आगरा के यूनिवर्सिटी मॉडल स्कूल के छात्र ऋषभ मिठास की 2022 में हुई संदिग्ध मौत के मामले में CJM ने फाइनल रिपोर्ट रद्द कर दी है। कोर्ट ने नई टीम से अग्रिम विवेचना और दोनों फोरेंसिक रिपोर्टों की जांच के आदेश दिए।
आगरा: यूनिवर्सिटी मॉडल स्कूल, खंदारी कैंपस के छात्र ऋषभ मिठास की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में अदालत ने पुलिस की फाइनल रिपोर्ट खारिज कर दी है। CJM शारिब अली ने मामले में अग्रिम विवेचना के आदेश देते हुए दो विधि विज्ञान प्रयोगशाला रिपोर्टों के अलग-अलग निष्कर्षों का वैज्ञानिक और तुलनात्मक परीक्षण कराने को कहा है।
कोर्ट ने फाइनल रिपोर्ट खारिज कर दोबारा जांच के आदेश दिए
यूनिवर्सिटी मॉडल स्कूल, खंदारी कैंपस में छात्र ऋषभ मिठास की मौत के मामले में पुलिस की ओर से अदालत में पेश की गई फाइनल रिपोर्ट (FR) को CJM शारिब अली ने निरस्त कर दिया है। अदालत ने मामले की अग्रिम विवेचना कराने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नई जांच ऐसे अधिकारी से कराई जाए, जो पहले हुई विवेचना से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं रहा हो। शिकायतकर्ता ब्रह्म दत्त मिठास ने अपने अधिवक्ता गगन शर्मा के माध्यम से पुलिस की जांच पर आपत्ति जताते हुए FR को खारिज करने और आगे की विवेचना की मांग की थी।
23 मार्च 2022 को बालकनी से गिरने की मिली थी सूचना
ब्रह्म दत्त मिठास के अनुसार उनका पुत्र ऋषभ यूनिवर्सिटी मॉडल स्कूल का छात्र था। वह 23 मार्च 2022 को उसे प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए स्कूल के गेट पर छोड़कर गए थे। उसी दिन सुबह करीब 11:15 बजे विद्यालय प्रबंधन की ओर से उन्हें बेटे के बालकनी से गिरने के बाद मौत होने की सूचना दी गई थी।
पिता ने बेटे की मौत को दुर्घटना मानने के बजाय साजिश के तहत हत्या का आरोप लगाया था। इस आधार पर उन्होंने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में न्यू आगरा थाना पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर फाइनल रिपोर्ट अदालत में पेश की।
शिकायतकर्ता ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए तत्कालीन न्यू आगरा थानाध्यक्ष अरविंद कुमार निर्वाल की कार्यप्रणाली पर भी अविश्वास जताया था। उन्होंने विवेचना में अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाया था।
दोनों फोरेंसिक रिपोर्टों का वैज्ञानिक परीक्षण होगा
CJM ने अग्रिम विवेचना में विधि विज्ञान प्रयोगशाला की 26 अगस्त 2022 और 22 जून 2023 की दोनों रिपोर्टों का तुलनात्मक एवं वैज्ञानिक परीक्षण कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि दोनों रिपोर्टों में सामने आए अलग-अलग निष्कर्षों के पीछे की वजह स्पष्ट की जाए।
इसके साथ ही घटनास्थल की परिस्थितियों का भी दोबारा वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाएगा। इसमें खास तौर पर हॉस्टल की तीसरी मंजिल की बालकनी, प्रशासनिक भवन की छत और शव मिलने वाले स्थान के बीच की वास्तविक दूरी और ऊंचाई का आकलन शामिल है।
अदालत के निर्देश के अनुसार इन स्थानों की परिस्थितियों का भी वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण किया जाएगा, ताकि छात्र की मौत से जुड़े घटनाक्रम और दोनों फोरेंसिक रिपोर्टों के बीच सामने आए अंतर की वजह स्पष्ट हो सके।









