अयोध्या में मरीज को 200 मीटर फर्श पर घसीटा: जिला अस्पताल में 3 दिन से भर्ती था मरीज, CMS बोले- मदद कर रहा था युवक

अयोध्या जिला अस्पताल में मरीज को फर्श पर करीब 200 मीटर घसीटकर ले जाने का वीडियो वायरल हुआ। CMS ने कहा- युवक मरीज की मदद कर रहा था।
अयोध्या में मरीज को 200 मीटर फर्श पर घसीटा: जिला अस्पताल में 3 दिन से भर्ती था मरीज, CMS बोले- मदद कर रहा था युवक
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अयोध्या जिला अस्पताल से सामने आए एक वीडियो ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों की देखभाल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो में एक मरीज अस्पताल के फर्श पर पड़ा दिखाई दे रहा है और एक युवक उसके हाथ पकड़कर उसे फर्श पर खींचते हुए ले जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक मरीज को अस्पताल परिसर में करीब 200 मीटर तक इसी तरह ले जाया गया। घटना सोमवार दोपहर करीब एक बजे की बताई जा रही है, जबकि इसका वीडियो मंगलवार को सामने आया। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की ओर से मामले पर सफाई दी गई है।

अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि मरीज को घसीटकर ले जाने वाला व्यक्ति अस्पताल का कर्मचारी नहीं था। उनके अनुसार वह किसी दूसरे मरीज के साथ आया अटेंडेंट था और मरीज की मदद करने की कोशिश कर रहा था। CMS के मुताबिक मरीज ने उसे वार्ड तक पहुंचाने के लिए कहा था। हालांकि, वायरल वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल में मरीजों की सहायता के लिए उपलब्ध व्यवस्था और लावारिस मरीजों की देखभाल पर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के मुताबिक मरीज को 3 अक्टूबर की शाम करीब छह बजे एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल लाया गया था। उस समय उसे सामान्य वार्ड में भर्ती किया गया था। अस्पताल प्रशासन के अनुसार मरीज के साथ कोई तीमारदार नहीं था, जिसके चलते रविवार शाम करीब सात बजे उसे लावारिस वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद से वह अस्पताल में ही भर्ती था। रिपोर्ट के अनुसार मरीज की हालत ऐसी थी कि वह ठीक से चल-फिर नहीं पा रहा था और बोलने में भी उसे परेशानी हो रही थी।

डॉक्टरों के मुताबिक मरीज को लिवर से जुड़ी बीमारी है और वह नशे का आदी रहा है। उसकी शारीरिक कमजोरी के कारण वह खुद चलकर एक जगह से दूसरी जगह जाने की स्थिति में नहीं था। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज अपने परिवार और घर के बारे में भी सही जानकारी नहीं दे पा रहा था। ऐसे में उसे लावारिस मरीजों के लिए निर्धारित वार्ड में रखा गया था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि नशा नहीं मिलने के कारण मरीज बेचैन रहता था और उसकी तबीयत भी खराब थी।

सोमवार दोपहर करीब एक बजे मरीज को बलगम की जांच के लिए अस्पताल की लैब में ले जाया गया था। जांच पूरी होने के बाद उसे वापस लावारिस वार्ड में ले जाना था। इसी दौरान वह लैब के बाहर फर्श पर पहुंच गया। रिपोर्ट के मुताबिक उस समय उसके पास अस्पताल का कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। मरीज की हालत कमजोर होने के कारण वह अपने पैरों पर चलकर वार्ड तक नहीं जा सकता था।

इसी दौरान वहां मौजूद एक युवक ने मरीज को वार्ड तक पहुंचाने की कोशिश की। उपलब्ध रिपोर्ट में इस युवक की पहचान राम प्रसाद के रूप में की गई है। वह खुद अपने हाथ में फ्रैक्चर का इलाज कराने अस्पताल पहुंचा था। उसके मुताबिक जब उसने मरीज को फर्श पर पड़ा देखा तो आसपास कोई स्वास्थ्यकर्मी नजर नहीं आया। मरीज परेशान था और मदद के लिए आवाज लगा रहा था। इसके बाद उसने मरीज को अपने हाथों से खींचकर वार्ड तक पहुंचाने की कोशिश की।

वायरल वीडियो में इसी दौरान का दृश्य दिखाई दे रहा है। युवक मरीज के दोनों हाथों को पकड़कर उसे फर्श पर खींचता हुआ आगे बढ़ रहा है। अस्पताल के गलियारे में कुछ लोग आते-जाते भी दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अस्पताल की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जाने लगे। लोगों ने सवाल किया कि जब मरीज खुद चलने की स्थिति में नहीं था तो उसे स्ट्रेचर या व्हीलचेयर की मदद से वार्ड तक क्यों नहीं पहुंचाया गया।

दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन ने इस मामले को अलग तरीके से बताया है। CMS डॉ. राजेश सिंह का कहना है कि मरीज को घसीटकर ले जाने वाला युवक अस्पताल का कर्मचारी नहीं था। वह दूसरे मरीज का अटेंडेंट था और मरीज की मदद करने की कोशिश कर रहा था। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक युवक ने मरीज की बात सुनकर उसे वार्ड तक पहुंचाने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ली थी। इसी दौरान कुछ लोगों ने उसे बताया कि उसका वीडियो बनाया जा रहा है, जिसके बाद उसने मरीज को रास्ते में ही छोड़ दिया।

CMS के अनुसार जब अस्पताल कर्मचारियों को इस बारे में जानकारी हुई तो एक कर्मचारी ने युवक को रास्ते में रोक दिया। इसके बाद मरीज को स्ट्रेचर पर रखा गया और उसे लावारिस वार्ड तक पहुंचाया गया। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि मरीज को बाद में बेड पर शिफ्ट कर दिया गया और उसका इलाज जारी है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक CMS ने कहा कि सूचना मिलने के करीब पांच मिनट के भीतर स्टाफ मौके पर पहुंच गया था और मरीज को बेड पर शिफ्ट किया गया।

हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अस्पताल परिसर में एक कमजोर और चलने में असमर्थ मरीज को ऐसी स्थिति में क्यों जाना पड़ा। यदि मरीज को जांच के लिए लैब तक ले जाया गया था तो जांच पूरी होने के बाद उसे वापस वार्ड तक पहुंचाने की जिम्मेदारी किसकी थी, यह भी सवालों के घेरे में है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उस समय मरीज के पास कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था, जबकि दूसरी तरफ मरीज को सहायता की आवश्यकता थी।

इस घटना ने खास तौर पर लावारिस मरीजों की देखभाल की व्यवस्था पर ध्यान खींचा है। ऐसे मरीजों के साथ अक्सर यह समस्या होती है कि उनके पास परिवार का कोई सदस्य या निजी अटेंडेंट नहीं होता। अस्पताल में भर्ती होने के बाद दवा, जांच, वार्ड तक ले जाने और अन्य जरूरतों के लिए उन्हें स्वास्थ्यकर्मियों की सहायता पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में अगर किसी मरीज को खुद चलने में परेशानी हो तो उसके लिए स्ट्रेचर, व्हीलचेयर या अस्पताल के कर्मचारी की उपलब्धता बेहद जरूरी हो जाती है।

रिपोर्ट के मुताबिक सामाजिक कार्यकर्ता रितेश दास ने भी इस घटना पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लावारिस वार्ड की व्यवस्था और वहां भर्ती मरीजों की निगरानी को लेकर जांच की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि लावारिस मरीजों की स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने इस मामले को मुख्यमंत्री और जिले के अधिकारियों के सामने उठाने की बात कही है।

वहीं अस्पताल प्रशासन ने वायरल वीडियो को लेकर अपनी सफाई दी है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो में दिखाई देने वाली स्थिति को पूरे घटनाक्रम के संदर्भ से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। उनका दावा है कि युवक मरीज की मदद के उद्देश्य से उसे वार्ड तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा था। इसके बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि मरीज को फर्श पर खींचकर ले जाने के बजाय अस्पताल की निर्धारित सुविधा का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया।

अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए स्ट्रेचर और व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं इसलिए जरूरी होती हैं ताकि कमजोर या गंभीर मरीजों को बिना परेशानी एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक ले जाया जा सके। खासकर ऐसे मरीज जिनके साथ कोई परिजन मौजूद नहीं है, उनकी जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। अयोध्या जिला अस्पताल की इस घटना के बाद यह मुद्दा सामने आया है कि लावारिस मरीजों के लिए अस्पताल में सहायता की व्यवस्था कितनी प्रभावी है और जरूरत के समय मरीज को तत्काल कर्मचारी या उपकरण उपलब्ध होते हैं या नहीं।

घटना के वीडियो ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में यह भी स्पष्ट है कि अस्पताल प्रशासन युवक को अपना कर्मचारी नहीं मान रहा है। इसलिए वीडियो में दिख रही घटना और CMS की सफाई दोनों को साथ रखकर पूरे मामले को समझना जरूरी है। फिलहाल अस्पताल की ओर से मरीज का इलाज जारी होने की बात कही गई है।

इस घटना के बाद सबसे जरूरी बात यह है कि मरीज की हालत और इलाज पर ध्यान दिया जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि आगे किसी मरीज को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। अगर जांच में अस्पताल की ओर से किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। साथ ही लावारिस मरीजों की निगरानी, उन्हें जांच के लिए ले जाने और वापस वार्ड तक पहुंचाने की स्पष्ट व्यवस्था बनाने की जरूरत भी सामने आई है।

फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर लोगों के बीच चर्चा है और अस्पताल प्रशासन अपनी ओर से इसे मरीज की मदद की घटना बता रहा है। वहीं वीडियो में मरीज को फर्श पर खींचकर ले जाते देखे जाने के कारण अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं। पूरे मामले में मरीज की स्थिति, अस्पताल की सहायता व्यवस्था और घटना के दौरान मौजूद कर्मचारियों की भूमिका को लेकर यदि कोई आधिकारिक जांच होती है तो उससे तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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