एएमयू में कक्षा बंद कराने की कोशिश, विरोध पर मारपीट-धमकी का आरोप; 7 लोगों पर केस दर्ज

एएमयू में कक्षा बंद कराने के लिए छात्रों पर दबाव बनाने और विरोध करने पर मारपीट-धमकी का आरोप लगा है। मामले में सात लोगों पर केस दर्ज हुआ है।
एएमयू में कक्षा बंद कराने की कोशिश, विरोध पर मारपीट-धमकी का आरोप; 7 लोगों पर केस दर्ज
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच कक्षाएं बंद कराने की कोशिश और छात्रों के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोग विश्वविद्यालय के सांख्यिकी विभाग की चल रही कक्षा में पहुंच गए और छात्रों से कक्षा का बहिष्कार करने के लिए बाहर आने को कहा। जब छात्रों ने इसका विरोध किया तो विवाद बढ़ गया और मारपीट तथा धमकी देने के आरोप लगाए गए। मामले में सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।

घटना 30 सितंबर 2026 की सुबह करीब नौ बजे की बताई जा रही है। पुलिस में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, उस समय एएमयू के सांख्यिकी विभाग के कक्ष संख्या एल-8 में नियमित कक्षा चल रही थी। इसी दौरान कुछ लोगों का समूह कथित तौर पर कक्षा के भीतर पहुंच गया। आरोप है कि इन लोगों ने छात्रों से कक्षा छोड़कर छात्रसंघ चुनाव को लेकर चल रहे धरने में शामिल होने के लिए कहा।

एएमयू में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर कई दिनों से छात्रों का आंदोलन चल रहा है। आंदोलनकारी छात्र चुनाव की तारीख घोषित करने और चुनाव प्रक्रिया शुरू कराने की मांग कर रहे हैं। 1 अक्टूबर को भी यह आंदोलन जारी रहा और प्रदर्शनकारी छात्रों ने कई विभागों में जाकर कक्षाएं बंद कराने का प्रयास किया था।

इसी आंदोलन के दौरान 30 सितंबर को सांख्यिकी विभाग की कक्षा में हुए विवाद ने मामले को और गंभीर बना दिया। शिकायत के अनुसार, कक्षा में मौजूद छात्रों ने कथित तौर पर कक्षा बंद कराने और बाहर जाने के दबाव का विरोध किया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई और मामला मारपीट तक पहुंच गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विरोध करने वाले छात्रों के साथ मारपीट की गई और उन्हें धमकी भी दी गई।

मामले में दर्ज शिकायत के आधार पर पुलिस ने सात लोगों को आरोपी बनाया है। पुलिस अब एफआईआर में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। घटना के दौरान कक्षा में कौन-कौन छात्र मौजूद थे, वहां पहुंचे लोगों की पहचान क्या है और विवाद किस बात पर बढ़ा, इन सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।

एएमयू में पिछले कुछ दिनों से छात्रसंघ चुनाव को लेकर माहौल लगातार सक्रिय बना हुआ है। आंदोलनकारी छात्रों का धरना डक प्वाइंट पर जारी है और छात्र चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग कर रहे हैं। 1 अक्टूबर को आंदोलन के 11वें दिन भी बड़ी संख्या में छात्र जुटे रहे। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने की मांग दोहराई।

प्रदर्शनकारियों की ओर से कई विभागों में जाकर कक्षाएं बंद कराने का प्रयास किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है। इसके बाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई और आंदोलन के बीच तनाव की स्थिति बनती दिखाई दी। एक तरफ छात्र आंदोलन में अधिक से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे छात्रों को अपनी नियमित पढ़ाई जारी रखने की जरूरत है। इसी टकराव के बीच सांख्यिकी विभाग में विवाद हुआ।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कक्षा में पहुंचे लोगों ने छात्रों को आंदोलन में शामिल होने के लिए कहा। जब कुछ छात्रों ने कक्षा छोड़ने से इनकार किया तो उन्हें कथित तौर पर घेर लिया गया। विरोध करने पर मारपीट और धमकी देने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।

इस घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। इससे पहले भी छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर एएमयू में प्रदर्शन के दौरान छात्रों और प्रॉक्टोरियल टीम के बीच धक्का-मुक्की की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 21 सितंबर को भी चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान छात्रों और प्रॉक्टोरियल टीम के बीच करीब एक घंटे तक धक्का-मुक्की हुई थी।

सितंबर के अंतिम सप्ताह में भी छात्रसंघ चुनाव को लेकर विरोध प्रदर्शन के दौरान तनाव की स्थिति बनी थी। 29 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, दिनभर प्रदर्शन के बाद रात में धरना स्थल पर मारपीट की घटना हुई थी, जिसमें एक छात्र के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। रिपोर्ट में धरना स्थल पर बाहरी युवकों के पहुंचने और विवाद होने का भी उल्लेख किया गया था।

लगातार हो रहे प्रदर्शनों के बीच कक्षाओं को लेकर विवाद सामने आने से विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर छात्रों के लोकतांत्रिक मांगों से जुड़े प्रदर्शन को संभालना है, वहीं दूसरी ओर नियमित शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारू बनाए रखना भी जरूरी है। कक्षा के भीतर किसी तरह का दबाव, हंगामा या मारपीट होने से पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठते हैं।

पुलिस की जांच में यह देखा जाएगा कि घटना के समय कक्षा में क्या हुआ था और वहां मौजूद लोगों की वास्तविक भूमिका क्या रही। पुलिस शिकायतकर्ता और अन्य छात्रों के बयान दर्ज कर सकती है। यदि घटना से संबंधित कोई वीडियो फुटेज, मोबाइल रिकॉर्डिंग या अन्य साक्ष्य उपलब्ध होते हैं तो उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है।

मामले में सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद अब आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। एफआईआर में दर्ज आरोपों के आधार पर पुलिस घटना की परिस्थितियों को समझने का प्रयास करेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि विवाद केवल कक्षा बंद कराने के प्रयास तक सीमित था या उसके बाद कोई अन्य घटना भी हुई।

एएमयू में छात्रसंघ चुनाव को लेकर चल रहे आंदोलन के कारण आने वाले दिनों में भी विश्वविद्यालय परिसर में गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। आंदोलनकारी छात्र चुनाव की तारीख और प्रक्रिया को लेकर अपनी मांग पर कायम हैं। दूसरी तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से शैक्षणिक गतिविधियों को सामान्य बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

फिलहाल सांख्यिकी विभाग की कक्षा में कथित तौर पर घुसकर कक्षा बंद कराने के प्रयास और उसके बाद मारपीट-धमकी के आरोपों को लेकर दर्ज एफआईआर पुलिस जांच के अधीन है। सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, लेकिन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। पुलिस अब घटना से जुड़े लोगों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

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