आगरा में पुलिस पर थर्ड डिग्री का आरोप: चौकी में बुलाकर हाईस्कूल छात्र की पिटाई, हाथ फ्रैक्चर; दो दरोगा सस्पेंड

आगरा में हाईस्कूल के छात्र को पुलिस चौकी में बुलाकर कथित पिटाई का मामला सामने आया। छात्र का हाथ फ्रैक्चर, परिजनों ने थर्ड डिग्री का आरोप लगाया। दो दरोगा सस्पेंड
आगरा में पुलिस पर थर्ड डिग्री का आरोप: चौकी में बुलाकर हाईस्कूल छात्र की पिटाई, हाथ फ्रैक्चर; दो दरोगा सस्पेंड
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आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि हाईस्कूल के एक नाबालिग छात्र को पूछताछ के नाम पर पुलिस चौकी में बुलाया गया और वहां उसके साथ मारपीट की गई। परिजनों का कहना है कि पिटाई इतनी बेरहमी से की गई कि छात्र का हाथ टूट गया। घटना के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हलचल मच गई और तत्काल प्रभाव से दो दरोगाओं को निलंबित कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार, छात्र को किसी स्थानीय विवाद के सिलसिले में चौकी पर बुलाया गया था। परिवार का कहना है कि उन्हें यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि बच्चे को किस आधार पर बुलाया जा रहा है। कुछ घंटों बाद जब छात्र घर लौटा तो वह दर्द से कराह रहा था। उसके हाथ में तेज सूजन थी और वह सामान्य रूप से हाथ हिला नहीं पा रहा था। परिजन तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां एक्स-रे जांच में हाथ में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने प्लास्टर चढ़ाकर आराम की सलाह दी।

परिवार का आरोप है कि पूछताछ के दौरान पुलिसकर्मियों ने छात्र पर दबाव बनाने के लिए लाठी-डंडों से पिटाई की। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार की पूछताछ करनी थी तो कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था और अभिभावकों की मौजूदगी में ही बात की जानी चाहिए थी। नाबालिग के साथ इस तरह की कार्रवाई को लेकर परिवार ने इसे सीधा-सीधा थर्ड डिग्री करार दिया है।

घटना की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। मोहल्ले के लोग छात्र के घर पहुंचने लगे और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ नाराजगी जताई। कुछ लोगों ने प्रदर्शन की चेतावनी भी दी। बढ़ते दबाव को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया और प्रारंभिक जांच के आदेश दिए। जांच के बाद दो उपनिरीक्षकों (दरोगा) को सस्पेंड कर दिया गया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया अनुचित व्यवहार सामने आया है, इसलिए निलंबन की कार्रवाई की गई है। साथ ही विभागीय जांच बैठा दी गई है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि जांच में मारपीट और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित कर्मियों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि नाबालिगों से पूछताछ के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नाबालिग से पूछताछ के दौरान उसके अभिभावकों को सूचित करना और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है। यदि इन नियमों का उल्लंघन हुआ है तो यह मानवाधिकार और बाल अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन सकता है।

छात्र का इलाज फिलहाल जारी है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। परिवार ने स्पष्ट कहा है कि केवल सस्पेंशन से उन्हें संतोष नहीं है। वे दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी अन्य बच्चे के साथ इस तरह की घटना न हो।

वरिष्ठ अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी। पूरे मामले पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जांच रिपोर्ट जल्द सामने आएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। यह घटना एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता को लेकर बहस का विषय बन गई है

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