जमशेदपुर में टाटा वर्कर्स यूनियन की बैठक में हंगामा: ग्रेड रिवीजन और फिटमेंट स्लिप पर भिड़े पदाधिकारी, धक्का-मुक्की तक पहुंचा मामला

जमशेदपुर में टाटा वर्कर्स यूनियन की बैठक में ग्रेड रिवीजन और फिटमेंट स्लिप पर विवाद बढ़ गया। पदाधिकारियों में बहस के बाद धक्का-मुक्की हुई।
जमशेदपुर में टाटा वर्कर्स यूनियन की बैठक में हंगामा: ग्रेड रिवीजन और फिटमेंट स्लिप पर भिड़े पदाधिकारी, धक्का-मुक्की तक पहुंचा मामला
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जमशेदपुर: टाटा वर्कर्स यूनियन की सोमवार को हुई कमेटी मीटिंग में कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को लेकर जमकर हंगामा हुआ। बैठक में ग्रेड रिवीजन के बाद कर्मचारियों को मिली फिटमेंट स्लिप और बंचिंग सिस्टम को लेकर सवाल उठाए गए। मुद्दे पर चर्चा के दौरान यूनियन के ही पदाधिकारी और कमेटी मेंबर आमने-सामने आ गए। पहले तीखी बहस हुई और देखते ही देखते मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। बैठक में मौजूद दूसरे कमेटी मेंबरों ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों को अलग किया, जिसके बाद स्थिति को किसी तरह शांत कराया जा सका। इस पूरे घटनाक्रम ने टाटा वर्कर्स यूनियन के भीतर ग्रेड रिवीजन और कर्मचारियों को मिले लाभ को लेकर चल रही नाराजगी को खुलकर सामने ला दिया है।

जानकारी के अनुसार, कमेटी मीटिंग माइकल जॉन सभागार में सुबह करीब 9:30 बजे आयोजित की गई थी। बैठक का मूल एजेंडा पिछले चार महीनों के अकाउंट्स को पास करना था, लेकिन बैठक शुरू होते ही कर्मचारियों को ग्रेड रिवीजन के बाद मिली फिटमेंट स्लिप और बंचिंग सिस्टम का मुद्दा प्रमुख हो गया। कमेटी मेंबरों की ओर से इन मुद्दों पर सवाल उठाए गए और यह जानने की कोशिश की गई कि ग्रेड रिवीजन के बाद कर्मचारियों को वास्तविक रूप से कितना लाभ मिला है तथा फिटमेंट स्लिप में दर्ज विवरण किस आधार पर तय किए गए हैं।

बैठक की शुरुआत में सहायक सचिव नितेश राज पिछली बैठक की कार्यवाही की पुष्टि के लिए माइक पर पहुंचे थे। इसी दौरान सेंटर प्लांट के कमेटी मेंबर और पूर्व उपाध्यक्ष शिवेश वर्मा अपने समर्थकों के साथ मंच के पास पहुंच गए। उन्होंने बंचिंग सिस्टम और ग्रेड रिवीजन से संबंधित सवालों पर तत्काल चर्चा की मांग की। इसी बात को लेकर बैठक का माहौल गर्म होने लगा। एक-दूसरे पर सवाल और जवाब का सिलसिला शुरू हुआ और कुछ ही देर में बहस काफी तीखी हो गई।

ग्रेड रिवीजन का मुद्दा टाटा स्टील के कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वेतन समझौते के बाद जब कर्मचारियों को फिटमेंट स्लिप मिली तो कई कर्मचारियों और कमेटी मेंबरों ने इसमें मिलने वाले लाभ और गणना को लेकर सवाल उठाए। इससे पहले भी कर्मचारियों के बीच फिटमेंट स्लिप को लेकर नाराजगी सामने आ चुकी है। रिपोर्टों के मुताबिक 30 से अधिक कमेटी मेंबर और कर्मचारियों ने वेज रिवीजन से होने वाले लाभ या नुकसान को लेकर यूनियन के सामने अपनी आपत्तियां रखी थीं।

सोमवार की बैठक में यही नाराजगी और असंतोष खुलकर सामने आया। कमेटी मेंबरों का कहना था कि फिटमेंट स्लिप और बंचिंग सिस्टम से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। कर्मचारियों के वेतन और भविष्य के लाभ पर असर डालने वाले मुद्दे होने के कारण वे इस पर विस्तृत चर्चा चाहते थे। बैठक का उद्देश्य भले ही अकाउंट्स पास करना था, लेकिन कर्मचारियों से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे के कारण पूरी बैठक का माहौल बदल गया।

विवाद के दौरान यूनियन पदाधिकारियों के बीच कंपनी के एमडी से अकेले मुलाकात करने का मुद्दा भी उठाया गया। ग्रेड रिवीजन से जुड़ी प्रक्रिया और प्रबंधन के साथ बातचीत को लेकर भी सवाल किए गए। बताया गया कि इसी दौरान सहायक सचिव नितेश राज और उपाध्यक्ष संजय सिंह के बीच बहस बढ़ गई और स्थिति धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। मौजूद कमेटी मेंबरों ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया।

इस घटना को टाटा वर्कर्स यूनियन के भीतर बढ़ते मतभेद के तौर पर देखा जा रहा है। ग्रेड रिवीजन लंबे समय से कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में रहा है। वेतन समझौते से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर कर्मचारियों की नजर रहती है और फिटमेंट स्लिप मिलने के बाद वास्तविक लाभ स्पष्ट होता है। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी को अपनी गणना या लाभ को लेकर संदेह हो तो वह यूनियन से स्पष्टीकरण की उम्मीद करता है।

ग्रेड रिवीजन को लेकर यूनियन और प्रबंधन के बीच पहले भी लंबी बातचीत हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वेज रिवीजन की अवधि को लेकर सहमति बनने के बाद भी एमजीबी और डीए के प्वाइंट वैल्यू जैसे मुद्दों पर पेच बना हुआ था। इसी पृष्ठभूमि में कर्मचारियों के बीच समझौते के अलग-अलग पहलुओं को लेकर चर्चा लगातार जारी रही है।

फिटमेंट स्लिप को लेकर असंतोष की एक वजह यह भी है कि कर्मचारी अपने वेतन में हुए बदलाव को सीधे इसी दस्तावेज के जरिए समझते हैं। बेसिक, डीए, इंक्रीमेंट और अन्य लाभों की गणना के आधार पर कर्मचारी यह देखते हैं कि नए वेतन समझौते से उन्हें कितना फायदा हुआ। यदि किसी कर्मचारी को लगता है कि उसकी गणना उम्मीद के अनुरूप नहीं है तो वह यूनियन से जवाब चाहता है। यही वजह है कि फिटमेंट स्लिप को लेकर उठे सवालों ने बैठक में इतना गंभीर रूप ले लिया।

बंचिंग सिस्टम का मुद्दा भी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है। ग्रेड रिवीजन में कर्मचारियों की वेतन संरचना और पुराने वेतनमान से नए वेतनमान में समायोजन के दौरान बंचिंग का प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए कमेटी मेंबरों की ओर से इस प्रक्रिया की जानकारी और पारदर्शिता की मांग की गई। उनका कहना था कि कर्मचारियों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि उनका नया वेतन किस तरह निर्धारित हुआ और किस आधार पर फिटमेंट किया गया।

टाटा वर्कर्स यूनियन की बैठक में हुई हाथापाई ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है। यूनियन की बैठकों में कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर तीखी बहस होना कोई असामान्य बात नहीं है, लेकिन जब बहस व्यक्तिगत टकराव और धक्का-मुक्की तक पहुंच जाए तो इससे संगठन की छवि पर भी सवाल उठते हैं। यूनियन के पदाधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे कर्मचारियों के मुद्दों को बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके से सामने रखें।

बैठक में मौजूद कमेटी मेंबरों ने जिस तरह हस्तक्षेप कर विवाद को शांत कराया, उससे तत्काल स्थिति को संभाल लिया गया। इसके बाद बैठक को आगे बढ़ाया गया। हालांकि घटना के बाद यूनियन के अंदर इस बात को लेकर चर्चा तेज होना स्वाभाविक है कि आखिर कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे पर पदाधिकारी एक-दूसरे से इस स्तर तक क्यों भिड़ गए।

इस पूरे विवाद का असर आने वाले दिनों में यूनियन की बैठकों पर भी दिखाई दे सकता है। यदि ग्रेड रिवीजन और फिटमेंट स्लिप को लेकर कर्मचारियों की नाराजगी बनी रहती है तो कमेटी की अगली बैठकों में भी इस मुद्दे पर सवाल उठ सकते हैं। यूनियन नेतृत्व के सामने अब चुनौती होगी कि कर्मचारियों की शंकाओं का स्पष्ट जवाब दिया जाए और पदाधिकारियों के बीच आपसी मतभेद को भी नियंत्रित किया जाए।

टाटा स्टील के कर्मचारियों के बीच वेतन समझौते को लेकर चर्चा पहले से चल रही है। हालिया रिपोर्टों में 1200 से अधिक एनएस ग्रेड कर्मचारियों के भत्तों में कटौती से जुड़ी नाराजगी का भी उल्लेख सामने आया है। ऐसे में फिटमेंट स्लिप और ग्रेड रिवीजन को लेकर किसी भी तरह की अस्पष्टता कर्मचारियों के असंतोष को और बढ़ा सकती है।

यूनियन के लिए सबसे जरूरी यह होगा कि वह कर्मचारियों को पूरी जानकारी उपलब्ध कराए। यदि किसी कर्मचारी को फिटमेंट स्लिप में कोई अंतर या गलती दिखाई देती है तो उसके समाधान के लिए स्पष्ट प्रक्रिया होनी चाहिए। कमेटी मेंबरों को भी पूरी जानकारी देकर उनके सवालों का जवाब देना जरूरी है, ताकि बैठक के दौरान विवाद की स्थिति न बने।

टाटा वर्कर्स यूनियन का इतिहास लंबा रहा है और टाटा स्टील के कर्मचारियों के हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौतों में यूनियन की भूमिका रही है। ऐसे में संगठन के भीतर किसी भी तरह का विवाद सीधे कर्मचारियों के बीच संदेश देता है। खासकर जब मामला वेतन, भत्ते और ग्रेड रिवीजन जैसे आर्थिक मुद्दों से जुड़ा हो तो कर्मचारी यूनियन नेतृत्व से एकजुट और स्पष्ट रुख की उम्मीद करते हैं।

सोमवार की बैठक में हुई घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह सिर्फ दो पदाधिकारियों के बीच बहस का मामला नहीं रही। विवाद की शुरुआत ही कर्मचारियों के वेतन और ग्रेड रिवीजन से जुड़े सवालों से हुई। इससे यह संकेत मिलता है कि कर्मचारियों और कमेटी मेंबरों के बीच इस समझौते को लेकर अभी भी कई सवाल मौजूद हैं। यदि इन सवालों का समय पर समाधान नहीं हुआ तो यूनियन के भीतर मतभेद आगे भी बढ़ सकते हैं।

बैठक में उठे सवालों का समाधान संवाद के जरिए निकालना ही सबसे बेहतर रास्ता माना जा रहा है। यूनियन नेतृत्व यदि कमेटी मेंबरों को फिटमेंट स्लिप और बंचिंग सिस्टम से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराता है तथा जिन कर्मचारियों को परेशानी है, उनकी व्यक्तिगत शिकायतों की जांच कराता है तो विवाद को शांत किया जा सकता है। इससे कर्मचारियों का भरोसा भी मजबूत होगा।

फिलहाल जमशेदपुर की इस बैठक ने टाटा वर्कर्स यूनियन के भीतर चल रही खींचतान को सामने ला दिया है। ग्रेड रिवीजन और फिटमेंट स्लिप जैसे मुद्दे कर्मचारियों के वेतन और भविष्य के आर्थिक लाभ से जुड़े हैं, इसलिए इन पर उठने वाले सवालों को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। बैठक में हाथापाई की स्थिति बनने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यूनियन नेतृत्व कर्मचारियों की नाराजगी और पदाधिकारियों के बीच बढ़ते मतभेद को किस तरह संभालता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फिटमेंट स्लिप और बंचिंग सिस्टम को लेकर कमेटी मेंबरों की शंकाओं का स्पष्ट समाधान होगा और क्या यूनियन के पदाधिकारी आगे ऐसी स्थिति से बच पाएंगे। फिलहाल बैठक में हुआ विवाद इस बात की ओर इशारा करता है कि ग्रेड रिवीजन का मुद्दा अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। कर्मचारियों की अपेक्षाओं, फिटमेंट स्लिप में दर्ज लाभ और यूनियन की भूमिका को लेकर चर्चा आने वाले दिनों में भी जारी रहने की संभावना है।

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