अमेरिका पर निर्भरता घटाने की तैयारी, भारत दौरे पर आ सकते हैं कनाडा PM

अमेरिका पर निर्भरता घटाने की तैयारी, भारत दौरे पर आ सकते हैं कनाडा PM

अमेरिकी टैरिफ वॉर से वैश्विक व्यापार संतुलन बदल रहा है। अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए कनाडा भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

India-Canada: अमेरिका की ओर से लगाए गए ऊंचे टैरिफ (Tariff) ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। इसका असर केवल छोटे देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और कनाडा जैसे बड़े व्यापारिक साझेदार भी इस दबाव को महसूस कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयात पर लगाए गए भारी शुल्क के चलते कई देश अब वैकल्पिक बाजारों की तलाश में जुट गए हैं।

इसी बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य में कनाडा की नई सरकार ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। कनाडा अब अमेरिका पर निर्भरता कम करना चाहता है और इसके लिए वह अपने व्यापारिक रिश्तों में विविधता लाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

भारत दौरे की तैयारी में कनाडा के नए प्रधानमंत्री

कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार अगले दशक में अमेरिका के बाहर अपने निर्यात को दोगुना करने की योजना पर काम कर रही है। इस रणनीति के तहत भारत को एक अहम व्यापारिक साझेदार के रूप में देखा जा रहा है।

कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने बताया कि दो साल से अधिक समय से चले आ रहे राजनयिक तनाव के बाद अब कनाडा के प्रधानमंत्री भारत दौरे की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले हफ्तों में मार्क कार्नी के नई दिल्ली पहुंचने की संभावना है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) को बढ़ाना है।

अमेरिकी टैरिफ का भारत और कनाडा पर असर

भारत और कनाडा दोनों ही देशों को अमेरिका की टैरिफ नीति का सीधा नुकसान झेलना पड़ रहा है। भारत पर अमेरिका ने कुल 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है। इसमें से 25 प्रतिशत शुल्क भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद से जुड़ा हुआ है। वहीं कनाडा पर अमेरिका ने 35 प्रतिशत टैरिफ लगाया है।

इन उच्च शुल्कों के कारण दोनों देशों के निर्यात पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में कनाडा के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह नए व्यापारिक साझेदारों की ओर रुख करे। भारत इस रणनीति में एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभर रहा है।

गैर-अमेरिकी निर्यात दोगुना करने का लक्ष्य

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट के जरिए अपनी सरकार की मंशा साफ की है। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक व्यापार माहौल में कनाडा की नई सरकार उन चीजों पर ध्यान दे रही है, जिन्हें वह खुद नियंत्रित कर सकती है।

कार्नी के अनुसार, कनाडा अगले दस वर्षों में अपने गैर-अमेरिकी निर्यात को दोगुना करेगा। इसका उद्देश्य कनाडाई व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा करना और हजारों नए रोजगार तैयार करना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

भारत यात्रा का समय और उद्देश्य

सीबीसी (CBC) के पावर एंड पॉलिटिक्स कार्यक्रम में बातचीत के दौरान भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने बताया कि मार्क कार्नी की भारत यात्रा 1 फरवरी को भारत का केंद्रीय बजट पेश होने के बाद होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। पटनायक के अनुसार, यह दौरा इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच “व्यवस्था में विश्वास” वापस लौट रहा है।

दो साल के तनाव के बाद रिश्तों में नई शुरुआत

भारत और कनाडा के बीच पिछले दो वर्षों में रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। राजनयिक स्तर पर कई पहलें इस दौरान ठप पड़ी रहीं। दिनेश पटनायक ने कहा कि अब दोनों देश उन पहलों को पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो इस “मामूली अंतराल” के कारण आगे नहीं बढ़ पाईं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत सरकार ने हमेशा उन आरोपों को खारिज किया है, जिनमें उसकी संलिप्तता की बात कही गई थी। पटनायक ने दोहराया कि भारत का रुख शुरू से स्पष्ट रहा है और भारत सरकार के खिलाफ कोई ठोस मामला नहीं बनता है।

नेतृत्व बदलने से बदला कनाडा का रुख

भारतीय उच्चायुक्त के अनुसार, वर्तमान नेतृत्व में कनाडा का दृष्टिकोण बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। सीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा को एक नया प्रधानमंत्री मिला है, जो देश के व्यवहार और प्राथमिकताओं में बदलाव ला रहे हैं।

इस बदलाव का असर भारत-कनाडा संबंधों पर भी दिख रहा है। नई सरकार अब टकराव की बजाय संवाद और सहयोग पर जोर दे रही है, जिससे द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार की उम्मीद बढ़ गई है।

2023 से शुरू हुआ था राजनयिक विवाद

भारत और कनाडा के बीच राजनयिक तनाव की शुरुआत 2023 में हुई थी। भारत ने उस समय कनाडा में खालिस्तानी अलगाववादी तत्वों के प्रति कथित नरमी पर चिंता जताई थी।

इसी वर्ष कनाडा में एक गुरुद्वारे के बाहर एनआईए द्वारा नामित आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या हुई थी। तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस मामले में भारतीय एजेंटों की संलिप्तता का आरोप लगाया था। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया और उन्हें निराधार बताया।

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