अजमेर में दरगाह थाना पुलिस ने मोबाइल चोरी करने वाले सात शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर 18 लाख रुपए कीमत के 42 मोबाइल बरामद किए हैं। आरोपी भीड़भाड़ वाले बाजारों और धार्मिक स्थलों पर जेब व बैग से मोबाइल चोरी करते थे।
अजमेर: राजस्थान के अजमेर शहर में पुलिस ने मोबाइल चोरी की घटनाओं पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित जेबकतरा और मोबाइल चोरी गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से लगभग 18 लाख रुपये मूल्य के 42 चोरी किए गए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। यह कार्रवाई शहर में लगातार बढ़ रही मोबाइल चोरी की घटनाओं पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है।
अजमेर, जो देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रसिद्ध है, लंबे समय से भीड़भाड़ वाले इलाकों में जेबतराशी और मोबाइल चोरी जैसी घटनाओं से जूझ रहा था। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार किए गए आरोपी विशेष रूप से धार्मिक स्थलों, बाजारों, मेलों और सार्वजनिक आयोजनों में सक्रिय रहते थे, जहां लोगों की भीड़ का फायदा उठाकर वे चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे।
विशेष अभियान के तहत हुई कार्रवाई
अजमेर जिला पुलिस द्वारा अपराध नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। जिला पुलिस अधीक्षक उमा यादव के निर्देश पर शहर में चोरी, नकबजनी और लूट की घटनाओं पर निगरानी बढ़ाई गई थी। इसी क्रम में दरगाह थाना पुलिस ने मोबाइल चोरी के मामलों की गहन जांच शुरू की।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में दरगाह क्षेत्र और आसपास के बाजारों से मोबाइल चोरी की कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तकनीकी जांच, सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण और मुखबिरों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की। कई दिनों तक चली निगरानी और जांच के बाद पुलिस ने एक समन्वित अभियान चलाकर सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
पुलिस ने जिन सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, वे सभी अजमेर शहर के विभिन्न इलाकों के निवासी हैं। गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान इस प्रकार की गई है:
मोहम्मद अनवर (24 वर्ष), दरगाह बाजार क्षेत्र, मोहम्मद शफीक (25 वर्ष), क्लॉक टावर क्षेत्र, शाहिद हुसैन (20 वर्ष), दरगाह क्षेत्र, मशरत (27 वर्ष), केला बावड़ी क्षेत्र, शेख अजूबा (24 वर्ष), अंदरकोट क्षेत्र, सुल्ताना शेख (26 वर्ष), अंदरकोट क्षेत्र। शाकिर अली (24 वर्ष), लाखन कोटड़ी क्षेत्र
पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी लंबे समय से संगठित तरीके से चोरी की वारदातों में शामिल थे और इनके बीच स्पष्ट जिम्मेदारियों का बंटवारा भी था।
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42 मोबाइल फोन बरामद
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से विभिन्न कंपनियों के कुल 42 मोबाइल फोन बरामद किए। बरामद मोबाइल फोन की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 18 लाख रुपये बताई जा रही है।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, मोबाइल फोन अलग-अलग राज्यों और शहरों से आए श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से चोरी किए गए थे। बरामद मोबाइलों की पहचान और मालिकों तक उन्हें वापस पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस तकनीकी माध्यमों से मोबाइल फोन के IMEI नंबरों की जांच कर रही है ताकि वास्तविक मालिकों की पहचान सुनिश्चित की जा सके।
भीड़ का फायदा उठाकर करते थे चोरी
प्रारंभिक पूछताछ में यह सामने आया है कि आरोपी भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लोगों की गतिविधियों पर नजर रखते थे। जैसे ही उन्हें किसी व्यक्ति का ध्यान भटका हुआ दिखाई देता, वे जेब या बैग से मोबाइल निकाल लेते और मौके से फरार हो जाते। धार्मिक स्थलों, विशेष रूप से बड़े आयोजनों और मेलों में, यह गिरोह अधिक सक्रिय रहता था।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का लाभ उठाकर आरोपी आसानी से चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे। पुलिस का कहना है कि चोरी के बाद मोबाइल फोन तुरंत दूसरे लोगों को बेच दिए जाते थे या उन्हें विभिन्न स्थानों पर छिपाकर रखा जाता था ताकि पुलिस तक पहुंचना मुश्किल हो सके।
आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आए
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरफ्तार आरोपियों में से कई के खिलाफ पहले से भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें चोरी, मादक पदार्थों से संबंधित अपराध, अवैध हथियार रखने और आबकारी कानून के उल्लंघन जैसे मामले शामिल हैं।
कुछ आरोपियों को पूर्व में न्यायालय द्वारा सजा भी सुनाई जा चुकी है। इसके बावजूद वे अपराध की दुनिया में सक्रिय रहे और नए सदस्यों को अपने गिरोह में शामिल कर संगठित तरीके से चोरी की गतिविधियां जारी रखीं। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इस गिरोह का संबंध अन्य राज्यों या शहरों में सक्रिय आपराधिक नेटवर्क से भी है।
मोबाइल खरीदने वाले नेटवर्क की जांच
पुलिस जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू चोरी के मोबाइल खरीदने और बेचने वाले नेटवर्क तक पहुंचना भी है। अधिकारियों का मानना है कि चोरी किए गए मोबाइलों को बेचने के लिए आरोपियों के पास एक संगठित चैनल मौजूद था। पूछताछ के दौरान कई ऐसे नाम सामने आए हैं जो कथित रूप से चोरी के मोबाइल खरीदने या उनकी अवैध बिक्री में शामिल हो सकते हैं।
पुलिस इन सुरागों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि चोरी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल चोरों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होती, बल्कि चोरी का सामान खरीदने वाले नेटवर्क को भी समाप्त करना आवश्यक होता है।
सुरक्षा व्यवस्था और जागरूकता पर जोर
इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने नागरिकों और पर्यटकों से भी सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों ने सलाह दी है कि भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मोबाइल फोन और अन्य कीमती सामान सुरक्षित रखें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
अजमेर जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्रों में हर वर्ष लाखों लोग पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बढ़ाने और आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर अपराध पर नियंत्रण पाने की दिशा में काम कर रही हैं।









