत्री पर भी साधा निशाना
केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए सवाल उठाया कि यदि इनडोर कार्यक्रमों के लिए अनुमति आवश्यक नहीं है तो फिर इस कार्यक्रम के मामले में ऐसी मांग क्यों की जा रही है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि यदि हर गतिविधि के लिए अनुमति लेनी पड़े तो क्या लोगों को खाने, पीने, सोने या नहाने के लिए भी अनुमति लेनी होगी। उनका कहना था कि सरकार प्रशासनिक दबाव के जरिए लोकतांत्रिक बहस को सीमित नहीं कर सकती।
जनता की आवाज दबाई नहीं जा सकती
AAP प्रमुख ने कहा कि पुलिस कार्रवाई या प्रशासनिक दबाव से लोग अपनी बात रखना बंद नहीं करेंगे। उन्होंने दावा किया कि देश के नागरिक लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक हैं और किसी भी प्रकार के दबाव से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यदि लोगों की चिंताओं को अनदेखा किया जाएगा तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा।
E-20 नीति पर AAP का विरोध
आम आदमी पार्टी लंबे समय से E-20 नीति को लेकर सवाल उठाती रही है। पार्टी का कहना है कि इस नीति के कई सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा की आवश्यकता है। केजरीवाल ने दावा किया कि सरकार को जनता की चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जनता की आवाज नहीं सुनेगी तो लोकतांत्रिक माध्यमों से विरोध और तेज होगा। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
1 अगस्त को होगा राष्ट्रीय टाउन हॉल
AAP ने दोहराया कि 1 अगस्त को दोपहर 12 बजे संविधान क्लब, नई दिल्ली में प्रस्तावित नेशनल टाउन हॉल का आयोजन तय कार्यक्रम के अनुसार होगा। पार्टी का कहना है कि इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों को आमंत्रित किया गया है ताकि E-20 नीति पर सार्वजनिक चर्चा हो सके। AAP ने इसे लोकतांत्रिक भागीदारी का मंच बताते हुए कहा कि कार्यक्रम को रोकने की किसी भी कोशिश के बावजूद आयोजन जारी रहेगा।
लोकतांत्रिक अधिकारों पर नई बहस
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन, पुलिस की भूमिका और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी आयोजन को लेकर कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हों, तो प्रशासनिक कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। वहीं, राजनीतिक दलों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सार्वजनिक संवाद और विचार-विमर्श की स्वतंत्रता सबसे महत्वपूर्ण अधिकारों में से एक है। अब सभी की नजर 1 अगस्त को प्रस्तावित इस कार्यक्रम और उससे जुड़े प्रशासनिक घटनाक्रम पर बनी हुई है।












