शेयर बाजार में कमजोरी के बीच मंगलवार को अडानी पावर के शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में कंपनी का शेयर BSE पर करीब 2 फीसदी चढ़कर 207.75 रुपये के स्तर तक पहुंच गया।
बिजनेस न्यूज़: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कमजोरी के बीच अडानी पावर के शेयरों में तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में Adani Power Share Price करीब 2 फीसदी तक चढ़ गया। कंपनी के शेयर में यह तेजी ऐसे समय आई है, जब सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें अडानी पावर द्वारा सरकारी पोर्टल पर दर्ज किए गए करीब ₹1,005 करोड़ के इनवॉइस पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
बाजार में इस घटनाक्रम को अडानी पावर के लिए सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि इससे कंपनी द्वारा दावा की गई रकम के भुगतान का रास्ता मजबूत होता दिख रहा है। हालांकि, मामले में अंतिम आदेश अभी अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) को देना है।
अडानी पावर के शेयर में क्यों आई तेजी?
मंगलवार को शुरुआती कारोबार में अडानी पावर का शेयर BSE पर करीब 2 फीसदी तक बढ़कर ₹207.75 के स्तर पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में कंपनी का शेयर ₹203.90 पर बंद हुआ था और मंगलवार को ₹203.85 पर खुला। शेयर में तेजी के साथ कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब ₹4 लाख करोड़ के स्तर के आसपास पहुंच गया। अडानी पावर के शेयर का 52-सप्ताह का उच्चतम स्तर ₹254.15 और निचला स्तर ₹116.67 बताया जा रहा है।
हालांकि, शेयर बाजार में किसी भी तेजी को केवल एक खबर के आधार पर स्थायी ट्रेंड नहीं माना जा सकता। निवेशकों की नजर अब मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर भी रहेगी।
क्या है ₹1,005 करोड़ का पूरा मामला?

विवाद कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों और अडानी पावर के बीच बिजली खरीद से जुड़े भुगतान को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक की DISCOMs की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें अडानी पावर द्वारा सरकारी पोर्टल पर अपलोड किए गए लगभग ₹1,005 करोड़ के कथित बकाया इनवॉइस पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
यह सरकारी पोर्टल बिजली खरीद से जुड़े लेनदेन और भुगतान की स्थिति को ट्रैक करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी के पहले के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। APTEL ने भी संबंधित इनवॉइस पर रोक लगाने से मना किया था और केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) के निर्देश को बरकरार रखा था। CERC ने कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों को अडानी पावर द्वारा दावा की गई पूरी राशि निर्धारित समय के भीतर चुकाने का निर्देश दिया था।
CERC ने क्या आदेश दिया था?
मामले की जड़ 2023 के CERC आदेश से जुड़ी है। आयोग ने कर्नाटक की DISCOMs को भुगतान में अंतर की रकम पर कैरिंग कॉस्ट और लेट पेमेंट सरचार्ज का भुगतान करने को कहा था। यह राशि छह किस्तों में चुकाई जानी थी। अडानी पावर का आरोप था कि बिजली वितरण कंपनियों ने नियामकीय आदेश के अनुसार भुगतान नहीं किया। इसके बाद कंपनी ने इस मामले में CERC का रुख किया।
CERC ने DISCOMs को अडानी पावर की ओर से दावा की गई रकम का भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके खिलाफ कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों ने अपीलेट ट्रिब्यूनल और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कर्नाटक DISCOMs का क्या कहना है?
कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों, जिनकी अपील का नेतृत्व Power Company of Karnataka Limited ने किया, ने दावा किया कि अडानी पावर की ओर कोई वास्तविक बकाया नहीं था। DISCOMs ने तर्क दिया कि APTEL ने मामले के मूल तथ्यों पर पर्याप्त विचार किए बिना CERC के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
कंपनियों के मुताबिक, इस स्थिति में उन्हें अडानी पावर की मांग की गई पूरी राशि का भुगतान करना पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल DISCOMs की याचिका खारिज करते हुए APTEL को मामले पर तीन महीने के भीतर अंतिम फैसला सुनाने को कहा है।











