लखनऊ में चल रही श्रीमद्भागवत राधारमण कथा के दौरान प्रसिद्ध कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण से जुड़े धार्मिक स्थलों को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भगवान श्रीराम की प्रतिष्ठा और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि की भव्यता भी लौटनी चाहिए। उन्होंने लखनऊ की संस्कृति, तहजीब और सामाजिक व्यवहार की भी चर्चा करते हुए कहा कि संसार लखनऊ से तमीज सीखता है। पुंडरीक गोस्वामी इन दिनों ऐशबाग स्थित डीएवी कॉलेज में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत राधारमण कथा का वाचन कर रहे हैं। कथा का आयोजन 4 से 10 अक्टूबर तक किया जा रहा है।
कथा के दौरान धार्मिक और सामाजिक विषयों पर बोलते हुए पुंडरीक गोस्वामी ने अयोध्या में भगवान श्रीराम की प्रतिष्ठा को महत्वपूर्ण धार्मिक घटना के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि योगी सरकार के कार्यकाल में रामजी प्रतिष्ठित हुए हैं और जिस तरह अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर आकार ले चुका है, उसी तरह मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि की भव्यता भी वापस आनी चाहिए। उनके इस बयान ने धार्मिक स्थलों के विकास और सांस्कृतिक विरासत को लेकर चल रही चर्चाओं को फिर से चर्चा में ला दिया है।
पुंडरीक गोस्वामी ने कहा कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। उनके अनुसार अयोध्या, मथुरा और वृंदावन केवल धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान से जुड़े स्थान हैं। इसलिए इन तीर्थस्थलों का विकास ऐसा होना चाहिए जिससे वहां आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक वातावरण के साथ बेहतर सुविधाएं भी मिल सकें। उनके बयान में धार्मिक आस्था के साथ-साथ इन स्थानों की सांस्कृतिक पहचान को प्रमुखता दी गई।
उन्होंने लखनऊ की पहचान का उल्लेख करते हुए शहर की तहजीब और व्यवहार की भी तारीफ की। पुंडरीक गोस्वामी ने कहा कि लखनऊ की संस्कृति में बोलचाल, सम्मान और व्यवहार की एक अलग परंपरा रही है। उनके मुताबिक यहां की तहजीब और अदब देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान रखती है। उन्होंने कहा कि संसार लखनऊ से तमीज सीखता है। उनके इस कथन को शहर की गंगा-जमुनी सांस्कृतिक परंपरा और पुराने सामाजिक व्यवहार से जोड़कर देखा जा रहा है।
पुंडरीक गोस्वामी इन दिनों लखनऊ में धार्मिक कार्यक्रम में कथा वाचन कर रहे हैं। श्री राधा रमण सेवा समिति की ओर से डीएवी कॉलेज, पंडित रास बिहारी तिवारी मार्ग, ऐशबाग में 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक श्रीमद्भागवत राधारमण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के शुभारंभ से पहले सुंदरकांड का पाठ कराया गया था। इसके बाद पुंडरीक गोस्वामी के कथा स्थल पर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। कथा की शुरुआत श्री राधारमण लाल जी के जयकारों, शंखनाद और हरिनाम संकीर्तन के साथ हुई।
आयोजकों के मुताबिक पितृपक्ष के अवसर पर आयोजित इस कथा का उद्देश्य धार्मिक अनुष्ठान के साथ श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत के आध्यात्मिक संदेश से जोड़ना है। कथा में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, प्रेम, करुणा और समर्पण से जुड़े प्रसंगों को विस्तार से बताया जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने के लिए पहुंच रहे हैं। कार्यक्रम में धार्मिक वातावरण बनाए रखने के साथ श्रद्धालुओं के बैठने, आवागमन और सुरक्षा की व्यवस्था भी की गई है।
पुंडरीक गोस्वामी का लखनऊ से पुराना जुड़ाव भी रहा है। इससे पहले भी वह डीएवी कॉलेज में श्रीमद्भागवत कथा कर चुके हैं। जनवरी 2025 में आयोजित कथा के दौरान उन्होंने युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने और संस्कृत भाषा को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि युवा वर्ग को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के लिए सरकार और समाज दोनों स्तरों पर प्रयास किए जाने चाहिए।
उनके प्रवचनों में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के साथ शास्त्रों और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ने पर भी जोर रहता है। इससे पहले लखनऊ में कथा के दौरान उन्होंने कहा था कि लोगों को शास्त्रों से जुड़ना चाहिए, क्योंकि शास्त्रों के अध्ययन से अपनी मूल संस्कृति को समझने में मदद मिलती है। उन्होंने विशेष रूप से भगवद्गीता के अध्ययन का उल्लेख किया था और कहा था कि गीता का ज्ञान भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी लोग प्राप्त कर रहे हैं।
पुंडरीक गोस्वामी की धार्मिक पहचान मुख्य रूप से कृष्ण भक्ति और वैष्णव परंपरा से जुड़ी हुई है। वह श्रीमद्भागवत, भगवद्गीता, चैतन्य चरितामृत और रामकथा पर प्रवचन करते हैं। उनके प्रवचनों में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक जीवन से जुड़े प्रसंग प्रमुख रहते हैं। उनके आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित कथा-सूत्रों में भी श्रीकृष्ण भक्ति और वैष्णव परंपरा से जुड़े विषयों पर उनके विचार उपलब्ध हैं।
लखनऊ में चल रही वर्तमान कथा के दौरान भी धार्मिक विषयों के साथ समाज और संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इससे पहले कथा के तीसरे दिन पुंडरीक गोस्वामी ने पितृपक्ष के महत्व पर बात की थी। उन्होंने पितरों के श्राद्ध, ब्राह्मण भोजन और भगवान को भोग लगाने की परंपरा को सनातन धार्मिक व्यवस्था का हिस्सा बताते हुए श्रद्धालुओं को इसके महत्व की जानकारी दी थी। कथा में हनुमान चालीसा और संकीर्तन भी कराया गया।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर पुंडरीक गोस्वामी की टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है जब मथुरा-वृंदावन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। उन्होंने अपने कथन में अयोध्या के बाद कृष्ण जन्मभूमि की भव्यता लौटने की बात कही। हालांकि, उनके इस बयान को उनके व्यक्तिगत धार्मिक विचार और कथावाचन के दौरान व्यक्त की गई राय के रूप में देखा जाना चाहिए। यह किसी सरकारी निर्णय या आधिकारिक घोषणा का बयान नहीं है।
अयोध्या का उल्लेख करते हुए पुंडरीक गोस्वामी पहले भी कह चुके हैं कि अयोध्या सदियों से दुनिया का मार्गदर्शन करती रही है। जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर अयोध्या में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि रामलला भव्य राम मंदिर में बालक राम के रूप में विराजमान हो गए हैं।
वर्तमान कथा के दौरान उनका संदेश केवल मंदिरों की भव्यता तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने धार्मिक स्थलों से जुड़ी आस्था, संस्कृति और सामाजिक व्यवहार को भी चर्चा का हिस्सा बनाया। लखनऊ की तहजीब की तारीफ करते हुए उनका “संसार लखनऊ से तमीज सीखता है” वाला बयान भी इसी संदर्भ में सामने आया। उनके अनुसार किसी शहर की पहचान केवल उसके भवनों और सड़कों से नहीं बल्कि वहां के लोगों के व्यवहार, भाषा और सामाजिक संस्कार से भी बनती है।
कथा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए ऐसे वक्तव्य धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश का माध्यम भी बन रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि सात दिवसीय कार्यक्रम में श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से भगवान की भक्ति, प्रेम और समर्पण का संदेश लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े श्रद्धालु और आयोजक भी मौजूद हैं।
लखनऊ में आयोजित इस कथा का समापन 10 अक्टूबर को होना है। इस दौरान प्रतिदिन अलग-अलग धार्मिक प्रसंगों पर कथा वाचन और संकीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। पितृपक्ष के अवसर पर आयोजित होने के कारण कथा में पितरों की शांति और धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व भी बताया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार कथा के माध्यम से राधा-कृष्ण की भक्ति, प्रेम, करुणा और सनातन परंपरा के आध्यात्मिक संदेश को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
पुंडरीक गोस्वामी के ताजा बयान में एक ओर अयोध्या में राम मंदिर को लेकर उनकी धार्मिक दृष्टि सामने आई, तो दूसरी ओर मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि की भव्यता लौटाने की इच्छा व्यक्त की गई। साथ ही उन्होंने लखनऊ की तहजीब की प्रशंसा करते हुए शहर की सामाजिक पहचान का उल्लेख किया। उनके इन बयानों के बाद कथा के दौरान कही गई बातें चर्चा का विषय बनी हुई हैं। फिलहाल श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन जारी है और श्रद्धालु लगातार कथा स्थल पर पहुंचकर धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं।











