आगरा विश्वविद्यालय में NSUI और छात्रों का हंगामा: अधिकारी के कथित बयान पर भड़के छात्र

आगरा विश्वविद्यालय में NSUI और छात्रों ने छह मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। अधिकारी के कथित ‘हम तुम्हारे गुलाम नहीं हैं’ बयान पर छात्रों में आक्रोश बढ़ गया।
आगरा विश्वविद्यालय में NSUI और छात्रों का हंगामा: अधिकारी के कथित बयान पर भड़के छात्र
Photo Credit / Attribution: google

आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों की समस्याओं और विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये को लेकर एक बार फिर माहौल गरमा गया। मंगलवार को NSUI से जुड़े छात्र नेताओं और अन्य छात्रों ने रजिस्ट्रार कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया। छात्र अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर विश्वविद्यालय पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों और विश्वविद्यालय के अधिकारियों के बीच तीखी बहस हो गई। इसी दौरान एक अधिकारी द्वारा कथित तौर पर छात्रों से यह कहे जाने का मामला सामने आया कि “हम तुम्हारे गुलाम नहीं हैं।” इस कथित बयान के बाद प्रदर्शन कर रहे छात्रों में नाराजगी और बढ़ गई। मामले को लेकर छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध जताया और अपनी समस्याओं के समाधान की मांग दोहराई।

NSUI की ओर से आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से छात्रों की कई समस्याएं लंबित हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से उनका समाधान करने के बजाय नई प्रक्रियाओं और शुल्क के माध्यम से छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। छात्र नेताओं का कहना है कि जब वे अपनी समस्याएं लेकर अधिकारियों के पास पहुंचते हैं तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। मंगलवार को इसी नाराजगी के बीच छात्र रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे और धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान छात्र अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे और विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

NSUI प्रदेश सचिव आशीष प्रिंस के मुताबिक, विश्वविद्यालय में हेल्पडेस्क टिकट के नाम पर छात्रों से करीब 200 से 300 रुपये तक लिए जा रहे हैं। संगठन का सवाल है कि जब प्रवेश के समय ही छात्रों से डिग्री और मार्कशीट से संबंधित शुल्क लिया जा चुका है तो बाद में डिग्री और मार्कशीट के लिए अलग से राशि क्यों वसूली जा रही है। NSUI का कहना है कि हेल्पडेस्क टिकट व्यवस्था छात्रों के लिए अनावश्यक आर्थिक बोझ बन रही है और इसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए। छात्रों ने इस शुल्क व्यवस्था को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्ट जवाब और पारदर्शिता की मांग की है।

प्रदर्शन के दौरान KMI में बीए के छात्रों से जुड़ा मामला भी प्रमुखता से उठाया गया। छात्रों का आरोप है कि को-करीकुलर पेपर में कई विद्यार्थियों को F ग्रेड देकर फेल कर दिया गया। NSUI नेताओं का कहना है कि इस विषय में मूल्यांकन की व्यवस्था अलग है और पास होने वाले छात्रों के लिए Q तथा फेल होने वाले छात्रों के लिए NQ का प्रावधान है। ऐसे में छात्रों को F ग्रेड दिए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। संगठन ने मांग की कि पूरे मामले की जांच कर प्रभावित विद्यार्थियों की समस्या का समाधान किया जाए और यदि मूल्यांकन में गलती हुई है तो उसे ठीक किया जाए।

छात्रों की एक अन्य प्रमुख मांग वार्षिक प्रणाली के तहत पढ़ने वाले पुराने विद्यार्थियों से जुड़ी है। NSUI ने मांग की है कि वर्ष 2016 से 2024 तक वार्षिक प्रणाली में रहे विद्यार्थियों को एक बार विशेष परीक्षा देने का अवसर दिया जाए। छात्र संगठन का तर्क है कि बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी हैं जिनकी पढ़ाई या परीक्षा से जुड़ी समस्याएं किसी न किसी कारण से लंबित रह गई हैं। ऐसे छात्रों को एक अतिरिक्त अवसर मिलने से उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित होने से बच सकता है। इसी मांग को लेकर भी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने अपनी बात रखी।

डिग्री और मार्कशीट को लेकर भी छात्रों ने अपनी परेशानी बताई। उनका कहना है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद डिग्री प्राप्त करने के लिए छात्रों को कई बार विश्वविद्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। NSUI ने मांग की है कि डिग्री के लिए ऐसा ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया जाए, जिससे विद्यार्थी ऑनलाइन या किसी व्यवस्थित माध्यम से अपनी डिग्री की स्थिति की जानकारी हासिल कर सकें। छात्रों के मुताबिक यदि डिग्री की प्रक्रिया को ट्रैक करने की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो विद्यार्थियों को बार-बार विश्वविद्यालय कार्यालयों में आने की जरूरत नहीं पड़ेगी और प्रशासनिक प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी हो सकेगी।

प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों और छात्रों के बीच हुई बातचीत ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया। छात्रों का आरोप है कि अपनी समस्याएं रखने के दौरान उन्हें उचित तरीके से नहीं सुना गया और एक अधिकारी ने कथित तौर पर “हम तुम्हारे गुलाम नहीं हैं” जैसी टिप्पणी कर दी। इस बयान को लेकर छात्रों में काफी आक्रोश दिखाई दिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच संवाद का माहौल होना चाहिए और छात्रों की शिकायतों को सम्मानपूर्वक सुना जाना चाहिए। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में अधिकारी की ओर से इस कथित बयान पर अलग से विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, इसलिए बयान को छात्रों के आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है।

NSUI नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय छात्रों की समस्याओं को केवल कागजी प्रक्रिया के तौर पर न देखे, बल्कि उनके समाधान के लिए समयबद्ध व्यवस्था बनाए। संगठन का कहना है कि हेल्पडेस्क शुल्क, डिग्री-मार्कशीट, परीक्षा परिणाम और पुराने विद्यार्थियों के लिए विशेष परीक्षा जैसे मुद्दे सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य से जुड़े हुए हैं। इसलिए इन मामलों में प्रशासन को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए और विद्यार्थियों को बार-बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देनी चाहिए।

यह पहली बार नहीं है जब आगरा विश्वविद्यालय में NSUI ने छात्र समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया हो। इससे पहले भी संगठन की ओर से परीक्षा, परिणाम, पुनर्मूल्यांकन, शुल्क और छात्रसंघ चुनाव जैसे मुद्दे उठाए जाते रहे हैं। फरवरी 2026 में भी NSUI ने विश्वविद्यालय में प्रदर्शन कर कुलपति को ज्ञापन सौंपा था। उस दौरान बीए एलएलबी और एलएलबी के छात्रों के परिणाम सुधारने, छात्रसंघ चुनाव कराने, बीपीएड विद्यार्थियों से कथित वसूली के मामले में कार्रवाई और पुनर्मूल्यांकन व्यवस्था लागू करने जैसी मांगें उठाई गई थीं।

विश्वविद्यालय में छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच पहले भी कई मौकों पर टकराव की स्थिति बन चुकी है। मई 2026 में विधि परीक्षाओं की तारीख आगे बढ़ाने की मांग को लेकर NSUI से जुड़े छात्रों ने प्रदर्शन किया था। उस दौरान छात्रों की सुरक्षाकर्मियों से नोकझोंक की खबर सामने आई थी। छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक से मुलाकात की मांग की थी, जबकि विश्वविद्यालय की ओर से परीक्षा कार्यक्रम को लेकर अलग पक्ष रखा गया था। इससे साफ है कि परीक्षा और प्रशासनिक फैसलों से जुड़े मुद्दे लगातार छात्र संगठनों के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

मंगलवार के प्रदर्शन में आशीष प्रिंस के साथ प्रदीप कर्दम, आयुष त्रिपाठी, प्रशांत चौधरी, लवली, मधु, प्रीति, आशीष, शिवम और शिवम चौधरी सहित कई छात्र मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि छात्रों की समस्याओं पर बातचीत के लिए अधिकारियों की ओर से स्पष्ट और नियमित व्यवस्था बनाई जाए। छात्र नेताओं ने कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जा सकता है।

फिलहाल पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि छात्रों द्वारा उठाई गई छह सूत्रीय मांगों पर विश्वविद्यालय प्रशासन क्या कदम उठाता है। हेल्पडेस्क टिकट शुल्क, डिग्री और मार्कशीट की प्रक्रिया, KMI के बीए छात्रों के को-करीकुलर पेपर से जुड़े परिणाम, पुराने विद्यार्थियों के लिए विशेष परीक्षा और डिग्री ट्रैकिंग सिस्टम जैसे मुद्दों पर छात्रों को प्रशासन से स्पष्ट जवाब की उम्मीद है। वहीं अधिकारी के कथित बयान को लेकर भी छात्रों में नाराजगी बनी हुई है। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र संगठन बातचीत के जरिए इन मुद्दों का समाधान निकालते हैं तो विवाद को शांत किया जा सकता है, लेकिन मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो विश्वविद्यालय परिसर में छात्र आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Leave a comment