ईरान के वरिष्ठ नेता Ali Larijani की मौत से देश की सत्ता संरचना को बड़ा झटका लगा है। वे सुरक्षा, विदेश नीति और रणनीतिक फैसलों के केंद्र में थे, जिससे सत्ता संतुलन पर गहरा असर पड़ा है।
Middle East: ईरान की राजनीति और सुरक्षा ढांचे के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाने वाले Ali Larijani की मौत को देश के लिए एक बड़ा रणनीतिक आघात माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह झटका इतना बड़ा है कि इसकी तुलना Ali Khamenei के नुकसान से भी की जा रही है। मौजूदा हालात में लारीजानी की भूमिका केवल एक नेता तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे ईरान की सत्ता संरचना के केंद्र में आ चुके थे।
युद्धकाल में सबसे प्रभावशाली चेहरा
पिछले कुछ हफ्तों में लारीजानी ईरान की सत्ता के सबसे मजबूत और प्रभावशाली चेहरे के रूप में उभरे थे। अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद जब शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को नुकसान हुआ, तब लारीजानी ने व्यवहारिक रूप से देश की रणनीतिक कमान संभाल ली थी। वे सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख के तौर पर युद्ध, आंतरिक सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े अहम फैसलों के केंद्र में थे।
राष्ट्रपति से भी ज्यादा प्रभाव
हालात ऐसे बन गए थे कि लारीजानी का प्रभाव राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से भी ज्यादा माना जाने लगा था। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई बड़े फैसलों के लिए अंतिम मंजूरी उन्हीं से ली जा रही थी। इंटरनेट प्रतिबंधों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी उनकी सहमति जरूरी हो गई थी। इससे साफ था कि युद्ध के दौरान असली शक्ति का केंद्र राष्ट्रपति नहीं, बल्कि सुरक्षा परिषद बन चुकी थी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पकड़
लारीजानी की सबसे बड़ी ताकत उनकी अंतरराष्ट्रीय पकड़ मानी जाती थी। उनकी न केवल ईरान की राजनीति पर मजबूत पकड़ थी, बल्कि चीन और रूस जैसे देशों में भी उनका प्रभाव था। यही वजह थी कि वे अमेरिका और इजरायल के लिए एक प्रमुख रणनीतिक लक्ष्य बने हुए थे। वे कूटनीति (diplomacy) और रणनीतिक फैसलों में संतुलन बनाने की क्षमता रखते थे।
परमाणु वार्ता में अहम भूमिका

अली लारीजानी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी बातचीत में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने 2006 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति George W. Bush के प्रशासन से संपर्क साधा था। हालांकि यह प्रयास सफल नहीं हुआ, लेकिन इससे उनकी कूटनीतिक सक्रियता और वैश्विक स्तर पर भूमिका का अंदाजा लगाया जा सकता है।
खामेनेई के करीबी और भरोसेमंद
लारीजानी को अयातुल्ला अली खामेनेई का करीबी और विश्वसनीय सहयोगी माना जाता था। उन्होंने हमेशा अमेरिका और इजरायल के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया और सार्वजनिक मंचों पर भी इस नीति को खुलकर सामने रखा। इंटरनेट मीडिया के जरिए भी वे लगातार अपने संदेश देते रहे, जिससे उनकी राजनीतिक सक्रियता और प्रभाव स्पष्ट होता था।
सुप्रीम लीडर बनने की अटकलें
हालांकि लारीजानी को खामेनेई का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा था, लेकिन वे सुप्रीम लीडर नहीं बन सकते थे। इसका कारण यह था कि वे वरिष्ठ शिया धर्मगुरु नहीं थे, जो इस पद के लिए जरूरी माना जाता है। इसके बावजूद उन्होंने बिना धार्मिक पद के ही ईरान की उच्च राजनीति में अपनी मजबूत जगह बना ली थी।
परिवार का मजबूत राजनीतिक नेटवर्क
लारीजानी का परिवार भी ईरान की सत्ता में काफी प्रभावशाली रहा है। उनके भाई सादेग लारीजानी न्यायपालिका के प्रमुख रह चुके हैं, जबकि दूसरे भाई मोहम्मद जवाद लारीजानी एक राजनयिक और सुप्रीम लीडर के सलाहकार के तौर पर काम कर चुके हैं। इस तरह पूरा परिवार मिलकर एक मजबूत राजनीतिक और वैचारिक शक्ति के रूप में उभरा।
लंबा राजनीतिक अनुभव
अली लारीजानी का राजनीतिक करियर लंबा और प्रभावशाली रहा है। उन्होंने सरकारी प्रसारण संस्था के प्रमुख के रूप में काम किया और इस दौरान सुधारवादी आंदोलन की आलोचना की। इसके बाद 2008 से 2020 तक वे संसद के स्पीकर रहे। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों में भूमिका निभाई और देश की राजनीति को दिशा दी।











